चीन का भारी दबाव भी नाकाम, विरोध के बावजूद राष्ट्रपति लाई पहुंचे स्वातिनी
punjabkesari.in Sunday, May 03, 2026 - 04:33 PM (IST)
International Desk: ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते (Lai Ching-te) ने चीन के भारी दबाव के बावजूद अफ्रीकी देश Eswatini का दौरा किया है। यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि एस्वातिनी अफ्रीका में ताइवान का इकलौता आधिकारिक सहयोगी देश है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरे से पहले कई अफ्रीकी देशों ने अचानक ओवरफ्लाइट की अनुमति वापस ले ली थी। माना जा रहा है कि यह कदम China के दबाव में उठाया गया, जिससे राष्ट्रपति लाई की यात्रा योजना प्रभावित हुई।
राष्ट्रपति लाई ने कहा कि उनकी यात्रा “बाहरी दबाव” के कारण पहले रोकनी पड़ी, लेकिन बाद में गुप्त कूटनीतिक और सुरक्षा प्रयासों के जरिए इसे सफल बनाया गया।उन्होंने एस्वातिनी पहुंचकर कहा कि “2.3 करोड़ ताइवानी लोगों को दुनिया से जुड़ने का अधिकार है और कोई भी देश इसे रोक नहीं सकता।” उन्होंने इस दौरे को आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
इस यात्रा पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय ने इस दौरे को “छिपकर किया गया कदम” बताया और कड़ी आलोचना की। चीन का कहना है कि ताइवान उसका हिस्सा है और इस तरह के दौरे इस सच्चाई को नहीं बदल सकते। इसके जवाब में ताइवान की Mainland Affairs Council ने चीन के बयान को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे दौरे के लिए बीजिंग की अनुमति की जरूरत नहीं है।
गौरतलब है कि एस्वातिनी, जिसे पहले स्वाजीलैंड कहा जाता था, दुनिया के उन गिने-चुने 12 देशों में शामिल है जो ताइवान को आधिकारिक रूप से मान्यता देते हैं।यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ताइवान और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ताइवान अपनी वैश्विक पहचान और सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन इसे रोकने के लिए हर संभव दबाव बना रहा है।
