ट्रंप की कनाडा पर टैरिफ चाल पड़ी भारी; PM कार्नी ने किया बैकफायर, बोले- 8 सितंबर से तोड़ेंगे सुपरपॉवर का घमंड
punjabkesari.in Sunday, Aug 23, 2026 - 11:52 AM (IST)
Washington: डोनाल्ड ट्रंप कनाडा पर 50 फीसदी टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं , लेकिन अब यही दांव अमेरिका पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उसका उसी तरह कड़ा जवाब देगा। यानी ट्रंप के टैरिफ वार ने अब एक नए व्यापार युद्ध का रास्ता खोल दिया है, जिसका असर अमेरिकी कंपनियों से लेकर ऊर्जा और सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला किया। कनाडा ने इसे एकतरफा दबाव के तौर पर लेते हुए जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मार्क कार्नी ने कहा है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब डॉलर-फॉर-डॉलर देगा। इन जवाबी शुल्कों की पूरी जानकारी आने वाले दिनों में सामने आएगी और प्रस्तावित उपाय 8 सितंबर से लागू होने हैं।
अमेरिका को लग सकता बड़ा झटका
कनाडा सिर्फ अमेरिका का पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं गहराई से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। कनाडा से अमेरिका को ऊर्जा, कच्चा माल और कई औद्योगिक उत्पादों की बड़ी आपूर्ति होती है। इसलिए अगर जवाबी टैरिफ और दूसरी व्यापारिक पाबंदियां बढ़ती हैं तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों की लागत और उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा के बीच ऊर्जा कारोबार इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। कनाडा अमेरिका को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और बिजली उपलब्ध कराता है। ऐसे में ऊर्जा क्षेत्र पर कोई बड़ा व्यापारिक व्यवधान अमेरिका के कुछ राज्यों और उद्योगों के लिए लागत बढ़ा सकता है। यही वजह है कि कनाडा का जवाबी टैरिफ सिर्फ अमेरिकी सामान की कीमत बढ़ाने तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसका असर दोनों देशों की आपस में जुड़ी हुई सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
कनाडा अमेरिका का एक बड़ा निर्यात बाजार है। अगर कनाडा अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क बढ़ाता है तो वहां अमेरिकी उत्पाद महंगे हो जाएंगे। इससे अमेरिकी कंपनियों की बिक्री घट सकती है और कनाडाई बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। स्टील, कृषि मशीनरी, घरेलू उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेयरी और अन्य औद्योगिक उत्पादों से जुड़े कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिका और कनाडा की कई कंपनियां सीमा पार एक-दूसरे पर निर्भर हैं। किसी एक देश में टैरिफ बढ़ने से उत्पादन की लागत बढ़ती है और कंपनियों के लिए कच्चे माल और तैयार सामान को सीमा पार भेजना महंगा हो जाता है। अगर टैरिफ युद्ध लंबा चलता है तो निवेश को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है और कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को दोबारा व्यवस्थित करने पर मजबूर हो सकती हैं।
ट्रंप और कार्नी में टकराव क्यों ?
दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी। एक समय ऐसा लग रहा था कि व्यापार विवाद को कम करने के लिए समझौता हो सकता है। कनाडा ने कुछ जवाबी टैरिफ हटाने की पेशकश भी की थी। लेकिन बातचीत के अंतिम चरण में दोनों पक्ष कुछ अहम मुद्दों पर सहमत नहीं हो सके। कार्नी के मुताबिक, अमेरिका की कुछ मांगों में कनाडा में बने वाहनों को मिलने वाली टैरिफ राहत सीमित करना, कनाडा की दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते करने की क्षमता पर शर्तें और भाषा-संस्कृति एवं संप्रभुता से जुड़े मुद्दे शामिल थे। कनाडा ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया। अमेरिका ने इस बार 1930 के टैरिफ कानून की Section 338 का इस्तेमाल किया है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर ऊंचा शुल्क लगाने की शक्ति देता है, जिन पर अमेरिकी व्यापार के साथ भेदभाव करने का आरोप हो। इस प्रावधान का इस तरह से व्यापक टैरिफ लगाने के लिए इस्तेमाल होना खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
