Sree Vinayaka Temple Sarojini Nagar: राजधानी का आस्था केंद्र सरोजिनी नगर श्री विनायक मंदिर, जानिए 1950 के दशक से लेकर पीएम मोदी के माथा टेकने तक का ऐतिहासिक सफर
punjabkesari.in Wednesday, Oct 07, 2026 - 03:18 PM (IST)
Sree Vinayaka Temple Sarojini Nagar Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली के सरोजिनी नगर (तत्कालीन विनय नगर) में स्थित श्री विनायक मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा केंद्र है। गणेश जी का ये मंदिर न केवल दिल्ली में बसे दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए बल्कि देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। हाल ही में अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर में प्रणाम किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी करी। जहां उन्होंने देश की समृद्धि एवं जन-कल्याण का संकल्प दोहराया।
1950 के दशक में शुरू हुई स्थापना की यात्रा
दिल्ली में बसने वाले दक्षिण भारतीय समाज ने 1950 के दशक में महसूस किया कि राजधानी में उनकी अपनी पारंपरिक पद्धति शैली के अनुरुप पूजा करने हेतु कोई भी धार्मिक स्थान नहीं है। इस ओर अपने कदम बढ़ाते हुए स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं और नागरिकों ने एकजुट होकर 'श्री विनायक मंदिर समिति' का गठन किया। 16 अप्रैल 1953 को 'रजिस्ट्रार ऑफ़ सोसाइटीज़, दिल्ली' में पंजीकृत भी कराया गया।
दक्षिण भारत के शिल्पकारों की अद्भुत नक्काशी
भक्तों के सहयोग व चंदा इकट्ठा करके मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ हुआ। आरंभ काल में 'गर्भ-गृह' और उसके चारों ओर परिक्रमा हेतु 'प्राकारम' बनाया गया। कांची कामकोटि पीठम के जगद्गुरु पूज्य श्री परमाचार्य जी और श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु श्री शंकराचार्य स्वामी जी के आशीर्वाद से दक्षिण भारत के विशेष शिल्पकारों (स्थपतियों) द्वारा सिद्धि-बुद्धि समेत कर्पक विनायक की भव्य मूर्ति तराशी गई। 24 अगस्त 1961 को कुंभाभिषेकम के साथ मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
हनुमान जी, नवग्रह और स्वयंभू ओंकारेश्वर शिवलिंग
समय के साथ-साथ श्रद्धालुओं का सहयोग बढ़ने से मंदिर परिसर का निरंतर विस्तार होता गया और अभी तक हो रहा है। मंदिर परिसर में श्री हनुमान और नवग्रहों की प्रतिमाएं स्थापित हुई तत्पश्चात जून 1983 में नर्मदा नदी से लाए गए स्वयंभू शिवलिंग 'ओंकारेश्वर' की स्थापना हुई, जिनके साथ उनका पूरा परिवार माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदीकेश्वर की नक्काशीदार मूर्तियां विराजित की गई।
आज इस मंदिर में पारंपरिक दक्षिण भारतीय पद्धति से दैनिक अभिषेकम, विशेष होमम (हवन) और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जो राजधानी के श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्म से जोड़े रखते हैं।
