Magh Maas- 10 दिन के गंगा स्नान से आप भी हो सकते हैं पाप मुक्त

2020-01-11T16:19:04.9

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अपनी वेबसाइट के जरिए हम आपको ये तो बता ही चुके हैं आज से यानि 11 जनवरी, 2020 दिन शनिवार से हिंदू धर्म के 11 वें महीने माघ माह की शुरूआत हो चुकी है। इस महीने को लेकर हिंदू धर्म में कई तरह के मान्यताएं प्रचलित हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि गंगा स्नान को समर्पित माघ मास से संबंधित पौराणिक कथा। तो आइए जानते हैं कि माघ महीने की कथा-
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पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा के तट पर सुव्रत नामक एक ब्राह्मण रहते थे। ऐसा कहा जाता था कि वे समस्त वेद-वेदांगों, धर्मशास्त्रों व पुराणों के ज्ञाता थे। इतना ही नहीं बल्कि उन्हें अनेक देशों की भाषाएं व लिपियां का भी भरपूर ज्ञान था। मगर इतना ज्ञान होने के बाद विद्वान होने के बाद भी इन्होंने अपने ज्ञान का धर्म के कामों में उपयोग नहीं किया।

अपना सारा पूरा जीवन इन्होंने केवल धन कमाने में गवां दिया। जब सुव्रत बूढ़े हो गए तब उन्हें ज्ञात हुआ कि उन्होंने धन तो बहुत कमाया, लेकिन परलोक सुधारने के लिए कोई सत्कार्य नहीं किया। ये विचार कर अब वे पश्चाताप करने लगे।

कथाओं के मुताबिक उसी रात चोरों ने उनके धन को चुरा लिया, लेकिन सुव्रत को इसका कोई अधिक दु:ख नहीं हुआ क्योंकि वे तो परमात्मा को प्राप्त करने के लिए उपाय सोच रहे थे। तभी उन्हें एक श्लोक याद आया-
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माघे निमग्ना: सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।

अब सुव्रत को अपने उद्धार का मूल मंत्र मिल चुका था। जिसके बाद सुव्रत ने माघ स्नान का संकल्प लिया और नौ दिनों तक प्रात: नर्मदा के जल में स्नान किया। दसवें दिन स्नान के उपरांत उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।

सुव्रत को अपने उद्धार का मूल मंत्र मिल गया। सुव्रत ने माघ स्नान का संकल्प लिया और नौ दिनों तक प्रात: नर्मदा के जल में स्नान किया। दसवें दिन स्नान के उपरांत उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।

इस माह का महत्व इस बात से पता चलता है कि सुव्रत ने जीवन भर कोई अच्छा काम नहीं किया था, परंतु माघ मास में स्नान करके उन्हें पश्चाताप किया जिसके बाद उनका मन निर्मल हो चुका था। कथाओं की मानें तो जब सुव्रत ने अपने प्राण त्यागे तो उन्हें लिवाने के लिए स्वर्गलोक से दिव्य विमान आया था।
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Jyoti

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