ईरान जंग में बदल सकता पूरा गेम, अमेरिका ने खुद चीन को थमा दी अपनी बर्बादी की चाबी !

punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 03:23 PM (IST)

International Desk:  मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध के बीच एक नया भू-राजनीतिक खतरा उभर रहा है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका जहां सैन्य ताकत दिखाने में लगा है, वहीं इस संघर्ष का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा चीन को मिलता दिखाई दे रहा है। अंतरिक्ष में मौजूद चीनी जासूसी सैटेलाइट्स कथित तौर पर अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की हर छोटी-बड़ी जानकारी रिकॉर्ड कर रहे हैं, जो भविष्य में अमेरिका के खिलाफ ही हथियार बन सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक चीन अपने हाई-टेक सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशनों को करीब से देख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह डेटा आने वाले समय में अमेरिका-चीन टकराव का खेल पूरी तरह बदल सकता है। 

 

रिपोर्टों के अनुसार China अपने जासूसी सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीन को भविष्य में अमेरिका की सैन्य रणनीति समझने में बड़ी बढ़त मिल सकती है। चीन के कई लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क कथित रूप से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और जहाजों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे हैं।  इनमें सबसे चर्चित नेटवर्क Jilin-1 है, जो 4K अल्ट्रा-एचडी वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम माना जाता है।

 

रिपोर्टों के अनुसार, इन सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिकी जहाजों की तैनाती, एयरबेस की गतिविधियां, सैन्य विमानों के मॉडल और संख्या, रिफ्यूलिंग समय और ऑपरेशन पैटर्न जैसी जानकारी जुटाई जा रही है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन अमेरिकी एयर-डिफेंस सिस्टम की प्रतिक्रिया क्षमता को भी समझने की कोशिश कर रहा है। मिसाइल लॉन्च होने पर रडार की प्रतिक्रिया इंटरसेप्टर मिसाइल का मार्ग, दोबारा प्रोग्रामिंग का समय जैसे कई तकनीकी पहलुओं को रिकॉर्ड किया जा रहा है।रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डेटा से चीन को भविष्य में United States के खिलाफ संभावित सैन्य टकराव में योजना बनाने में मदद मिल सकती है। क्योंकि वास्तविक युद्ध के दौरान जुटाई गई जानकारी किसी भी सैन्य शक्ति के लिए सबसे मूल्यवान मानी जाती है। 

 

रिपोर्टों के अनुसार चीन कम से कम तीन बड़े सैटेलाइट नेटवर्क चला रहा है, जिनमें 300 से अधिक निगरानी सैटेलाइट शामिल बताए जाते हैं। इनका उपयोग पृथ्वी की सतह पर सैन्य गतिविधियों, जहाजों और मिसाइल परीक्षणों की निगरानी के लिए किया जाता है।विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चीन इस तरह के डेटा का बड़े पैमाने पर विश्लेषण कर लेता है, तो इससे भविष्य में अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। हालांकि अभी तक इस बारे में आधिकारिक पुष्टि सीमित है और कई विश्लेषक इन दावों की स्वतंत्र जांच की जरूरत भी बता रहे हैं।


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Content Writer

Tanuja

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