नेशनल अवॉर्ड विनर अंजलि पाटिल की ‘सेल्वी’ का बुसान फिल्म फेस्टिवल में होगा वर्ल्ड प्रीमियर
punjabkesari.in Monday, Aug 24, 2026 - 03:05 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। तमिल राइटर-डायरेक्टर सैलेश रत्नकुमार की पहली फीचर फिल्म ‘सेल्वी’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। नेशनल फिल्म अवॉर्ड विजेता अंजलि पाटिल फिल्म में लीड रोल निभाने के साथ-साथ इसकी प्रोड्यूसर भी हैं। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 31वें बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के विजन एशिया सेक्शन में किया जाएगा। यह फेस्टिवल 6 से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाला है।
‘सेल्वी’ की कहानी उन होम-केयर वर्कर्स की जिंदगी पर केंद्रित है, जिनकी मेहनत अक्सर लोगों की नजरों से दूर रहती है। फिल्म के जरिए देखभाल, माइग्रेशन, दोस्ती, थकान, अपराधबोध और मुश्किल हालात के बीच जिंदगी को आगे बढ़ाने की कोशिश जैसे पहलुओं को करीब से दिखाया गया है।
असल जिंदगी से मिली फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी सैलेश रत्नकुमार ने सिनेमैटोग्राफर भार्गव श्रीधर के साथ मिलकर लिखी है। इसकी कहानी को आकार देने में उन होम-केयर नर्सों का अनुभव अहम रहा, जिन्होंने कई महीनों तक भार्गव की मां की गंभीर बीमारी के दौरान उनकी देखभाल की थी।
तमिलनाडु के छोटे शहरों से चेन्नई आने वाली ये माइग्रेंट महिलाएं सीमित संसाधनों के बीच हॉस्टल में रहती हैं और रोजाना ऐसे घरों में काम करती हैं, जो उनकी अपनी सामाजिक और आर्थिक दुनिया से काफी अलग हैं। खुद कोयंबटूर से चेन्नई आए सैलेश ने इस जिंदगी की चुनौतियों और उसमें छिपी भावनात्मक उथल-पुथल को करीब से महसूस किया।
निर्देशक के मुताबिक, वह फिल्म के जरिए किसी किरदार को जज करने या उसकी जिंदगी को जबरन किसी बड़े अर्थ में बांधने के बजाय उसके रोजमर्रा के अनुभवों के करीब रहना चाहते थे।
अंजलि पाटिल के लिए खास प्रोजेक्ट
‘सेल्वी’ को अंजलि पाटिल ने अपने प्रोडक्शन बैनर अनाहत फिल्म्स के तहत बनाया है। उन्होंने साल 2021 में इस बैनर की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए अर्थपूर्ण और प्रभावशाली कहानियों को सामने लाना है।
अनाहत फिल्म्स के बैनर तले फिक्शन और नॉन-फिक्शन दोनों तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम किया गया है। इनमें ‘द मूगाई’ शामिल है, जिसे सनडांस 2023 में प्रदर्शित किया गया था, जबकि ‘बक्शो बॉन्डी’ को बर्लिनाले 2025 में जगह मिली। ‘सेल्वी’ इस बैनर की पहली फुल-लेंथ तमिल फीचर फिल्म है।
अंजलि पाटिल ने फिल्म को अपने लिए क्रिएटिव आजादी से जुड़ा अहम प्रोजेक्ट बताया है। उनके मुताबिक, यह फिल्म हेल्थकेयर सिस्टम से जुड़े उन लोगों की निजी दुनिया को समझने की कोशिश है, जो अपना ज्यादातर समय दूसरों की देखभाल में लगा देते हैं।
बुसान में प्रीमियर को लेकर उत्साहित टीम
‘सेल्वी’ का वर्ल्ड प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के विजन एशिया सेक्शन में होना फिल्म की टीम के लिए बड़ी उपलब्धि है। विजन एशिया एशिया के नए फिल्ममेकर्स और उनकी कहानियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
फिल्म के तकनीकी पक्ष में भी इंडस्ट्री के अनुभवी नाम जुड़े हैं। नौ बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीत चुके ए. श्रीकर प्रसाद ने ‘सेल्वी’ की एडिटिंग की है। वहीं, ‘पोन्नियिन सेलवन: पार्ट वन’ के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके आनंद कृष्णमूर्ति ने फिल्म का साउंड डिजाइन संभाला है।
इंटरनेशनल सपोर्ट भी मिला
‘सेल्वी’ को रेड सी फंड ने को-प्रोड्यूस किया है। रेड सी फंड, रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की पहल है। इसके अलावा फिल्म को हॉन्ग कॉन्ग एशिया फिल्म फाइनेंसिंग का भी समर्थन मिला है। बुसान में वर्ल्ड प्रीमियर के बाद ‘सेल्वी’ को अंतरराष्ट्रीय फिल्म सर्किट में किस तरह की प्रतिक्रिया मिलती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल फिल्म की कहानी और इसके विषय ने इसे भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में शामिल कर दिया है, जो पर्दे पर अक्सर अनदेखी रह जाने वाली जिंदगियों को केंद्र में लाने की कोशिश करती हैं।
