जो राष्ट्र अपने क्रांतिकारियों को भूल जाते हैं, उसके लिए वह ठीक नहीं

punjabkesari.in Friday, May 20, 2022 - 06:08 PM (IST)

चंडीगढ़, (अर्चना सेठी ) हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि ‘हमें अपने इतिहास को जानना जरूरी है और जो राष्ट्र अपने क्रांतिकारियों को भूल जाता है, उस राष्ट्र के लिए वो ठीक नहीं’। विज अम्बाला छावनी के एसडी कालेज में कालेज के इतिहास विभाग के पूर्व एचओडी एवं इतिहासकार डॉक्टर यूवी सिंह द्वारा अम्बाला के इतिहास पर लिखी पुस्तक ‘अम्बाला एंड फ्रीडम स्ट्रगल ऑफ इंडिया’ के विमोचन के उपरांत लोगों को संबोधित कर रहे थे। 

 

 

उन्होंने कहा आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देने वाले अनसंग हीरोज की याद में अम्बाला छावनी में ही 22 एकड़ में शहीद स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। इसलिए इतिहासकार उन सब क्रांतिकारियों के बारे जानकारियों को ढूंढ रहे हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपनी भूमिका अदा की। इससे पहले, गृह मंत्री अनिल विज ने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में पहुंचने पर कालेज प्रिंसिपल डा. राजेंद्र सिंह, डा. केसी यादव, प्रो. नवीन गुलाटी, डा. देशबंधु एवं अन्य ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर  भाजपा मंडल प्रधान राजीव गुप्ता डिम्पल, बलकेश वत्स, संजीव वालिया, विपिन खन्ना एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

 

 

गृह मंत्री ने पुस्तक का विमोचन करते समय डा. यूवी सिंह को बधाई देते हुए कहा कि हर आदमी जानना चाहता है कि आजादी के आंदोलन में अम्बाला की भूमिका क्या थी। जब भी अम्बाला का नाम आता है वहां स्वाभाविक रूप से महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सन् 1857 में आजादी के आंदोलन में क्या हुआ हर आदमी उसके बारे में जानना चाहता है। विज ने कहा कि ‘मैं भी काफी लंबे समय से सरकार के समक्ष यह आवाज उठा रहा हूं कि आजादी की पहली लड़ाई अम्बाला छावनी से शुरू हुई थी, परंतु उन अनसंग हीरोज की याद में कभी कोई गीत गाए नहीं गए, उनकी याद में कोई स्मारक बनाया जाना चाहिए, सन् 2000 से लगातार मैं विभिन्न सरकारों के सामने यह आवाज उठाता आ रहा हूं’। अब उन शहीदों की याद में अम्बाला छावनी में शहीद स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। 

 

 

अनिल विज ने कहा कि जैसाकि इतिहासकार डा. यूवी सिंह ने बताया और पुस्तक में इसका विवरण भी है कि 1857 में जंग-ए-आजादी मेरठ से पहले अम्बाला से शुरू हुई थी। क्रांतिकारियों ने जंग-ए-आजादी अंग्रेज अधिकारियों के घरों को आग लगाकर शुरू कर दी थी, यह अचानक शुरू नहीं हुई, यह संगठित अभियान था अंग्रेजों का विरोध जताने का। उन्होंने कहा कि देश में कई स्थानों पर उस समय  विरोध हुआ, मगर सारे देश में एक साथ-एक सामान विरोध वह 10 मई 1857 से हुआ। जैसा बताया जा रहा है कि कमल का फूल और रोटी को पैगाम के तौर पर इस्तेमाल तब किया गया था और पुस्तकों में ऐसा भी पढ़ने को मिलता है कि मुख्य योजना अम्बाला छावनी से ही बनाई गई थी। 

उन्होंने कहा कि 10 मई को रविवार था और रविवार सभी अंग्रेज चर्च में प्रार्थना करने जाते थे। योजना बनी थी कि जब सारे प्रार्थना कर रहे होंगे तो उनको कैद एवं खत्म करके आगे बढ़ते जाएंगे और सारे देश को आजाद किया जाएगा। मगर, कुछ कारणों से आजादी का आंदोलन कामयाब नहीं हो सका। गृह मंत्री ने कहा कि उस समय किस-किस को दंड दिए गए और यातनाएं दी गई, किन लोगों को गोलियां मारी गई, फांसी दी गई उन पर रिसर्च की जा रही है। इन सभी चीजों को दिखाने के लिए 22 एकड़ में आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक बनाया जा रहा है। तीन चरणों में शहीद स्मारक बनेगा जिसमें पहले चरण में अम्बाला, दूसरे चरण में हरियाणा और तीसरे चरण में देश में क्या हुआ यह दिखाया जाएगा। 

 

 

गृह मंत्री ने कहा कि हमारा दुर्भाग्य है कि हमें आजादी के बाद यही पढ़ाया गया कि आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, मगर कांग्रेस का जन्म 1885 में एक अंग्रेज एओ हयूम ने किया था। कांग्रेस के जन्म से 28 वर्ष पहले पहले सन् 1857 में ही आजादी की पहली लड़ाई शुरू हो गई थी। यानि हिंदुस्तानियों में आजाद होने का जज्बा पहले से ही था। आजादी की लड़ाई के अनसंग हीरोज को याद करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शहीद स्मारक में इतिहास दिखाने के लिए हिंदुस्तान के 5 बड़े इतिहासकारों की टीम बनाई गई है जिसमें डा. यूवी सिंह भी शामिल है। 

 

 

 

इतिहासकार एवं पुस्तक ‘अम्बाला एंड फ्रीडम स्ट्रगल ऑफ इंडिया’ के लेखक डा. यूवी सिंह ने बताया कि 188 पन्नों की इस पुस्तक में पुराने अम्बाला के इतिहास को प्रदर्शित किया गया है। वह अम्बाला जिसकी सीमाएं रोपड़ से जगाधरी तक होती थी। अंग्रेज किन परिस्थितियों में अम्बाला छावनी में बसे, अम्बाला छावनी को उन्होंने कैसे सुनियोजित तरीके से बसाया एवं अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियों इसमें प्रदर्शित की गई हैं।


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News Editor

Archna Sethi

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