डार्विन पोर्ट को लेकर चीन-ऑस्ट्रेलिया में नया टकराव, खुली धमकियों पर उतरा ड्रैगन
punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 02:44 PM (IST)
International Desk: ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक रूप से अहम डार्विन पोर्ट को लेकर चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच नया टकराव और गहरा हो गया है। चीन ने ऑस्ट्रेलिया की उस योजना पर कड़ा ऐतराज़ जताया है, जिसमें वह इस बंदरगाह का नियंत्रण एक चीनी कंपनी से वापस लेने पर विचार कर रहा है। डार्विन पोर्ट ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित है और इसे वर्ष 2015 में 99 साल की लीज़ पर चीनी अरबपति ये चेंग की कंपनी लैंडब्रिज ग्रुप को सौंपा गया था। उस समय इसका उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार को बढ़ावा देना बताया गया था।
हालांकि, अब ऑस्ट्रेलिया में यह सौदा लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। कारण है राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताएं। यह पोर्ट न केवल एशिया के करीब है, बल्कि मित्र देशों की सैन्य लॉजिस्टिक गतिविधियों में भी अहम भूमिका निभाता है। चीन के ऑस्ट्रेलिया में राजदूत शियाओ कियान ने मीडिया से बातचीत में ऑस्ट्रेलिया की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब घाटा हो रहा था, तब विदेशी कंपनी को लीज़ दी गई, और अब जब मुनाफ़ा हो रहा है तो वापस लेना चाहते हैं यह व्यापार करने का तरीका नहीं है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऑस्ट्रेलिया ने लीज़ की शर्तों में ज़बरदस्ती बदलाव किया, तो चीन अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएगा। हालांकि, इन कदमों की प्रकृति स्पष्ट नहीं की गई।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने दो टूक कहा है कि डार्विन पोर्ट को वापस ऑस्ट्रेलियाई नियंत्रण में लाना “राष्ट्रीय हित” में है। ईस्ट तिमोर यात्रा के दौरान उन्होंने दोहराया कि सरकार इस दिशा में प्रतिबद्ध है। बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा है कि लैंडब्रिज ने यह लीज़ पूरी तरह बाज़ार नियमों के तहत हासिल की थी और उसके वैध अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। चीन ने ऑस्ट्रेलिया से स्थिर और पारदर्शी निवेश माहौल बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि डार्विन पोर्ट विवाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रतीक है, जहां संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव को लेकर देशों के बीच खींचतान तेज़ होती जा रही है।
