Shani Trayodashi 2026: 27 जून को शनि त्रयोदशी का महासंयोग, इन 5 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, बस कर लें ये 5 अचूक उपाय

punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 11:38 AM (IST)

Shani Trayodashi 2026: हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और उनकी कृपा पाने के लिए शनि त्रयोदशी का दिन अत्यंत फलदायी माना गया है। 27 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है, जिससे शनि त्रयोदशी का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन उन जातकों के लिए वरदान के समान है, जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव से जूझ रहे हैं।

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इन 5 राशियों के लिए खास है यह दिन
वर्तमान ग्रह गणना के अनुसार, यह समय 5 विशेष राशियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है-

साढ़ेसाती का प्रभाव: वर्तमान में कुंभ, मीन और मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है।

ढैय्या का प्रभाव: धनु और सिंह राशि वाले जातक शनि की ढैय्या के प्रभाव में हैं। इन राशियों के जातकों को शनि के प्रकोप से बचने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

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शनि दोष से मुक्ति के महाउपाय
शनिदेव के कुप्रभाव से व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन जिन पर शनिदेव की कृपा बनती है उन्हें हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। व्यक्ति की कुंडली में साढ़ेसाती और ढय्या होने पर ये उसकी सफलता में बाधक बनती है। इनसे मुक्ति हेतु शनि त्रयोदशी पर कुछ सरल उपाय करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और बाधाओं से मुक्ति दिलाते हैं। जिससे व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलनी शुरु हो जाती है। यदि आप शनि दोषों से परेशान हैं, तो 27 जून को ये महाउपाय आपकी किस्मत बदल सकते हैं:

काले तिल, आटा और शक्कर लेकर इन तीनों चीजों को मिला लें। उसके बाद ये मिश्रण चींटियों को खाने के लिए डाल दें।  

शनि से संबंधित बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए काले घोड़े की नाल या नाव की कील से अंगूठी बनाकर अपनी मध्यमा उंगली में शनि त्रयोदशी के दिन सूर्यास्त के समय धारण करें।

शनिदोष से मुक्ति हेतु शनिदेव के इन 10 नामों का 108 बार जाप करें। कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद, पिप्पलाश्रय।

सामर्थ्य के अनुसार काले तिल, काला कपड़ा, कंबल, लोहे के बर्तन, उदड़ की दाल का दान करें। इससे शनिदेव प्रसन्न होकर शुभ फल प्रदान करते हैं।  

शनि त्रयोदशी पर 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी का पूजन करने से व्यक्ति को शनि दोषों का सामना नहीं करना पड़ता। बंदरों को गुड़ व चना खिलाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

शनिदेव की पूजा कर उन्हें नीले पुष्प अर्पित करें। इसके साथ ही शनि मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नमः का रुद्राक्ष की माला में जप करें। मंत्र की जप संख्या 108 होनी चाहिए। साढ़ेसाती और ढय्या से मुक्ति मिलती है।  

सुबह शीघ्र उठकर स्नादि कार्यों से निवृत होकर एक कटोरी में तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें। उसके बाद उस तेल को किसी जरुरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भाग्य संबंधी बाधाएं भी दूर होती हैं।  

सुबह स्नान करने के बाद पीपल को जल अर्पित करें। इसके साथ ही सात परिक्रमा करें। सूर्यास्त के बाद सुनसान स्थान पर लगे पीपल के पास दीपक प्रज्वलित करें। यदि ऐसा न हो तो किसी मंदिर में लगे पीपल के पास भी दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है।  

तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें काले तिल डालें। उसके बाद ये जल शिवलिंग पर अर्पित करें। ऐसा करने से सभी रोगों से मुक्ति मिलेगी और भोलेनाथ की कृपा से आर्थिक तंगी दूर होगी।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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