Kundli Tv- विदुर नीति: इन लोगों से बनाएं दूरी, सफलता चूमगी कदम

Friday, Jul 06, 2018 - 05:08 PM (IST)

सफल जीवन जीने के लिए हर कोई आचार्य चाणक्य की नीतियों का सहारा लेता है। लेकिन चाणक्य के अलावा कई और महान विद्वान भी हैं जिनके अपने जीवनकाल के अनुभवों को हमारे समक्ष नीतियों के रूप में प्रस्तुत किया। इनमें से एक विद्वान है महात्मा विदुर नीति। द्वापर युग के हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री और महाराज धृतराष्ट्र और पाण्डु के भाई ‘विदुर’ को सफल नीतियों के लिए जाना जाता है। विदुर ही वे शख़्स थे जिन्होंने महाराज धृतराष्ट्र को यह एहसास दिलाया था कि उन्होंने अपने सम्राज्य और परिवार नहीं संभाला। उनके कारण कई परिस्थितियां बेकाबू हुईं और कुरुक्षेत्र युद्ध का एक कारण वे ही हैं।


बहरहाल अपनी नीतियों से विदुर जीवन के कई पहलुओं को उजागर करते हैं। जीवन में सफलता पाने के लिए, प्रसिद्ध होने के लिए, धन कमाने के लिए क्या करें और क्या नहीं, इन सभी नीतियों को प्रधानमंत्री विदुर ने प्रस्तुत किया है।


आज हम आपको बताएंगे कि विदुर नीति के अनुसार अगर हमें सफल होना है तो किन-किन लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। क्योंकि ये लोग अगर हमारी जिंदगी में रहेंगे तो हम सफलता के करीब होते हुए भी उसे खो देंगे।


विदुर नीति के अनुसार हमें हमेशा ही नशेड़ी व्यक्ति से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, क्योंकि नशेड़ी व्यक्ति को अच्छे-बुरे और सही-गलत की समझ नहीं रहती। यदि होती तो वे शराब पीकर अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं करता। किंतु यही इकलौता कारण नहीं है। दरअसल विदुर का मानना है कि नशेड़ी व्यक्ति बेहद खतरनाक होता है। नशे में वह ऐसे कार्य कर बैठता है जिसके कारण उसके साथ वालों को भी कष्ट उठाना पड़ सकता है। इसलिए इनसे दूरी बनाकर रखने में ही हमारी भलाई है।


यानि कि पागल व्यक्ति इनसे न ही टकराना चाहिए और न ही इनके साथ किसी प्रकार की बहस करनी चाहिए। जिस व्यक्ति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं होता उसे सही गलत की समझ नहीं होती। वे कुछ भी कह सकता है और आक्रमक होकर आपके ऊपर प्रहार भी कर सकता है। विदुर के अनुसार पागल व्यक्ति पर न तो मार का असर होता है और न ही कड़वी बातों का, इसलिए ऐसे व्यक्ति से दूर रहने में ही भलाई होती है।


विदुर के अनुसार वे लोग जो बेहद मेहनत करते हैं और अपने कठोर परिश्रम के बाद थक जाते हैं, ऐसे लोगों से भी दूरी बनानी चाहिए। इसके पीछे विदुर ने कोई नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक प्रभाव की बात की है। दरअसल इतनी मेहनत के बाद व्यक्ति को आराम की आवश्यकता होती है, ऐसे में यदि कोई उन्हें परेशान करता है तो वे सही-गलत की पहचान किए बिना कुछ भी कर बैठता है जिसमें से सबसे सामान्य है उनका क्रोध। और उन्हें बाद में इस क्रोध का पश्चाताप भी नहीं होता।


अगर आपको कोई भूखा व्यक्ति दिखे तो उसे खाने के लिए कुछ दे सकते हैं किंतु उसे परेशान करने की भूल ना करें। यदि आप मदद नहीं कर सकते तो ऐसे में उनसे दूरी ही बना लें अन्यथा आप उनके क्रोध का शिकार बनकर अपना ही नुकसान कर बैठेंगे।

Jyoti

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