इस सीजन में मरीजों की कतार भी है और चुनौतियों का अंबार भी : अमोल पराशर
punjabkesari.in Tuesday, Jun 23, 2026 - 12:12 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। TVF अपने दर्शकों के लिए 'ग्राम चिकित्सालय' के दूसरा सीजन लेकर लौट रहा है। 'ग्राम चिकित्सालय' के सीजन 2 में अमोल परासर डॉ प्रभात के रूप में लौट रहे हैं। इस बार सीरीज में अमोल यानि प्रभात को और हंगामों का सामना करना पड़ेगा। वहीं सीरीज में इस बार नए लोकप्रिय चेहरे भी देखने को मिलेंगे। ग्राम चिकित्सालय का सीजन 2, 23 जून को अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जाएगा। सीरीज के बारे में अमोल पराशर, आकांशा रंजन कपूर और दिनेश लाल यादव ने निरहुआ ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश..
अमोल पराशर
सवाल: सीजन 1 में आपने डॉक्टर प्रभात का किरदार निभाया और लोगों ने आपको स्वीकार भी किया। इस बार दर्शकों को क्या नया देखने को मिलेगा?
थोड़ा-बहुत लोगों ने प्रभात को स्वीकार कर लिया है और प्रभात ने भी गांव के तौर-तरीकों को समझना शुरू कर दिया है। अब वह यह सोचता है कि यहां के लोगों को कैसे समझाया जाए और उनका इलाज कैसे किया जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार मरीज भी हैं। पहले सीजन के बाद सबसे ज्यादा सवाल यही आता था कि डॉक्टर साहब के पास मरीज कब आएंगे? तो इस बार मरीज हैं और बहुत सारे हैं।
लेकिन ये मरीज सिर्फ इलाज कराने नहीं आए हैं, बल्कि प्रभात की पेशेंस यानी धैर्य की भी परीक्षा लेने वाले हैं। इसके अलावा इस बार नए खिलाड़ी भी आए हैं। पहले सीजन में जो प्रभात बनाम भठकंडी की स्थिति बनी थी, वह अब और बड़े स्तर पर पहुंच गई है। प्रभात को लगता है कि एक समस्या हल होगी तो सब ठीक हो जाएगा, लेकिन जिंदगी में ऐसा नहीं होता। एक लड़ाई खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है। इसके साथ-साथ गार्गी और प्रभात का रिश्ता भी और गहरा हुआ है।
सवाल: आपने कहा कि इस बार मरीज हैं। कोई अतरंगी या मजेदार बीमारी वाला किस्सा जो आपको याद हो?
अगर मैं सब कुछ बता दूंगा तो हमारे लेखकों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि इस बार कई ऐसे मरीज हैं जो आपको हैरान कर देंगे। ट्रेलर में भी एक झलक दिखाई गई है, जहां एक व्यक्ति मिठाई के डिब्बे में अपना सैंपल लेकर आता है। डॉक्टर को लगता है कि कोई मिठाई लेकर आया है, लेकिन डिब्बा खोलने पर कुछ और ही निकलता है। ऐसे कई मजेदार और अनोखे मामले इस बार देखने को मिलेंगे। प्रभात के लिए भी ये सब नया है कि लोग किस-किस तरीके से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं।
सवाल: TVF के लगभग एक दशक लंबे सफर को आप कैसे देखते हैं?
TVF के साथ मेरा रिश्ता सिर्फ काम का नहीं है, बल्कि कई लोगों से मेरा परिचय TVF बनने से पहले का है। हम सब अलग-अलग कॉलेजों से थे लेकिन लगभग एक ही समय में मुंबई आए थे। शुरुआत में उन्होंने यूट्यूब पर कंटेंट बनाना शुरू किया। उस समय किसी को नहीं पता था कि वेब सीरीज क्या होती है। फिर ‘Permanent Roommates’ आई और उसने इतिहास बना दिया। उसके बाद ‘Pitchers’ आई और वह भी जबरदस्त सफल रही।
मैं ‘Tripling’ के जरिए TVF का हिस्सा बना। वह शो खास तौर पर कुछ कलाकारों को ध्यान में रखकर लिखा गया था। उस समय बहुत दबाव भी था क्योंकि लोगों को स्क्रिप्ट सुनकर ही लग रहा था कि यह सुपरहिट होगी।
TVF की सबसे बड़ी खासियत उनकी निरंतरता है। पिछले 10-12 सालों में उन्होंने इतने सफल शो दिए हैं कि आज भी समझ नहीं आता कि वे यह कैसे कर लेते हैं।
आकांक्षा रंजन कपूर
सवाल: असल जिंदगी में आप और डॉक्टर गार्गी कितनी एक जैसी हैं?
