मलेरिया के मामलों में एक वर्ष में 93 प्रतिशत की कमी

2020-10-16T20:17:02.867

चंडीगढ़, (बंसल): हरियाणा स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार की गई योजना समय पर कार्रवाई और गहन शोध के परिणाम स्वरूप मलेरिया (वेक्टर जनित बीमारी) के मामलों में एक वर्ष में 93 प्रतिशत की कमी आई है और पिछले दो सालों में चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि विभाग ने कोविड-19 रोकथाम गतिविधियों के साथ-साथ मलेरिया, डेंगू जैसे वेक्टर-जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने बताया कि मलेरिया के मामलों में भारी गिरावट आई है और 15 अक्तूबर, 2020 तक कुल 104 मलेरिया मामलों की रिपोर्ट की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान लगभग 3 प्रतिशत की कमी आई है। जिलों में वेक्टर जनित रोगों की स्थिति का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि 6 जिलों नामत: अम्बाला, फतेहाबाद, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़ और पंचकूला में देशज (इंडीजीनियस) मलेरिया के मामलों की शून्य रिपोर्ट आई है, जबकि 5 जिलों नामत: भिवानी, हिसार, पानीपत, सोनीपत और यमुनानगर में केवल एक देशज (इंडीजीनियस) मलेरिया का मामला आया है।

 


स्वास्थ्य सेवाओं (वी.बी.डी.) की निदेशक डा. उषा गुप्ता ने बताया कि जिला नूंह पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र उच्च मलेरिया वाले स्थानों में आता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के पश्चात नूंह (मेवात) से लगभग 60 से 70 प्रतिशत मलेरिया के मामले सामने आए हैं, परंतु एम.पी.एच.डब्ल्यू. (एम) की नियमित नियुक्तियों से जिला नूंह में मलेरिया निगरानी मजबूत हुई।    
238 डेंगू के मामले सामने आए 
राजीव अरोड़ा ने बताया कि डेंगू की स्थिति भी नियंत्रण में है। इस वर्ष 15 अक्तूबर 2020 तक, पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान दर्ज 262 डेंगू मामलों की तुलना में कुल 238 डेंगू के मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू के कारण मृत्यु दर को रोकने के उद्देश्य से नई पहल यानी सरकारी अस्पतालों में डेंगू के रोगियों के लिए नि:शुल्क ङ्क्षसगल डोनर प्लेटलेट्स (एस.डी.पी.) का प्रावधान किया गया है, क्योंकि गंभीर थ्रोम्बिसोफेनिया वाले कुछ डेंगू रोगियों को तुरंत ठीक होने के लिए एस.डी.पी. की आवश्यकता होती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने राज्य के नागरिकों से मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए घरेलू स्तर की गतिविधियों को अपनाने की भी अपील की, जैसे कि हर रविवार को ड्राई-डे (सुखाने का दिन) के रूप में मनाया जाना चाहिए अर्थात पानी के कंटेनरों को खाली करना और कूलर, ओवरहेड टैंकों के साथ-साथ घर के अंदर अन्य संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों की जांच करना जैसे कि ड्रम, बेकार बर्तन, कप, बोतलें, टायर, फ्लावर पॉट्स, फ्रिज ट्रे इत्यादि। इसके अलावा, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, मच्छरदानी के नीचे सोएं, मच्छर भगाने वाले उपकरणों का उपयोग करें।
 


Edited By

Vikash thakur

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