Ramayana Mystery : क्या हनुमान जी के भी थे भाई ? जानें क्यों रामचरितमानस में नहीं मिलता उनका जिक्र !
punjabkesari.in Saturday, Mar 14, 2026 - 01:48 PM (IST)
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Ramayana Mystery : भगवान हनुमान, जिन्हें हम संकटमोचन, बजरंगबली और पवनपुत्र जैसे अनगिनत नामों से पूजते हैं, उनकी महिमा का वर्णन रामायण और रामचरितमानस के हर पन्ने पर मिलता है। प्रभु श्री राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति अद्वितीय है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी के पारिवारिक जीवन से जुड़े कुछ ऐसे रोचक तथ्य भी हैं, जो सामान्यतः लोगों को कम ही पता होते हैं?
हनुमान जी का जन्म वानर राज केसरी और माता अंजना के घर हुआ था। उनके जन्म के पीछे गहरी आध्यात्मिक शक्तियां थीं। उन्हें भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार माना जाता है। मान्यता है कि वायु देव के माध्यम से ही भगवान शिव का अंश माता अंजना के गर्भ तक पहुँचा, इसलिए उन्हें 'पवनपुत्र' कहा जाता है। जन्म से ही हनुमान जी के पास असीमित शक्तियां, प्रखर बुद्धि और साहस था, जिसका परिचय उन्होंने बचपन में ही दे दिया था।

अक्सर यह माना जाता है कि हनुमान जी अपने माता-पिता की अकेली संतान थे, लेकिन ब्रह्मांड पुराण जैसे ग्रंथों में एक अलग जानकारी मिलती है। इसके अनुसार, हनुमान जी कुल छह भाई थे, जिनमें वे सबसे बड़े थे। मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान नाम के उनके पांच छोटे भाई थे। यह बताया गया है कि जहाँ हनुमान जी ने आजीवन बाल ब्रह्मचारी रहने का संकल्प लिया और अपना पूरा जीवन श्री राम की सेवा में समर्पित कर दिया, वहीं उनके अन्य पांचों भाइयों का जीवन एक सामान्य गृहस्थ की तरह था और उनके अपने परिवार भी थे।

अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि हनुमान जी के भाई थे, तो रामचरितमानस में उनका वर्णन क्यों नहीं मिलता? इसका मुख्य कारण इस महान ग्रंथ का उद्देश्य है। रामचरितमानस का केंद्र बिंदु भगवान श्री राम की जीवन लीला और उनके आदर्शों को स्थापित करना था। गोस्वामी तुलसीदास जी ने केवल उन्हीं पात्रों और प्रसंगों को विस्तार दिया जो राम कथा को आगे बढ़ाने या भक्ति मार्ग को समझाने में सहायक थे। चूँकि हनुमान जी के भाइयों का राम कथा या रावण वध में कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं था, इसलिए उनके वंश का वर्णन वहां नहीं मिलता।
अंततः, हनुमान जी का व्यक्तित्व केवल एक पुत्र या भाई के सामाजिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उस अलौकिक शक्ति का प्रतीक हैं जो पूर्णतः ईश्वर को समर्पित है। पुराणों में उनके भाइयों का जिक्र यह दर्शाता है कि हनुमान जी का एक मानवीय पारिवारिक पक्ष भी था, जिसे उन्होंने अपनी भक्ति और लोक कल्याण के उद्देश्य के आगे गौण कर दिया था।