सीजन 1 में मैं गार्गी से बिल्कुल अलग थी। लेकिन सीजन 2 में मैंने अपने व्यक्तित्व का काफी हिस्सा गार्गी में जोड़ा है। इस बार गार्गी काफी नटखट है। कई दृश्यों में वह प्रभात को छेड़ती है, उसका मजाक उड़ाती है और उनके बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिलेगी। जब हमने शूटिंग की और मैं मॉनिटर पर अपने सीन देख रही थी, तब हमारे लेखक ने मुझसे कहा कि इस बार जो तुम कर रही हो, वह बहुत अच्छा काम कर रहा है।
असल जिंदगी में भी मैं अपने दोस्तों के साथ ऐसी ही हूं। दोस्ती में मजाक करना, छेड़ना और हंसी-मजाक करना मेरी आदत है। इसलिए गार्गी का यह रूप निभाना मेरे लिए बहुत स्वाभाविक था।
सवाल: आज भी कई लोग सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं करते और निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देते हैं। इस बारे में आपकी क्या राय है?
मेरे हिसाब से यह काफी हद तक व्यक्ति की आर्थिक क्षमता पर निर्भर करता है। जो लोग निजी अस्पताल का खर्च उठा सकते हैं, वे वहां जाते हैं। लेकिन मैं अपना एक अनुभव साझा करना चाहूंगी। शूटिंग के दौरान मुझे एक पिल्ले ने काट लिया था। हम मध्य प्रदेश के एक गांव में शूट कर रहे थे और मुझे सरकारी अस्पताल जाना पड़ा। मेरा अनुभव बेहद अच्छा रहा। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी निजी अस्पताल में हूं।
जब मेरा इलाज पूरा हुआ तो मैंने पूछा कि पैसे कहां जमा करने हैं। तब मुझे बताया गया कि यह सरकारी अस्पताल है और यहां मुझे कुछ भी भुगतान नहीं करना है। बाद में मुंबई में भी मुझे रेबीज के इंजेक्शन लेने थे और वहां भी अनुभव अच्छा रहा। मुझे लगता है कि लोगों के मन में सरकारी अस्पतालों को लेकर जो पुरानी छवि है, वह अब काफी बदल चुकी है। बस लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की जरूरत है।
दिनेश लाल यादव (निरहुआ)
सवाल: आपको यह शो कैसे मिला और पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
मुझे बहुत खुशी हुई जब पता चला कि मैं ग्राम चिकित्सालय के दूसरे सीजन का हिस्सा बनने जा रहा हूं। सच कहूं तो मैं पहले सीजन में भी काम करना चाहता था, लेकिन किसी वजह से नहीं कर पाया।
जब मैंने पहला सीजन देखा तो मुझे बहुत पसंद आया क्योंकि मैं खुद गांव में पला-बढ़ा हूं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्या होते हैं और वहां कैसी परिस्थितियां होती हैं, यह मैंने बहुत करीब से देखा है। इसलिए इस शो की दुनिया मुझे बेहद वास्तविक लगती है। शायद जिन लोगों ने गांव की जिंदगी नहीं देखी है, उनके लिए यह सब नया हो, लेकिन हमारे लिए यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। इसलिए ऐसे शो का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा।
सवाल: इस शो का आपका सबसे पसंदीदा डायलॉग कौन-सा था, जो आपके साथ रह गया हो?
मेरे साथ एक डायलॉग हमेशा के लिए रह गया है "इनको नजर नहीं लगती, खुद ही बनराकस हैं। यह डायलॉग मुझे काफी पसंद है। ट्रेलर में भी इसे शामिल किया गया था और सच कहूं तो ट्रेलर का सबसे बेहतरीन और यादगार हिस्सा वही था।
सवाल: शो में बनराकस और बिनोद दोनों किरदारों को देखकर आपका अनुभव कैसा रहा?
मैं भी उतना ही उत्साहित और रोमांचित था, जितनी ऑडियंस थी। हमने उन्हें पहले सीजन में नहीं देखा था, इसलिए जब सेट पर उनसे मुलाकात हुई तो मेरे लिए भी वह एक खास पल था। पंचायत मेरा भी पसंदीदा शो है और मुझे वह बहुत पसंद है। विनोद और बनराकस दोनों ही ऐसे किरदार हैं, जिन्हें दर्शक बेहद पसंद करते हैं। इसलिए उन्हें करीब से देखना और उनके साथ काम करना मेरे लिए काफी रोमांचक अनुभव रहा।
