मेरी बेटी भी कहती है कि ''पापा आप हमेशा ग्रे ही पहनते हैं'' - शाहिद कपूर
punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 01:05 PM (IST)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर की जोड़ी से दर्शकों को हमेशा कुछ हटकर सिनेमा की उम्मीद रहती है। उनकी आने वाली फिल्म ‘ओ रोमियो’ ने टीज़र और ट्रेलर रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ तृप्ति डिमरी और अविनाश तिवारी लीड रोल निभा रहे हैं, जबकि नाना पाटेकर, तमन्ना भाटिया, विक्रांत मैसी और दिशा पाटनी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। साजिद नाडियाडवाला के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म 13 फरवरी 2026 को रिलीज होगी। इसी के चलते शाहिद कपूर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार की संवाददाता संदेश औलख शर्मा से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश.
1 - 'ओ रोमियो' की स्क्रिप्ट सुनते वक्त मन में कोई सवाल आया हां बोल दी ?
हां , मन में एक डर था कि कही फिल्म पर इतने एक्सपेरिमेंट ना हो जाए कि फिल्म समझ ही ना आए लोगों को। मैं ये चाहता था की फिल्म हर इंसान तक पहुंचे सिर्फ क्रिटिक्स तक ही सीमित ना रह जाए। हालांकि जब कहानी पूरी सुनी तो पता लगा कि इसमें रोमांस , एक्शन थ्रिल सबकुछ है। ऐसा कुछ भी नहीं है कि लोग इससे जुड़ ना पाएं। उल्टा ये कहानी तो लोगों को अट्रेक्ट करने वाली है। ख़ास बात ये भी है कि इसमें विशाल भारद्वाज वाला टच भी है।
2 - तकरीबन एक साल में आप एक ही फिल्म करते है , क्या इसके पीछे कोई स्ट्रैटेजी है ?
इस साल तो दो फ़िल्में आ रही हैं लेकिन पहले ही बात करें तो स्ट्रैटेजी पर तो मैं काम ही नहीं करता , ये मेरा स्टाइल ही नहीं है। बाकी मुझे लगता है कि कुछ फ़िल्में समय मांगती हैं और कई बार हो सकता है कि मुझे ये सलेक्ट करने में टाइम लग जाता है कि मुझे कौनसा प्रोजेक्ट करना है।
3 - क्या वजह है कि आजकल आप ग्रे शेड्स की तरफ बढ़ते जा रहें हैं ? खासतौर पर विशाल की फिल्मों में ?
मेरी बेटी भी कहती है कि 'पापा आप हमेशा ग्रे ही पहनते हैं' , मैं ग्रे किरदार तब से कर रहा हूँ जब ये फैशन में ही नहीं थे , जो किरदार मुझे अच्छा लगता है वो करता हूँ और जितना कोई किरदार अच्छा लगता है उतना ही उसे निभाना ,मुश्किल होता है। और जब तक मैं कुछ मुश्किल नहीं करूँगा तब तक आप मेरा बेस्ट कैसे देख पाएंगे।
4 - किसी किरदार का प्रभाव आपके ऊपर रहता है या नहीं ?
रहता है लेकिन आपको उसे डिस्कनेक्ट करना ही पड़ता है, जरूरी होता है। मैं बहुत बार देखता हूँ कि लोग बोलते हैं कि 'मैं थेरेपिस्ट के पास गया था' तो ये सुनकर मुझे बहुत हंसी आती है। ऐसा नहीं होता प्रोफेशनल्स हैं हम। लोग इससे भी ज़्यादा मुश्किल काम करते हैं और वो कभी नहीं कहते है कि उन्हें थेरेपिस्ट के पास जाना पड़ रहा है। वैसे भी मुझे ऐसा लगता है कि आपको कभी भी घर पर कोई बैगेज लेकर नहीं जाना चाहिए।
5 - रिलीज के पास फिल्म की सक्सेस या फेलियर आपको इफ़ेक्ट करती है ? और अगर फिल्म ना चले तो ...
बिलकुल करती है। और अगर फिल्म ना चले तो एक स्टेप पीछे फिर दो स्टेप आगे बढ़ जाता हूँ। क्यूंकि जो आप फील करते हैं उसे आपको फील करने देना चाहिए। मायूसी को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए। उसको फ्यूल की तरह इस्तेमाल करो , फीलिंग्स फ्यूल ही होती हैं अगर आप उसे चैनेलाइज करके आगे बढ़ते है तो अच्छा ही होता है। सीखना भी बहुत जरूरी होता है और थोड़ा हुमिलिटी होना भी चाहिए ज़िंदगी में क्यूंकि अगर सबकुछ आराम से चलने लगा तो आदमी खुद को भगवान समझने लगेगा।
6 - 'ओ रोमियो' में आपके शरीर पर बहुत सारे टैटू बने हैं , उसके बारे में बताइये ...
इस फिल्म में मेरे फुल बॉडी टैटू थे , हर दिन इसे बनाने में 2 घंटे लगते थे , मैं शूटिंग के दौरान तृप्ति से भी ज़्यादा टाइम लेता था रेडी होने में क्यूंकि वो तो आधे घंटे में रेडी होकर आ जाती थी। बाकी ये किरदार ही इतना स्ट्रांग है कि इसके ऊपर बहुत कुछ करना पड़ा।
7 - तृप्ति डिमरी के साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा ?
बहुत अच्छा था। बहुत ही शानदार किरदार भी है उनका इस फिल्म में। दरअसल उन्ही के किरदार से फिल्म का प्लाट सेट होता है। इससे ज़्यादा मैं कुछ बता भी नहीं सकता। और वैसे भी जब किसी फिल्म में मेल और फीमेल दोनों ही किरदार स्ट्रांग हों तो वो एक बहुत ही पॉजिटिव साइन होता है किसी भी लव स्टोरी के लिए। और जब कास्टिंग डिसकस भी हो रही थी तब भी पहला नाम तृप्ति का ही था क्यूंकि वो इस फिल्म के लिए एकदम परफेक्ट है। और उन्होंने काम भी बहुत अच्छा किया है।
8 - क्या कोई भी फिल्म साइन करने से पहले आप अपनी वाइफ मीरा से डिस्कस करते हैं ?
हर फिल्म। हर फिल्म साइन करने से पहले हम बात करते है और हर बात आपस में डिस्कस करते हैं।
9 - इतने सालों कौन-कौन से बदलाव महसूस किये फिल्म इंडस्ट्री में ?
बहुत सारे बदलाव आ चुके है और आ भी रहे हैं। पहले तो लोग एक जगह बैठे हैं कुछ डिस्कस करने के लिए तो मुंह नहीं खुलता था अपना पॉइंट ऑफ़ व्यू रखने का लेकिन अब ऐसा नहीं है अब हर कोई अपनी बात रख सकता है।
