होर्मुज में फ्रांस-ब्रिटेन की एंट्री: लाल सागर पहुंचा चार्ल्स डी गॉल और 2 युद्धपोत, शक्तिशाली फ्रांसीसी नौसैनिक बेड़ा भी एक्शन मोड में
punjabkesari.in Thursday, May 07, 2026 - 11:26 AM (IST)
International Desk: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने बड़ा सैन्य कदम उठाया है। फ्रांस ने अपने विमानवाहक पोत समूह को लाल सागर की ओर भेज दिया है ताकि जरूरत पड़ने पर होर्मुज क्षेत्र में तेज कार्रवाई की जा सके। फ्रांसीसी सेना के अनुसार, परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत ‘चार्ल्स डी गॉल’ अब दक्षिणी लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ एक इतालवी और एक डच युद्धपोत भी शामिल हैं। यह कदम फ्रांस और ब्रिटेन की उस संयुक्त योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही को सुरक्षित करना है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस सैन्य तैनाती की घोषणा मार्च में की थी।
France’s aircraft carrier heading to Middle East
— BhikuMhatre (@MumbaichaDon) May 6, 2026
Charles de Gaulle strike group passing through Suez Canal, on way to Red Sea.
In response to 'evolving international context' in Strait of Hormuz.
It looks lovely. pic.twitter.com/G7NTFGCN55
खास बात यह है कि यह घोषणा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से ठीक एक दिन पहले की गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी रास्ते से होता है। लेकिन मार्च की शुरुआत से ईरान ने इस मार्ग पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। फ्रांसीसी सेना के प्रवक्ता कर्नल गुइलौम वर्नेट ने कहा कि स्वेज नहर के दक्षिण में पहुंचने से फ्रांस की सेना होर्मुज के काफी करीब आ गई है। इससे जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह मिशन रक्षात्मक है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार चलाया जा रहा है। वर्नेट ने यह भी साफ किया कि फ्रांस का अभियान अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ से अलग है। अमेरिका ने हाल ही में होर्मुज में अपने एस्कॉर्ट मिशन की शुरुआत की थी, जिसका ईरान ने विरोध किया था।
France’s sole aircraft carrier, the Charles de Gaulle strike group, is heading to the Strait of Hormuz — after passing through the Suez Canal into the Red Sea today.
— Vitamvivere (@Vitamvivere) May 6, 2026
The deployment supports a potential UK-French mission to secure shipping lanes amid the closed strait and… pic.twitter.com/IXweMX9Gc7
फ्रांस और ब्रिटेन इस मिशन के लिए 50 से ज्यादा देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अप्रैल में पेरिस में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया था, जबकि ब्रिटेन में सैन्य योजनाकारों की बैठक में अभियान की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि योजना अब पूरी तरह तैयार है। फ्रांस ने इस बड़े सैन्य अभियान के तहत चार्ल्स डी गॉल के अलावा आठ फ्रिगेट और दो मिस्ट्रल श्रेणी के उभयचर हमलावर पोत भी तैनात किए हैं। चार्ल्स डी गॉल पर राफेल लड़ाकू विमान तैनात हैं, जो लंबी दूरी तक कार्रवाई करने में सक्षम हैं। इस बीच अमेरिका पहले ही ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर चुका है। ऐसे में फ्रांस और ब्रिटेन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है।
