दक्षिण चीन सागर में फिर बढ़ा तनाव, चीन-फिलीपींस के बीच टकराव तेज
punjabkesari.in Saturday, Sep 26, 2026 - 01:27 PM (IST)
इंग्लैंड: एशिया के सबसे विवादित समुद्री इलाकों में शामिल दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। कुछ समय तक अपेक्षाकृत शांत रहने के बाद जुलाई से चीन और फिलीपींस के बीच समुद्र में टकराव की घटनाएं बढ़ी हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों के जहाज और सुरक्षाकर्मी कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। सबसे गंभीर घटना 20 जुलाई को सेकंड थॉमस शोल के पास हुई थी। यहां चीनी तटरक्षक बल के जवानों और फिलीपींस के मरीन के बीच लाठी और चप्पुओं से झड़प हुई। इस दौरान फिलीपींस के एक मरीन के सिर पर गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद 18 सितंबर को सबीना शोल के पास चीनी और फिलीपींस के जहाज आपस में टकरा गए।
सेकंड थॉमस शोल पर क्यों बढ़ा विवाद?
सेकंड थॉमस शोल को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद है। जुलाई 2024 के बाद यहां कुछ समय के लिए तनाव कम हुआ था। दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक व्यवस्था के तहत फिलीपींस को अपने सैनिकों के लिए जरूरी सामान पहुंचाने और सैनिकों की आवाजाही के 13 मिशन पूरे करने की अनुमति मिली थी। हालांकि, इस व्यवस्था में कथित तौर पर यह शर्त थी कि फिलीपींस वहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य नहीं करेगा। सेकंड थॉमस शोल पर फिलीपींस का एक पुराना युद्धपोत BRP Sierra Madre मौजूद है। यह द्वितीय विश्व युद्ध के समय का जहाज है और लंबे समय से समुद्र में खड़ा होने के कारण काफी जर्जर हो चुका है। 20 जुलाई की घटना के बारे में सामने आए वीडियो के अनुसार, फिलीपींस के मरीन ने एक चीनी तटरक्षक जहाज का सामना किया था, जो Sierra Madre के पास पहुंचा था। चीन के मनीला स्थित राजदूत ने कहा था कि चीनी जहाज वहां जहाज पर हो रहे किसी तरह के निर्माण कार्य की निगरानी के लिए पहुंचा था। चीन के विदेश मंत्रालय ने 21 जुलाई को कहा था कि वह मानवीय आधार पर जरूरी सामान पहुंचाने वाले मिशनों की अनुमति देगा, लेकिन इसके लिए फिलीपींस को पहले सूचना देनी होगी। चीन ने साथ ही कहा कि वह किसी भी तरह की स्थायी सुविधा या स्थायी चौकी बनाने की कोशिश को रोकने के लिए कदम उठाएगा।
जर्जर हो रहा है फिलीपींस का जहाज
फिलीपींस के लिए इस जहाज की मरम्मत और मजबूती का सवाल काफी महत्वपूर्ण है। समुद्री वातावरण में लंबे समय से खड़ा होने के कारण BRP Sierra Madre लगातार कमजोर हो रहा है। अगर इसकी मरम्मत या मजबूती का काम नहीं किया गया तो फिलीपींस के लिए इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। फिलीपींस का दावा है कि सेकंड थॉमस शोल उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी Exclusive Economic Zone (EEZ) में आता है। यह क्षेत्र समुद्र के कानून से जुड़े संयुक्त राष्ट्र समझौते UNCLOS के तहत आता है।
2016 के फैसले को चीन नहीं मानता
दक्षिण चीन सागर में मौजूदा तनाव ऐसे समय बढ़ा है जब 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता फैसले को करीब 10 साल हो चुके हैं। इस फैसले में चीन की तथाकथित 'नाइन-डैश लाइन' के आधार पर समुद्री क्षेत्रों पर किए गए व्यापक दावों को कानूनी आधार नहीं माना गया था। हालांकि, चीन ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया है और लगातार अपने दावों पर कायम रहा है।
स्कारबोरो शोल पर चीन की मौजूदगी बढ़ी
दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियां केवल सेकंड थॉमस शोल तक सीमित नहीं हैं। स्कारबोरो शोल के आसपास भी चीन ने अपनी समुद्री मौजूदगी और नियंत्रण बढ़ाया है। 2025 में चीन ने स्कारबोरो शोल के बड़े हिस्से को शामिल करते हुए 'हुआंगयान दाओ नेशनल नेचर रिजर्व' बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद चीन ने इस क्षेत्र में प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के कदम उठाए हैं। 1 अगस्त को चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय, राष्ट्रीय वानिकी एवं घासभूमि प्रशासन, चीन के तटरक्षक बल और हैनान प्रांतीय सरकार ने रिजर्व के लिए प्रबंधन नियम जारी किए। इन नियमों के तहत नियमित गश्त, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तथा बिना अनुमति मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों पर रोक का प्रावधान किया गया है। इन नियमों का असर फिलीपींस के मछुआरों की आवाजाही पर भी पड़ता है, क्योंकि उन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर रिजर्व क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
2026 में भी बढ़ रही गश्त
एशिया मैरिटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में स्कारबोरो शोल के आसपास चीन के तटरक्षक बल की गश्त पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2026 में भी चीनी गश्त की संख्या फिर दोगुनी होने की दिशा में बढ़ रही है। अप्रैल में चीन ने शोल के प्रवेश मार्ग पर एक तैरता हुआ अवरोधक भी फिर से लगा दिया था। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियां केवल इन इलाकों तक सीमित नहीं हैं। पैरासेल द्वीप समूह के एंटीलोप रीफ समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी चीन की भौतिक मौजूदगी बढ़ाने और नए निर्माण कार्य करने की गतिविधियां सामने आई हैं। इससे आने वाले समय में दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री विवाद और टकराव का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
