Exclusive Interview:मेरे लिए समझना मुशक्लि कि कोई इतने लोगों की जान कैसे ले सकता है:ललित प्रभाकर
punjabkesari.in Thursday, Oct 22, 2026 - 12:07 PM (IST)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में राजकुमार राव ने मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका निभाई है, जबकि अभिनेता ललित प्रभाकर कसाब के किरदार में नजर आ रहे हैं। 26/11 मुंबई आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उस भयावह घटना और उससे जुड़े कानूनी संघर्ष को पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। फिल्म को लेकर अभिनेता ललित प्रभाकर और उज्ज्वल निकम ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
ललित प्रभाकर
सवाल: फिल्म ‘प्रहार’ में आपको कसाब का किरदार निभाने का मौका मिला। यह काफी चुनौतीपूर्ण भूमिका है। जब आपको इस किरदार के लिए चुना गया, तो आपके मन में सबसे पहले क्या सवाल आए?
ललित: मेरे मन में ज्यादा सवाल नहीं थे। मैं इस बात को लेकर काफी उत्साहित था कि मुझे अविनाश सर के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। मैडॉक जैसे प्रोडक्शन हाउस और इतनी अच्छी टीम के साथ काम करना भी मेरे लिए खास था। ऑडिशन के लिए जो सीन पढ़े थे, उनसे मुझे समझ आ गया था कि फिल्म में इस किरदार को किस संवेदनशीलता के साथ दिखाया जाएगा। अविनाश सर ने भी बताया कि वह इस फिल्म के किरदारों को वास्तविकता के करीब रखना चाहते हैं। हम उन्हें सिर्फ नकारात्मक रूप में नहीं, बल्कि इंसान के तौर पर दिखाना चाहते थे। किसी किरदार की कमियों को समझना भी जरूरी है, तभी हम सही और गलत के बीच अंतर कर पाते हैं। इस भूमिका में किरदार के बदलाव को दिखाने की भी काफी गुंजाइश थी, जिसने मुझे एक अभिनेता के तौर पर आकर्षित किया।
सवाल: कसाब जैसे क्रूर व्यक्ति का किरदार निभाते समय क्या इसका आपकी मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ा?
ललित: मैंने इस किरदार को समझने के लिए काफी कुछ पढ़ा और अलग-अलग चीजों को जानने की कोशिश की। आज भी मेरे लिए यह समझना मुश्किल है कि कोई व्यक्ति इतने सारे लोगों की जान कैसे ले सकता है। हालांकि, किसी भी ऐसी स्थिति को हम पूरी तरह अनुभव नहीं कर सकते, जिससे हम खुद कभी नहीं गुजरे। उदाहरण के लिए, अगर मुझे किसी की मौत का दृश्य करना है, तो मैंने न तो खुद मौत का अनुभव किया है और न ही अपने सामने किसी को मरते देखा है। ऐसे में हम पढ़ी हुई बातों, देखी-सुनी चीजों और अपनी कल्पना के आधार पर उस स्थिति को समझने की कोशिश करते हैं। एक अभिनेता के तौर पर मैं भी इन्हीं अनुभवों और जानकारियों का सहारा लेकर अपना किरदार निभाता हूं।
सवाल: फिल्म में राजकुमार राव के साथ आपकी भिड़ंत देखने को मिलेगी। क्या आप दोनों ने साथ में कोई वर्कशॉप की थी?
ललित: हम दोनों सिर्फ एक बार टेबल रीडिंग के लिए मिले थे। उसके बाद सीधे सेट पर ही मुलाकात हुई। शूटिंग के दौरान भी हम ज्यादा बातचीत नहीं करते थे। मैं चाहता था कि अपने किरदार से बाहर न आऊं। सेट पर कुछ ऐसे कलाकार भी थे, जिन्हें मैं पहले से जानता था, लेकिन उनसे भी ज्यादा बात नहीं करता था। मुझे लगता है कि जब आप किसी किरदार में होते हैं, तो आसपास के लोग भी आपको उसी नजरिए से देखते हैं। उनकी प्रतिक्रिया और नजरिया भी आपकी परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है। मैं उस माहौल और ऊर्जा को बनाए रखना चाहता था।
सवाल: कसाब के लुक के लिए आपका मेकअप और प्रोस्थेटिक्स काफी वास्तविक लग रहा है। इस रूप में तैयार होने में कितना समय लगता था?
