DUTA Protest : कुलपति और डूटा प्रतिनिधियों की मध्यरात्रि तक चली बैठक बेनतीजा

2019-12-06T13:11:39.303

नई दिल्ली: बुधवार पूरे दिन एडहॉक शिक्षकों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन व देर रात वीसी ऑफिस के सभी कमरों व हॉल्स पर कब्जे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) व कुलपति प्रो. योगेश त्यागी सहित वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मध्यरात्रि करीब 6 घंटे चली बैठक बेनतीजा रही। जिसके बाद वीरवार सुबह से ही शिक्षक कुलपति कार्यालय के भीतर और बाहर घेरा डाले बैठे रहे। इस प्रदर्शन को लेकर लगातार डीयू में तनाव बढ़ता चला जा रहा है। डीयू के रजिस्ट्रार डॉ. तरुण दास ने पूरे मामले पर अपना बयान जारी करते हुए कुलपति कार्यालय में जबरन घुसने और सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने की निंदा की है। 

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा पहुंचाना, तोडफ़ोड़ और हिंसा अशोभनीय है। डॉ. दास ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी समस्या के लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। इसी के मद्देनजर वाइस चांसलर, प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, डीन (प्रवेश) और विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने 4 व 5 दिसम्बर की मध्यरात्रि डूटा के पदाधिकारियों से उनके मुद्दों पर 6 घंटे तक चर्चा की। वहीं पूरे मामले को लेकर डूटा पदाधिकारियों को कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन आपसी विश्वास और सम्मान के माहौल में किसी भी प्रासंगिक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए खुला है। 

शिक्षकों से सौहार्दपूर्ण संवाद के लिए आंदोलन को वापस लेने की अपील भी की गई। रजिस्ट्रार ने कहा कि विश्वविद्यालय ने पहले ही यूजीसी विनियम, 2018 के अनुसार स्थायी आधार पर संकाय सदस्यों की भर्ती के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को जल्द स्थायी संकाय की भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कहा है। वहीं इस बारे में पूछे जाने पर डूटा के उपाध्यक्ष आलोक पांडे ने कहा कि वीरवार को कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक प्रेस रिलीज जारी कर यह बताने की कोशिश की है कि रात 10:30 से तड़के 3 बजे तक चली मीटिंग में उन्होंने हमारी मांगों को मान लिया है, और हम सबको अपने काम पर लौट जाना चाहिए जबकि वास्तविकता यह है कि उन्होंने हमारी मांगों को ध्यान से सुना तक नहीं। वह केवल भ्रम फैला रहे हैं। 

डीयू शिक्षकों का आंदोलन अभूतपूर्व
डॉ. रसाल सिंह: डीयू अकादमिक परिषद् के सदस्य डॉ. रसाल सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर कहा कि यह दिल्ली विश्वद्यिालय के शिक्षकों का अभूतपूर्व आंदोलन है। शिक्षक अपने रोजगार, प्रमोशन और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। विश्वविद्यालय में चक्का जाम की स्थिति बन गई है। इस अभूतपूर्व संकट और शिक्षकों की दशकों से लंबित समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए ताकि डीयू में परीक्षा, मूल्यांकन और पठन-पाठन का काम सुचारू रूप से हो सके।


Author

Riya bawa

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