वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, अमर हो सकेंगे लोग!
punjabkesari.in Friday, Oct 02, 2015 - 03:15 PM (IST)
नई दिल्लीः विज्ञान के लिए कुछ भी असंभव नहीं है वह किसी भी चुनौती को सरलता से सुलझा लेती है लेकिन अमर होना विज्ञान के लिए भी कड़ी चुनौती है।
रूस के एक वैज्ञानिक का दावा है कि करीब 35 लाख साल पुराने बैक्टीरिया को शरीर में प्रविष्ट कराने के बाद से उन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं हुई और वह खुद को ज्यादा मजबूत अनुभव कर रहे हैं। मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के जियोक्रायोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अनातोली ब्रचकोव ने साइबेरिया के बर्फीले इलाकों से वर्ष 2009 में बैसिलस एफ बैक्टीरिया की खोज की थी।
यह बैक्टीरिया बर्फीली चट्टानों में लाखों सालों से जीवित है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने चूहों और मानव कोशिकाओं पर इस बैक्टीरिया के साथ प्रयोग किया। इसके प्रभाव से बूढ़े हो चुके चूहों में प्रजनन क्षमता भी वापस लाना संभव हो सका है। प्रयोग के दौरान ही ब्रचकोव ने अपने शरीर में इस बैक्टीरिया को प्रविष्ट कराया।
उन्होंने कहा, "ऐसा करने के बाद 2 साल से मुझे कोई फ्लू नहीं हुआ है। मैं ज्यादा काम करने लगा हूं और मजबूत अनुभव कर रहा हूं।" ब्रचकोव ने कहा, "यह बैक्टीरिया शरीर पर कैसे काम करता है, हमें यह नहीं पता है लेकिन हम इसका प्रभाव देख सकते हैं।" उन्होंने कहा कि अगर हम यह जानने में सक्षम हो सके कि आखिर यह बैक्टीरिया कैसे खुद को जीवित रखता है, तो निश्चित तौर पर इससे मनुष्यों की उम्र को बढ़ाना संभव हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती पर कई ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जो अमर हैं। इन जीवों की कोशिकाएं हर परिस्थिति में खुद को बचाने में सक्षम होती हैं।
मिले हैं और भी बैक्टीरिया
इन बर्फीले इलाकों से कुछ और बैक्टीरिया भी मिले हैं, जिनमें आश्चर्यजनक गुण हैं। इनमें से एक बैक्टीरिया पैट्रोलियम अणुओं को तोड़कर पानी में तब्दील करने में सक्षम है। वहीं दूसरा बैक्टीरिया सेलुलोज अणुओं को विघटित कर सकता है।
