सनी सर वैसे ही हैं जैसे आज तक हमने परदे पर देखे हैं वही जज़्बा और वही जूनून - प्रणव वशिष्ट
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 02:03 PM (IST)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। 1997 की सुपरहिट वॉर फिल्म बॉर्डर के बाद अब बॉर्डर 2 को भी दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिल रहा है। फिल्म की कहानी की जमकर तारीफ हो रही है और इसके गाने हर जगह छाए हुए हैं। अनुराग सिंह के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, अहान शेट्टी और दिलजीत दोसांझ जैसे सितारे हैं। साथ ही सेकंड लीड में एक्टर प्रणव वशिष्ट भी नज़र आ रहे हैं, जो चमकीला में दिलजीत के साथ स्क्रीन शेयर कर चुके हैं। इसी के चलते प्रणव वशिष्ट ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार की संवाददाता संदेश औलख शर्मा से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सवाल- फिल्म रिलीज़ हो चुकी है तो कैसा मिल रहा रिस्पांस ?
जवाब- बहुत अच्छा रिस्पांस आ रहा है काफी मैसेज भी मिल रहा है , बहुत ग्रेटफुल हूँ अभी तो फिल्म बहुत अच्छा कर रही है आगे देखते है क्या होता है।
सवाल- बॉर्डर 2 का हिस्सा बनना आपके लिए कितना ख़ास रहा ?
जवाब- जब भी हम किसी वॉर के बारे में सोचते है और जिस फिल्म का नाम दिमाग के सबसे पहले आता है वो है बॉर्डर। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस बनूँगा प्रोजेक्ट का हिस्सा बनूँगा क्यूंकि ये ड्रीम कम ट्रू प्रोजेक्ट है किसी भी आर्टिस्ट के लिए क्यूंकि आप इतनी आइकोनिक फिल्म का हिस्सा बन रहे हैं। शुरुआत के दिनों में जब मैं शूट कर रहा था तो मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि क्या ये सच में हो रहा है। क्या मैं सनी देओल सर के सामने खड़ा होकर एक्ट कर रहा हूँ। काफी अलग और बहुत ही अच्छा एक्सपेरिंस था।
सवाल- स्टार कास्ट इस फिल्म भी बहुत शानदार है उनके साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा ?
जवाब- मेरा ज़्यादा सनी सर के साथ ही था काम क्यूंकि मैं सिख रेजिमेंट में सेकंड लेफ्टिनेंट हूँ अजित सिंह। सनी सर के साथ ही थे मेरे ज़्यादा सीन और वो वैसे ही हैं जैसे बड़े पर्दे पर हमें दिखते हैं। वहीँ अंदाज़ वही गुस्सा देखता है कैमरे पर लेकिन ऑफ कैमरा वो बहुत शांत और शर्मीले हैं और सबसे ख़ास बात कि वो बहुत अच्छे से बात करते हैं सबसे। वो एक जेंटलमैन हैं।
सवाल- शूटिंग के दौरान कोई ऐसा पल जब आपको सच में लगा कि आप “एक्टर नहीं, एक सोल्जर” बन चुके हैं?
जवाब- उस टाइम पर तो हाँ। क्यूंकि जब भी हम किसी किरदार को निभाते हैं तो उसमें पूरा घुस जाते हैं। जब भी हम सेट पर होते थे तो वहां अजीत सिंह ही होता था प्रणव नहीं। हमें थिएटर में भी यही सिखाया गया है कि रियलिस्टिक दिखना है। हमारे डायरेक्टर ने भी हमारी बहुत मदद की। मुझे याद है कि जब हम सेट पर पहुंचे तो शुरू के दो दिन हमें नहीं पता था कि कौन क्या रोल प्ले कर रहा है दो दिन बाद हमें स्क्रिप्ट मिली और फिर पता चला कि कौन अजीत सिंह है। फिर उसकी बैक स्टोरी बनी और फिर बताया कि कि कैसा है ये किरदार और क्या करता है।
सवाल- कास्टिंग का प्रोसेस क्या था बॉर्डर के लिए ? ऑडिशन दिए आपने ?
