महाकाव्य श्री रामायण कथा रिव्यू: भक्ति, भावनाओं और रिश्तों से सजी राम की अमर गाथा
punjabkesari.in Friday, Sep 25, 2026 - 02:01 PM (IST)
फिल्म: महाकाव्य श्री रामायण कथा (Mahakavya Shri Ramayan Katha)
कलाकार: देव शर्मा (Dev Sharma), अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora),शील वर्मा (Sheel Verma),निर्भय वाधवा (Nirbhay Wadhwa),राजनेश दुग्गल (Rajneesh Duggal)
निर्देशक: अभिषेक सिंह (Abhishek Singh)
रेटिंग: 3 स्टार
Mahakavya Shri Ramayan Katha: रामायण भारतीय संस्कृति और आस्था का ऐसा हिस्सा है, जिससे लगभग हर पीढ़ी किसी न किसी रूप में जुड़ी रही है। इस कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करना इसलिए आसान काम नहीं है, क्योंकि दर्शक इसके किरदारों और घटनाओं से पहले से ही परिचित होते हैं। ऐसे में ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ की कोशिश कहानी को नया रूप देने के बजाय उसके भावनात्मक और आध्यात्मिक पक्ष को सामने रखने की है। देव शर्मा, अंजलि अरोड़ा और राजनेश दुग्गल की दमदार मौजूदगी के साथ ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ आस्था, भावनाओं और रिश्तों की जानी-पहचानी कहानी को सरल और संवेदनशील अंदाज में पर्दे पर पेश करती है।
कहानी
फिल्म की कहानी भगवान श्री राम के जीवन और उनके संघर्षों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। अयोध्या से वनवास की यात्रा, सीता हरण, हनुमान का राम से जुड़ना, लंका की ओर बढ़ता संघर्ष और रावण के साथ निर्णायक युद्ध जैसे रामायण के प्रमुख प्रसंग कहानी का हिस्सा हैं।
फिल्म की खास बात यह है कि यह इन घटनाओं को अनावश्यक रूप से खींचने की कोशिश नहीं करती। कहानी एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक अपेक्षाकृत सहज तरीके से पहुंचती है। इसमें युद्ध और संघर्ष के साथ-साथ परिवार, भाईचारे, प्रेम, त्याग और विश्वास को भी पर्याप्त जगह दी गई है।
कहानी पहले से परिचित होने के बावजूद फिल्म इसे भावनात्मक जुड़ाव के साथ पेश करने की कोशिश करती है। हालांकि, जिन दर्शकों ने रामायण की अलग-अलग प्रस्तुतियां पहले देखी हैं, उनके लिए इसमें बहुत ज्यादा नया देखने को नहीं मिलता। फिर भी इसकी सरल प्रस्तुति और आस्था से जुड़ा भाव फिल्म को अपनी अलग पहचान देने की कोशिश करता है।
निर्देशन
अभिषेक सिंह ने फिल्म को जरूरत से ज्यादा प्रयोगात्मक बनाने के बजाय इसकी मूल भावना को प्राथमिकता दी है। निर्देशन में सबसे ज्यादा जोर कहानी के भावनात्मक और धार्मिक पक्ष पर दिखाई देता है। फिल्म के कई दृश्यों में भव्यता से ज्यादा माहौल और भावनाओं को महत्व दिया गया है।
वनवास और विरह जैसे भावनात्मक प्रसंग हों या युद्ध की तैयारी और संघर्ष वाले दृश्य, बैकग्राउंड स्कोर कहानी के असर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। फिल्म का संगीत भी इसके आध्यात्मिक माहौल को मजबूत करता है। ‘सिया राम’, ‘राम जी की सेना’ और कैलाश खेर की आवाज में ‘हे हनुमान’ जैसे गाने कहानी के अलग-अलग भावों को उभारते हैं। शान, शाहिद मल्ल्या और वैशाली सामंत की आवाजें भी फिल्म के म्यूजिक एल्बम में सुनने को मिलती हैं।
निर्देशन की एक खास बात फिल्म की रफ्तार है। इतनी विस्तृत कथा होने के बावजूद फिल्म घटनाओं को जरूरत से ज्यादा लंबा खींचने से बचती है। हालांकि, कुछ जगहों पर प्रस्तुति और ज्यादा प्रभावशाली हो सकती थी।
अभिनय
अभिनय के मामले में देव शर्मा श्री राम के किरदार में संयम और गरिमा बनाए रखते हैं। उनके किरदार में शांति और धैर्य का भाव दिखाई देता है, जो श्री राम के व्यक्तित्व के अनुरूप बैठता है। अंजलि अरोड़ा ने माता सीता के रूप में सौम्यता के साथ भावनात्मक दृश्यों को निभाने की कोशिश की है।
शील वर्मा लक्ष्मण के किरदार में भाई के प्रति समर्पण और भावनात्मक जुड़ाव को सामने लाते हैं। वहीं निर्भय वाधवा का हनुमान वाला किरदार फिल्म में ऊर्जा बढ़ाता है। उनके हिस्से के दृश्यों में जोश और भक्ति दोनों का मेल देखने को मिलता है। राजनेश दुग्गल रावण की भूमिका में फिल्म के नाटकीय पक्ष को मजबूती देते हैं। उनके किरदार में अहंकार और शक्ति का प्रभाव नजर आता है। खास तौर पर श्री राम और रावण के व्यक्तित्व के बीच का अंतर कहानी के संघर्ष को और स्पष्ट करता है।
