Vastu Tips for Home Temple : घर के मंदिर में शिखर होने पर न करें ये गलती, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 01:06 PM (IST)

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Vastu Tips for Home Temple : वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में बना मंदिर न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र होता है, बल्कि यह परिवार की सुख-समृद्धि और मानसिक शांति को भी नियंत्रित करता है। अक्सर लोग मंदिर को भव्य बनाने के चक्कर में उसमें शिखर बनवा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के भीतर शिखर वाला मंदिर वास्तु की दृष्टि से एक संवेदनशील विषय है ? शास्त्रों के अनुसार, घर के मंदिर और सार्वजनिक मंदिर के नियम अलग-अलग होते हैं। यदि आपके घर के मंदिर पर शिखर है, तो आपको कुछ विशेष वास्तु उपायों का पालन करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के वास्तु दोष से बचा जा सके।

Vastu Tips for Home Temple

 शिखर की ऊंचाई और छत के बीच का अंतर
वास्तु का सबसे पहला नियम यह है कि मंदिर का शिखर घर की छत को नहीं छूना चाहिए। सुनिश्चित करें कि शिखर और कमरे की छत के बीच कम से कम 6 से 12 इंच का अंतर हो। यदि शिखर छत से सटा हुआ है, तो यह घर की प्रगति को बाधित कर सकता है। ऐसी स्थिति में मंदिर को थोड़ा नीचे स्थापित करें।

कलश और ध्वजा का महत्व
शिखर के ऊपर अक्सर कलश या ध्वजा लगाई जाती है। घर के मंदिर के लिए कलश का होना शुभ है लेकिन ध्वजा लगाने से बचना चाहिए। शिखर पर एक छोटा तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें। यह सकारात्मक ऊर्जा को फिल्टर करके घर में फैलाता है। ध्यान रहे कि कलश टूटा हुआ या खंडित न हो।

मंदिर की दिशा का सही चयन
शिखर वाले मंदिर के लिए दिशा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। मंदिर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। यदि शिखर वाला मंदिर दक्षिण या पश्चिम दिशा में है, तो यह गंभीर वास्तु दोष पैदा कर सकता है। यदि दिशा बदलना संभव न हो, तो मंदिर के पास एक तांबे का पिरामिड रखें।

Vastu Tips for Home Temple

मूर्ति की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा
सार्वजनिक मंदिरों में बड़ी मूर्तियां और शिखर होते हैं जहां 'प्राण प्रतिष्ठा' अनिवार्य है। घर में शिखर वाले मंदिर में कभी भी 6 इंच से बड़ी मूर्ति न रखें। छोटी और सौम्य दिखने वाली मूर्तियां रखें। बड़ी मूर्तियां और ऊंचा शिखर मिलकर भारी ऊर्जा उत्पन्न करते हैं जिसे संभालना एक गृहस्थ के लिए कठिन हो सकता है।

शिखर की सफाई और रख-रखाव
वास्तु दोष तब अधिक बढ़ जाता है जब मंदिर के ऊपरी हिस्से या शिखर पर धूल जमने लगती है या मकड़ी के जाले लग जाते हैं। हर शनिवार या विशेष पर्व पर शिखर की सफाई अवश्य करें। शिखर के आसपास कबाड़ या फालतू सामान जमा न होने दें।

प्रकाश और रंग का समन्वय
शिखर वाले मंदिर में रंगों का चुनाव वास्तु दोष को कम कर सकता है। मंदिर का रंग हल्का पीला, क्रीम या सफेद रखें। गहरे रंगों से बचें। शिखर के पास एक छोटा जीरो-वाट का बल्ब (पीला या सफेद) हमेशा जलता रहे, तो यह नकारात्मकता को दूर रखता है।

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Content Editor

Prachi Sharma

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