ड्रामेबाज ''नील द सील'' ने जीता दुनिया का दिल; कारों पर चढ़ा और सड़क पर सोया इंटरनेट स्टार
punjabkesari.in Sunday, Jul 19, 2026 - 05:30 PM (IST)
International Desk: ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया राज्य में रहने वाला 'नील' (Neil) नाम का एक विशाल दक्षिणी एलिफेंट सील (Southern Elephant Seal) अपनी अनोखी हरकतों के कारण पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। करीब एक टन वजनी यह समुद्री जीव कभी सड़क पर आराम करता दिखता है, कभी ट्रैफिक कोन से खेलता है और कभी खड़ी कारों पर चढ़ जाता है। उसकी यही शरारतें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और वह लाखों लोगों का चहेता बन गया।हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि नील की ये हरकतें सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि उसके प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा हैं। उसकी कहानी इंसानों और वन्यजीवों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का भी महत्वपूर्ण संदेश देती है।
2020 में हुआ जन्म, हर साल लौट आता है तस्मानिया
विशेषज्ञों के अनुसार नील का जन्म अक्टूबर 2020 में तस्मान प्रायद्वीप (Tasman Peninsula) में हुआ था। तब से वह लगभग हर साल तस्मानिया लौटता है। दक्षिणी एलिफेंट सील की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे अपने जन्मस्थल या प्रजनन स्थलों पर बार-बार लौटते हैं। पिछले कुछ वर्षों में नील को सेवन माइल बीच (Seven Mile Beach) के आसपास कई बार देखा गया, जहां वह बेफिक्र होकर सड़क पर लेट जाता है या आसपास की वस्तुओं के साथ खेलता नजर आता है।
आखिर कारों पर क्यों चढ़ता है नील?
डीकिन यूनिवर्सिटी के समुद्री जीव विशेषज्ञों के मुताबिक नील अभी युवा नर सील है और अपने स्वाभाविक विकास के दौर से गुजर रहा है। युवा नर एलिफेंट सील बड़े होने के दौरान अपनी ताकत आजमाते हैं, नई चीजों को परखते हैं और प्रभुत्व स्थापित करने का अभ्यास करते हैं। चूंकि आसपास दूसरी सील नहीं होती, इसलिए नील अपनी जिज्ञासा कारों, ट्रैफिक कोन और सड़क किनारे लगे खंभों पर दिखाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो व्यवहार इंसानों को मजाकिया लगता है, वह वास्तव में उसके प्राकृतिक विकास का सामान्य हिस्सा है।
समुद्र में महीनों रहने के बाद चाहिए लंबा आराम
दक्षिणी एलिफेंट सील साल का अधिकांश समय समुद्र में भोजन की तलाश में हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। जब वे तट पर लौटते हैं तो उन्हें कई दिनों तक आराम की जरूरत होती है। इसी दौरान उनके शरीर की त्वचा और बाल भी पूरी तरह बदलते हैं, जिसे कैटास्ट्रॉफिक मोल्ट (Catastrophic Moult) कहा जाता है। यह प्रक्रिया काफी ऊर्जा लेती है, इसलिए उन्हें बिना किसी बाधा के आराम करना जरूरी होता है। वैज्ञानिक इस अवधि को "हॉल-आउट पीरियड" कहते हैं।
अधिकारियों ने बनाई विशेष सुरक्षा योजना
नील की बढ़ती लोकप्रियता के बाद बड़ी संख्या में लोग उसके साथ सेल्फी लेने और करीब जाने लगे थे। इसके बाद वन्यजीव विशेषज्ञों, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मिलकर उसके आसपास सुरक्षा घेरा बनाया और लोगों से कम से कम 20 मीटर की दूरी बनाए रखने की अपील की। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि जंगली समुद्री जीवों को छूने या परेशान करने से न केवल जानवर तनाव में आते हैं, बल्कि इंसानों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
फ्रेया वालरस की घटना से मिली सीख
विशेषज्ञों ने नॉर्वे की प्रसिद्ध वालरस 'फ्रेया' का भी उदाहरण दिया, जो नावों पर आराम करने के कारण सोशल मीडिया स्टार बन गई थी। लेकिन लगातार लोगों की भीड़ और सुरक्षा जोखिम बढ़ने के बाद अधिकारियों को अंततः फ्रेया को मारने का कठिन फैसला लेना पड़ा था। इसी वजह से ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी चाहते हैं कि नील के साथ ऐसी स्थिति कभी न बने और लोग जिम्मेदारी के साथ वन्यजीवों का सम्मान करें। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्री जीवों और इंसानों के बीच बढ़ती मुलाकातों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें समुद्री जीवों की बढ़ती आबादी, तटीय इलाकों में मानव गतिविधियां और जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते प्राकृतिक आवास प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
