भारत की चेतावनी के बाद भी अड़ा चीन, शक्सगाम घाटी को बताया अपना इलाका
punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 06:41 PM (IST)
International Desk: भारत की कड़ी आपत्ति के बावजूद चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावे को एक बार फिर दोहराया। चीन ने कहा कि इस क्षेत्र में उसकी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं “पूरी तरह उचित” हैं और वह अपने ही इलाके में विकास कार्य कर रहा है। भारत ने पिछले शुक्रवार को शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की आलोचना करते हुए साफ कहा था कि यह भारतीय क्षेत्र है और भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने वर्ष 1963 में अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र में से शक्सगाम घाटी का लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर हिस्सा चीन को सौंप दिया था।
"Shaksgam Valley is Indian territory.
— News Arena India (@NewsArenaIndia) January 9, 2026
We have never recognised so called China Pakistan boundary agreement of 1963.
We also do not recognise so-called China-Pakistan economic corridor which passes through Indian territory."
- MEA spokesperson Randhir Jaiswal pic.twitter.com/fHJ2dgNRG3
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है। हमने 1963 में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी है। यह समझौता अवैध और अमान्य है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी मान्यता नहीं देता, क्योंकि यह उस भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है जिस पर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है। भारत की इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जिस क्षेत्र का आप उल्लेख कर रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है। अपने ही क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियां बिल्कुल उचित हैं।”
माओ निंग ने दावा किया कि चीन और पाकिस्तान के बीच 1960 के दशक में सीमा समझौता हुआ था और यह दोनों संप्रभु देशों का अधिकार है। CPEC पर भारत की आलोचना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिक और सामाजिक विकास करना तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख को दोहराते हुए माओ ने कहा कि CPEC और अन्य समझौतों से इस पर चीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। चीन का आधिकारिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर विवाद को संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। इस पर भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और यह बात चीन व पाकिस्तान को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है।