ललित: मुझे तैयार होने में करीब 45 मिनट लगते थे। मेरी टीम के निखिल और मनीष मुझे तैयार करते थे। लुक को वास्तविक बनाने के लिए त्वचा का रंग थोड़ा दबाना पड़ता था। किरदार के कपड़े छोटे थे, इसलिए हाथों और पैरों का रंग भी उसी हिसाब से तैयार किया जाता था। इसके अलावा क्लीन शेव और हेयरस्टाइल पर भी ध्यान दिया गया। मैंने कसाब की कुछ वास्तविक तस्वीरें देखी थीं। किसी व्यक्ति के खड़े होने, देखने और चलने के तरीके से भी उसके व्यवहार को समझने में मदद मिलती है। उसकी तस्वीरों ने मुझे किरदार की बॉडी लैंग्वेज समझने में मदद की।
सवाल: शूटिंग के बाद क्या आप अपने सीन मॉनिटर पर देखते थे या निर्देशक के फैसले पर भरोसा करते थे?
ललित: मैं आमतौर पर अपने सीन मॉनिटर पर नहीं देखता था। ऐसा नहीं था कि अविनाश सर मुझे सीन देखने से रोकते थे। वह बहुत अच्छे सहयोगी निर्देशक हैं। वह कलाकारों के साथ चर्चा करते हैं और सुझाव देने की भी पूरी आजादी देते हैं। लेकिन मुझे उन पर पूरा भरोसा था, इसलिए मैं खुद बार-बार मॉनिटर पर जाकर अपनी परफॉर्मेंस नहीं देखना चाहता था।
सवाल: ‘प्रहार’ के बाद हिंदी सिनेमा में आप किस तरह की भूमिकाएं करना चाहेंगे?
ललित: मैंने अभी तक अपने लिए किसी खास तरह के किरदार तय नहीं किए हैं। मैं वही काम करना चाहता हूं, जो मुझे उत्साहित करे और जिसे देखकर मेरे मन में आए कि पता नहीं मैं इसे कैसे करूंगा। ‘प्रहार’ का किरदार भी ऐसा ही था। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मैं इस तरह की भूमिका निभाऊंगा, लेकिन जब मौका मिला तो इसे करने की इच्छा हुई। मैं मराठी फिल्मों में भी इसी तरह काम चुनता हूं। मेरे लिए सबसे अहम चीज मेरी सहज प्रतिक्रिया और किसी किरदार को लेकर होने वाला उत्साह है।
उज्ज्वल निकम
सवाल: आपने राजकुमार राव के साथ सेट पर समय बिताया है। उनके साथ आपकी पहली मुलाकात कैसी रही?
उज्ज्वल निकम: मेरी राजकुमार राव से पहली मुलाकात सेट पर ही हुई थी। वह स्वभाव से बहुत अच्छे हैं। उस दिन अविनाश जी कैमरे के पास बैठे थे और उन्होंने मुझे एक वाक्य बोलने के लिए कहा। मैं सोच रहा था कि इसे कैसे बोलूं, लेकिन उन्होंने मुझे कैमरे के सामने भेज दिया। जब मैंने वह वाक्य बोला, तो अविनाश जी भी हैरान रह गए। राजकुमार गंभीर रहने के साथ-साथ काफी हाजिरजवाब भी हैं। अगर आपकी उनसे अच्छी बातचीत हो जाए, तो उनका मजाकिया अंदाज भी देखने को मिलता है।
सवाल: आपके बचपन में फिल्मों को लेकर क्या यादें हैं? क्या घर में फिल्में देखने की आजादी थी?
उज्ज्वल निकम: हमारे पिताजी बहुत अनुशासनप्रिय थे। जब वह गांव या किसी काम से बाहर जाते थे, तभी हम फिल्म देख पाते थे। घर में अनुशासन काफी सख्त था, इसलिए फिल्में देखने के मौके कम ही मिलते थे। मुझे अमिताभ बच्चन की फिल्में पसंद थीं, खासकर ‘शोले’। मैं एक्शन फिल्में ज्यादा देखता था। आज भी कभी टीवी पर कोई फिल्म देखते हुए कहानी भूल जाता हूं और घर में पत्नी या बहू से पूछ लेता हूं कि क्या मैंने यह फिल्म पहले देखी है।
सवाल: 26/11 मुंबई हमलों के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर यह सवाल उठा था कि टीवी पर सुरक्षा बलों की गतिविधियां दिखाने से आतंकियों के हैंडलर्स को जानकारी मिल सकती थी। उस समय मीडिया की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?
उज्ज्वल निकम: भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की आजादी बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन जब देश की सुरक्षा का सवाल हो, तो मीडिया को भी संयम बरतना चाहिए। हमलों के दौरान टीवी पर दिखाई जा रही गतिविधियां पाकिस्तान के कराची में बैठे आतंकियों के हैंडलर्स तक भी पहुंच रही थीं। जब हमें इस बात का पता चला, तो हमने मीडिया से अनुरोध किया कि कवरेज का रुख कुछ समय के लिए बदल दिया जाए, ताकि हमारी सुरक्षा रणनीति का खुलासा न हो। मीडिया ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और सहयोग किया। मुझे लगता है कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और सावधानी बेहद जरूरी है।