जवाब- नहीं। खुशकिस्मती से मुझे डायरेक्ट साल आई थी। मुझे याद है 26 फरवरी शिवरात्रि का दिन था मैं मंदिर में ही था और वो बहुत स्पेशल चीज़ थी कि बॉम्बे से फ़ोन आया और पहला सवाल था कि कहाँ हो और दाढ़ी कितनी है।और इंट्रो मांगी पंजाबी में। मैं मंदिर से घर गया और इंट्रो भेजी और फिर मंदिर आ गया। फिर अगले दिन मुझे मुकेश छाबड़ा सर की कॉल आई कि तुम्हें बॉर्डर 2 के लिए लॉक कर रहा हूँ दाढ़ी मत कटवाना। तब जाकर मुझे पता चला कि बॉर्डर 2 का हिस्सा बन रहा हूँ मैं। मुझे कुछ नहीं पता था कि ऐसा होगा लेकिन कहते हैं ना कि जो आपकी किस्मत में है वो आपको जरूर मिलेगा।
सवाल- IT इंजीनियर से एक्टर बनने का फैसला—ये प्लान था या ये भी किस्मत का मोड़?
जवाब- नहीं मेरा कोई प्लान नहीं था ये भी किस्मत ही है। जब मेरा कॉलेज खत्म हुआ तो मैं सोचता था कि ये क्या है फिर एक कज़न मुझे एक थिएटर ग्रुप में ले गया। जब मैं पहले दिन गया तो मुझे बहुत अजीब सा लगा लेकिन फिर मैं वो ज्वाइन किया तो मुझे मज़ा आने लगा फिर उसके बात तो करते करते आगे बढ़ते गए।
सवाल- परिवार और दोस्तों का रिएक्शन क्या था जब आपने इंजीनियरिंग छोड़ एक्टिंग चुनी?
जवाब- पहले तो मैं जॉब भी कर रहा था और सेट पर भी जाता था लेकिन जब मुझे चमकीला करने का मौका मिला तो मैं जॉब छोड़ी। क्यूंकि इम्तियाज़ अली सर के साथ काम करने का मौका मैं छोड़ना नहीं चाहता था। एक बार तो पेरेंट्स शॉक हुए थे लेकिन शायद एक विश्वास था कि सब अच्छा ही होगा तो वो भी मान गए। और अच्छा ही हुआ और वो खुश हैं।
सवाल- कभी ऐसा पल आया जब लगा कि “काश IT की जॉब ही जारी रखी होती”?
जवाब- नहीं कभी भी नहीं क्यूंकि जितनी ख़ुशी मुझे और मेरे परिवार को इस प्रोफैशन से मिली है मुझे नहीं लगता कि उतनी उस जॉब से मिल पाती। घर चलाने के लिए वो ठीक है लेकिन असल ख़ुशी आपको अपने पैशन से ही मिलती है।
सवाल- दिलजीत के साथ आपने दो बार काम किया कैसे होते हैं वो सेट पर ?
जवाब- वो बहुत शांत हैं हमेशा मंत्र जाप करते रहते हैं सेट पर भी। ॐ नमः शिवाय या वाहेगुरु वाहेगुरु जाप करते रहते हैं। वो अक्सर अपने स्प्रिच्युअल ज़ोन में रहते है और साथ ही उन्हें ये भी पता है कि उन्हें शॉट में क्या चाहिए क्यूंकि वो इतने बड़े कलाकार है। वो अक्सर शांत ही रहते हैं वैसे जाओ तो अच्छे से बात भी करते हैं। कभी-कभी मज़ाक भी करते हैं।
सवाल- इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना कितना मुश्किल है , खासकर बिना फिल्मी बैकग्राउंड के?
जवाब- बहुत मुश्किल है आज के टाइम में। कितने सारे ऑडिशंस के बाद एक रोल मिलता है। और रोल मिलने के बाद भी कितना पार्ट फिल्म में दिखता है ये भी निर्भर करता है। और उसी पर आगे आपको काम मिलता है नहीं तो ऑडिशन का सिलसिला तो चलता ही।
सवाल- आप कभी निराश हुए हो जब सीन कट हो जाते हैं ?
जवाब- हांजी होता हूँ कि क्यों कट गए लेकिन जब डायरेक्टर के पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखते हैं तो पता चलता है कि नहीं ये ठीक था फिल्म के लिए। हम इमोशनल हो जाते है क्यूंकि वो किया होता है हमने और साथ में ये भी होता है कि मैं दिख जाओ और ज़्यादा। वो गरीड तो खत्म नहीं होगी।
