प्रदेश सरकार ने पारदर्शिता, मैरिट और बिना पर्ची बिना खर्ची जुमलों का उड़ाया मजाक : रणदीप सुर्जेवाला

punjabkesari.in Tuesday, Nov 30, 2021 - 06:27 AM (IST)

चंडीगढ़, (अर्चना सेठी) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां जारी ब्यान में कहा है कि खट्टर सरकार की ‘‘अटैची दो - नौकरी लो’’ योजना के तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं। खट्टर सरकार ने ‘राज’ खुलने से पहले ही चलाई - ‘‘घोटाले दबाओ, घोटालेबाज बचाओ’’ योजना को शुरु कर दिया है। उनका कहना है कि कितने ही घोटाले हों या नौकरियां बिकें, मुख्यमंत्री के ‘तीन जुमले‘ कायम हैं - पारदर्शिता, मैरिट और ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची’। पिछले 7 सालों में 32 पेपर लीक हुए। भर्ती घोटाले उघड़े। लेकिन, 7 साल में कोई भी जाँच परिणाम तक नहीं पहुंच सकी, न ही किसी अपराधी की सज़ा हुई।


रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि प्रदेश सरकार हर नौकरी भर्ती घोटाले को इतनी सफाई से दबा देती है कि कमीशन के ‘चेयरमैन’, ‘मेम्बर्स’ और सरकार में बैठे ‘सफेदपोश’ साफ बच निकलते हैं। अदालतें फटकार लगाती रहती हैं लेकिन, सरकार की पुलिस जानबूझकर कोर्ट में सबूत ही पेश नहीं करती और आरोपी छूट जाते हैं। महाव्यापम घोटाले या ‘‘अटैची दो- नौकरी लो’’ कांड में भी खट्टर सरकार व उसके पुलिस विजिलैंस विभाग ने पूरा मामला रफा-दफा करने की तैयारी कर ली है। एक बार फिर एचपीएससी के चेयरमैन व मैंबर्स,एचएसएससी के चेयरमैन व मैंबर्स, सरकार में बैठे बड़े-बड़े सफेदपोश तथा रिश्वत देकर नौकरी लगने वाले सभी लोग जाँच के दायरे से ही बाहर रख साफ बचा दिए गए हैं। एक बार फिर हरियाणा के युवा ठगे जाएंगे।


सुरजेवाला ने कहा एप्लीकेशन पोर्टल-स्कैनिंग-पेपर चेकिंग करने वाली ‘हटाई गई कंपनी’ को एचपीएससी की भर्ती का ठेका क्यों व कैसे दिया? एफआईआर रिमांड एप्लीकेशंस में नामज़द आरोपियों की जाँच-गिरफ्तारी-कार्रवाई क्यों नहीं? उनका कहना है कि एचपीएससी के चेयरमैन के समय साल 2020 में जसबीर सिंह की कंपनी को ‘‘हटा दिया’’ गया था। मौजूदा एचपीएससी चेयरमैन, आलोक वर्मा के कार्यभार संभालने के बाद एचपीएससी की भर्तियों का काम एक बार फिर जसबीर सिंह की कंपनी को दे दिया गया।सवाल यह है कि एक ‘हटाई गई’ कंपनी को क्यों, किस कारण, किस हालात व किसके कहने से एचपीएससी की इतनी महत्वपूर्ण भर्तियों का काम दिया गया? इस बारे में एचपीएससी के चेयरमैन व सदस्यों से विजिलैंस द्वारा पूछताछ क्यों नहीं की गई?

सवाल यह भी है कि जब एफआईआर व विजिलैंस की रिमांड एप्लीकेशंस में साफ तौर से जसबीर सिंह भलारा, मालिक, मैसर्स सेफडॉट ई-सॉल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड व उसके कर्मचारी विजय भलारा का नाम आरोपी के तौर पर आया है, तो विजिलैंस विभाग ने उनकी जाँच, गिरफ्तारी व कार्यवाही क्यों नहीं की? क्या मुख्य आरोपी होने के बावजूद कृपादृष्टि इसलिए क्योंकि सत्ता में बैठे सफेदपोशों का आशीर्वाद इनके साथ है?  सुरजेवाला ने कहा क्या विजिलैंस विभाग अनिल नागर, अश्विनी शर्मा और नवीन की जाँच के नाम पर ढकोसला कर पूरा मामला रफा-दफा कर रहा है? विजिलैंस विभाग द्वारा अदालत में पेश किए गए कागजातों से साफ है, जिनके मुताबिक आरोपियों से उनके द्वारा स्वीकारे हुए तथाकथित साक्ष्यों की ‘‘जीरो रिकवरी’’ हुई है।

यही नहीं, विजिलैंस विभाग द्वारा 18 नवंबर से 23 नवंबर, यानि 6 दिनों में दी गई अलग-अलग दरख्वास्तों में एक ही आरोपी से साक्ष्यों की रिकवरी की जगह भी अलग-अलग बताई गई है। पर रिकवरी फिर भी नहीं हुई। तीनों आरोपियों - अनिल नागर, अश्विनी शर्मा व नवीन के विजलैंस रिमांड का समय पूरा हो गया। जवाब देंगे कि इन सबके बावजूद भी-अनिल नागर को उसके रोहतक के ठिकानों पर दस्तावेजों की बरामदगी हेतु क्यों नहीं ले जाया गया? अनिल नागर को दस्तावेजों की बरामदगी हेतु उसके मामा के घर रिठाल, रोहतक क्यों नहीं ले गए? नवीन को दस्तावेजों की बरामदगी हेतु भिवानी, सोलन, सोनीपत क्यों नहीं ले जाया गया? अश्विनी शर्मा को दस्तावेजों की बरामदगी हेतु भिवानी, नोएडा, यूपी के ठिकानों, व सोनीपत क्यों नहीं ले जाया गया?

एचसीएस प्रीलिमनरी व डेंटल सर्जन की भर्ती के उन उम्मीदवारों को शामिल तफ्तीश कर पूछताछ क्यों नहीं की गई, जिनके रोल नंबर व ओएमआर शीट्स अनिल नागर के एचपीएससी कार्यालय से मिले हैं? क्या कारण है कि विजिलैंस विभाग की एसआईटी ने अदालत को अनिल नागर, अश्विनी शर्मा व नवीन से हुई दस्तावेजों की बरामदगी बारे कोई भी तिथि या सबूत देने से इंकार कर दिया?, क्या कारण है कि विजिलैंस विभाग के एसआईटी प्रमुख ने अदालत में यह स्वीकार लिया कि उसे आरोपियों की जाँच और दस्तावेज बरामदगी बारे कोई जानकारी नहीं? ,क्या इसी वजह से अदालत ने मजबूरन विजिलैंस विभाग के रवैये के बारे में टिप्पणी की कि वह आरोपियों से दस्तावेजों की रिकवरी बारे गंभीर नहीं? ,

खट्टर सरकार व विजिलैंस विभाग ने आरोपियों का रिमांड खारिज होने के खिलाफ अपील क्यों नहीं की? उन्होंने कहा कि मनोहर लाल खट्टर ने प्रेसवार्ता में एक बार फिर सच नही कहा कि 48 लोग पकड़े गए हैं, जबकि सप्लीमेंटरी चार्जशीट आई ही नहीं और छोटी-छोटी मछलियों सहित केवल 9 अभियुक्त हैं। सवाल यह है कि क्या मौजूदा ‘अटैची कांड’ भी ‘कैश फॉर जॉब स्कैम’ की तरह एक जुमला बनकर रह जाएगा।


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News Editor

Archna Sethi

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