हरियाणा में सेवानिवृत शिक्षकों को किया जाएगा पुर्ननियुक्त

10/26/2021 7:32:22 PM

चंडीगढ़, (अर्चना सेठी)-हरियाणा के सरकारी मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में रिक्त शिक्षकों के पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी होने तक स्कूलों से हाल ही में सेवानिवृत हुए शिक्षकों की पुर्ननियुक्ति की जाएगी। शिक्षकों की पुर्ननियुक्ति का कार्यकाल एक साल के लिए होगा। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर का कहना है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों का शिक्षकों के रिक्त पदों की वजह से शिक्षा विभाग नुकसान नहीं होने देगा। जब तक सरकार नियमित शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया को पूरा नहीं करती तब तक उन सेवानिवृत शिक्षकों को स्कूल में पढ़ाने का काम सौंपा जाएगा जो हाल ही में सेवानिवृत हुए हैं। हरियाणा के स्कूलों में शिक्षक 58 साल की उम्र में सेवानिवृत होते हैं और अब पुर्ननियुक्ति के बाद शिक्षक 59 वर्ष का पूरा होने तक स्कूलों में पढऩे का काम कर सकेंगे। गुर्जर का कहना है कि हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया 30 जुलाई 2021 से शुरु कर दी गई थी। 

 


मॉडल संस्कृति स्कूलों में बढ़ रही है बच्चों की संख्या 
ध्यान रहे प्रदेश सरकार ने साल भर पहले गरीब परिवार के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य के साथ मॉडल संस्कृति स्कूलों की शुरुआत की थी। प्रदेश में 137 के करीब मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल शुरु किए जा चुके हैं। जबकि 1418 मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल खुल चुके हैं। इन सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत और प्राइमरी मॉडल संस्कृति स्कूलों में बच्चों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। शिक्षा विभाग द्बारा स्कूलों में 1170 पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। 

 


मॉडल संस्कृति स्कूलों को सी.बी.एस.ई दे रहा है प्रशिक्षण
शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर का कहना है कि मॉडल संस्कृति स्कूल आने वाले समय में हरियाणा की शान बनेंगे क्योंकि इन स्कूलों के शिक्षक व प्रिंसिपल को सी.बी.एस.ई द्बारा नियमित तौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रिंसिपल को प्रशिक्षण में बताया जा रहा है कि वह किस तरह से स्कूल के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। बच्चों को किस तरह से गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सके। प्रदेश शिक्षा के स्तर को किस तरह से ऊंचाई की बुलंदियों पर पहुंचाया जाए और नेशनल एजूकेशन पोलिसी 2020 बच्चों की शिक्षा को लेकर किन नियमों के पालन को कहती है, इन मुद्दों पर प्रिंसिपल प्रशिक्षित किए जा रहे हैं।    

 

शिक्षक मान रहे हैं स्कूलों में काम का दबाव
दूसरी, तरफ प्रदेश के मॉडल संस्कृति स्कूलों में कार्यरत प्रिंसिपल का कहना है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों में नियुक्ति से शिक्षक कतरा रहे हैं क्योंकि शिक्षकों को लगता है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों पर काम का दबाव उन पर अधिक रहेगा। स्कूलों के सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेंकेंडरी एजूकेशन (सी.बी.एस.ई) से संबंद्धित होने की वजह से शिक्षक सी.बी.एस.ई के नियमों को भी सख्त मानते हैं। हाल ही में प्रदेश के मॉडल संस्कृति स्कूलों के प्रिंसिपल को सी.बी.एस.ई द्बारा तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रिंसिपल को टिप्स दिए जा रहे हैं कि वह कैसे स्कूल के बच्चों को परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करें। ऐसे में शिक्षक मॉडल स्कूलों में काम का अतिरिक्त दबाव मान रहे हैं और अगर रिक्त पद अभी भर भी जाएंगे तो जब शिक्षकों की ट्रांसफर शुरु की जाएगी तो ज्यादातर शिक्षक अपनों घरों के नजदीक ही स्टेशन देखेंगे और भरे गए शिक्षक पद फिर से रिक्त हो जाएंगे। 
 


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News Editor

Archna Sethi

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