सोनचिरैया से भक्षक और दलदल तक, भूमि पेडनेकर के 6 रोल जिन्होंने बनाई अलग पहचान
punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 06:33 PM (IST)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भूमि सतीश पेडनेकर हमेशा अलग और मुश्किल किरदार चुनने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स किए हैं जो सिर्फ फिल्में नहीं रहे, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का विषय बने। दम लगा के हईशा, बधाई दो, सांड की आँख, भक्षक जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में *दलदल* के साथ उन्होंने अपने काम में एक और दमदार प्रोजेक्ट जोड़ लिया है।
आइए देखते हैं उनके कुछ ऐसे किरदार, जिनमें उन्होंने आसान रास्ता नहीं, बल्कि चुनौती भरा रास्ता चुना:
भक्षक
मुज़फ्फरपुर शेल्टर केस पर बनी इस फिल्म में भूमि ने एक लोकल पत्रकार का किरदार निभाया, जो शेल्टर होम में हो रहे अत्याचारों की जांच करती है। यह एक गंभीर और संवेदनशील विषय था, जिसे निभाना आसान नहीं था। भूमि ने इस किरदार को सच्चाई और मजबूती के साथ पेश किया।
दम लगा के हईशा
अपनी पहली ही फिल्म के लिए भूमि ने लगभग 30 किलो वजन बढ़ाया। यह फैसला कई अभिनेत्रियां लेने से हिचकिचातीं। फिल्म शरीर और रूप-रंग की सोच पर आधारित थी। भूमि ने संध्या का किरदार बहुत सादगी और आत्मविश्वास से निभाया और बॉडी पॉजिटिविटी पर चर्चा शुरू की।
सोनचिरैया
चंबल के बीहड़ों पर आधारित इस फिल्म में भूमि ने इंदुमति तोमर का किरदार निभाया। उनका देसी लहजा, साधारण लुक और मजबूत अभिनय फिल्म की जान थे। इस फिल्म में उनका एक अलग और गंभीर रूप देखने को मिला।
सांड की आँख
इस फिल्म में भूमि ने शूटर चंद्रो तोमर का किरदार निभाया। यह एक अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने साबित किया कि उम्र या लुक से ज्यादा मायने अभिनय रखता है।
बधाई दो
इस फिल्म में भूमि ने सुमी सिंह का किरदार निभाया, जो एक लेस्बियन महिला है। कहानी में वह परिवार के दबाव में एक गे पुरुष से शादी करती है। यह एक संवेदनशील विषय था, जिसे भूमि ने बहुत सहजता से निभाया और समाज के एक कम चर्चा वाले मुद्दे को सामने लाईं।
दलदल
विशाल धमिजा के उपन्यास भेंडी बाजार पर आधारित इस सीरीज़ में भूमि डीसीपी रीता फरेरा के किरदार में नजर आती हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक क्राइम थ्रिलर है, जो मुंबई की अंधेरी दुनिया और उनके निजी संघर्ष को दिखाती है। भूमि ने खुद कहा था, “ऐसे किरदार बहुत कम लिखे जाते हैं।” इस सीरीज़ में उनका मजबूत और गहराई वाला अभिनय देखने को मिलता है।
भूमि पेडनेकर की हर फिल्म यह दिखाती है कि वह अलग और असरदार कहानियों का हिस्सा बनना चाहती हैं। उनके चुनाव बताते हैं कि हिंदी सिनेमा का भविष्य अच्छे हाथों में है।
