यूटी चंडीगढ़ प्रशासन ने 2 HCS  अधिकारियों  को हरियाणा में वापिस  भेजा

punjabkesari.in Friday, Feb 11, 2022 - 07:24 PM (IST)

चंडीगढ़ (अर्चना सेठी): बीती शाम 10 फरवरी को  यूटी चंडीगढ़ प्रशासन के कार्मिक विभाग द्वारा जारी  एक आदेश से  हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस ) के दो अधिकारियों - राजीव प्रसाद और डॉ. इंद्रजीत को तत्काल प्रभाव से हरियाणा में वापिस भेज दिया गया है।

 

रोचक बात यह है कि  इंद्रजीत को एक  अन्य महिला एचसीएस अधिकारी शालिनी चेतल  के साथ यूटी चंडीगढ़ में डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति ) पर भेजे जाने सम्बन्धी आदेश  इसी सोमवार 7 फरवरी को ही हरियाणा सरकार द्वारा जारी किया गया था।

 

इससे पूर्व इंद्रजीत को गत 31 दिसंबर को  ही अम्बाला कैंट के   एसडीएम ( उप मंडल अधिकारी- नागरिक ) पद पर  तैनात किया गया था। इंद्रजीत के साथ हरियाणा वापिस भेजे गए दूसरे एचसीएस अधिकारी राजीव प्रसाद हैं जो  नवंबर, 2021 से चंडीगढ़ प्रशासन में तैनात थे। उपरोक्त दोनों वर्ष 2016 बैच के एचसीएस अधिकारी है. शालिनी हालांकि 2011 बैच की एचसीएस हैं।

 

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने 8 फरवरी को  ही चंडीगढ़ के प्रशासक, उनके एडवाइजर ( सलाहकार ), यूटी चंडीगढ़  के गृह सचिव आदि को ईमेल भेजकर हरियाणा सरकार द्वारा गत 7 फरवरी को   इंद्रजीत को यूटी चंडीगढ़ में डेपुटेशन भेजने पर ऐतराज़ जताया था क्योंकि अढ़ाई महीने पूर्व 27 नवंबर 2021 को  ही हरियाणा सरकार द्वारा उन्हें एवं उनके बैच के तीन दर्जन अन्य एचसीएस अधिकारियों को एचसीएस सेवा से ही बाहर करने सम्बन्धी  कारण बताओ नोटिस जारी किया था जिसे हालांकि हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गयी जिसमें कोर्ट द्वारा यथास्थिति (स्टे ) बनाये रखने हेतु कहा गया। इस मामले की सुनवाई पहले गत माह  27 जनवरी को निर्धारित की गयी थी जिसे अब इस  माह 17 फरवरी 2022  तक टाल दिया गया।

 

बहरहाल,  इंदरजीत और उनके 2016 बैच के अन्य  एचसीएस अधिकारियों, जिसमे राजीव प्रसाद भी शामिल हैं,  के बारे में एक  जानकारी सांझा करते हुए हेमंत ने  बताया कि उक्त बैच के सभी अधिकारियों  का वर्ष 2004 में तत्कालीन चौटाला सरकार दौरान एचसीएस में चयन हुआ था हालांकि उन्हें  12 वर्षो बाद मई, 2016 में मौजूदा खट्टर सरकार एचसीएस में नियुक्त किया गया था।

 

31 दिसंबर 2004 को  हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी ) ने उस वर्ष ली गयी लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर  एचसीएस और अन्य सेवाओं में चयनित उम्मीदवारों  की नियुक्ति हेतु राज्य सरकार को सूची भेजी गयी थी, तो उस समय हरियाणा में विधानसभा चुनावो की घोषणा हो चुकी थी एवं आदर्श आचार संहिता लागू हो गयी थी जिस कारण उन सभी चयनित एचसीएस और अन्य सफल उम्मीदवारों   की सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं हो पायी।

 

मार्च, 2005 में हरियाणा विधानसभा चुनावो में चौटाला की पार्टी इनेलो की पराजय हुई एवं कांग्रेस पार्टी की शानदार जीत हुई जिसके बाद भूपेंद्र हुड्डा प्रदेश के मुख्यमंत्री बने परन्तु वह  पिछली चौटाला सरकार दौरान एचपीएससी द्वारा चयनित एचसीएस उम्मीदवारों  को नियुक्त नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने एचसीएस का कैडर संख्या को ही  300 से घटाकर 230 कर दिया था।इसके बाद  चौटाला सरकार दौरान चयनित एचसीएस और अन्य उमीदवार पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट  गये परन्तु उन्हें कोई राहत नहीं मिली।


इसी बीच हुड्डा सरकार ने वर्ष 2004 में एचपीएससी द्वारा की गयी एचसीएस चयन भर्ती की  जांच विजिलेंस ब्यूरो को दे दी क्योंकि उस भर्ती  पर भाई- भतीजावाद और भ्रष्टाचार आदि के आरोप लगाये गये थे। बहरहाल, मामला साथ साथ अदालतों में भी चलता रहा।

 

हरियाणा  में भाजपा सरकार बनने के बाद जब एक बार मामला  फिर विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा गया तो यह निष्कर्ष निकला कि वर्ष 2004 की एचसीएस परीक्षा  में चयनित सभी उम्मीदवार दागी नहीं है और 38 ऐसे हैं, जिन्हे नियुक्ति दी जा सकती है।


हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद मई, 2016 में करीब दो दर्जन एचसीएस अधिकारियों को एचसीएस में नियुक्त कर दिया गया।इसी बीच 2004 चयन  में शामिल जिन उम्मीदवारों को दागी मानकर नियुक्ति नहीं दी गयी, उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

 

इसी बीच अक्टूबर, 2021 में हाईकोर्ट के अन्य आदेश के बाद गत 27 नवंबर को हरियाणा सरकार द्वारा मई, 2016 में नियुक्त सभी डेढ़ दर्जन एचसीएस अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने  हेतु  कारण बताओ नोटिस जारी किया  गया क्योंकि सरकार ने ताज़ा निर्णय लिया कि  2004 एचसीएस परीक्षा  में दागी और बेदागी  उम्मीदवारों को अलग नहीं किया जा सकता है।

 

इसी बीच 2016  बैच के एक एचसीएस अनिल नागर  को 7 दिसंबर 2021  को   एचपीएससी  में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर रहते कथित भ्रष्टाचार में संलिप्त होने  कारण एचसीएस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।


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News Editor

Archna Sethi

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