Nature Therapy: मानसिक तनाव कम करती है सूर्योदय और सूर्यास्त देखने की आदत
punjabkesari.in Monday, Jul 06, 2026 - 01:00 PM (IST)
नई दिल्ली (इंट): दिनभर की भागदौड़ के बाद डूबते सूरज को निहारना केवल मन को सुकून देने वाला अनुभव नहीं है, बल्कि यह शरीर और मस्तिष्क के लिए भी बेहद लाभदायक साबित हो सकता है। हाल के वर्षों में हुए कई वैज्ञानिक अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि सूर्यास्त और सूर्योदय देखने की आदत मानसिक तनाव कम करने, याददाश्त मजबूत बनाने, नींद की गुणवत्ता सुधारने और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रकृति के इन दैनिक दृश्यों का असर केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर की जैविक घड़ी पर भी पड़ता है।

प्रकृति का अद्भुत दृश्य जगाता है भीतर के भाव
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सूर्यास्त देखते समय व्यक्ति के भीतर एक विशेष प्रकार का भाव पैदा होता है, जिसे ‘ऑ’ यानी विस्मय की भावना कहा जाता है। यह भावना इंसान को उसकी रोजमर्रा की चिंताओं से बाहर निकालकर वर्तमान क्षण में जीने के लिए प्रेरित करती है। इससे तनाव और नकारात्मक विचारों का प्रभाव कम होने लगता है।
तनाव और चिंता में मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि जब व्यक्ति प्रकृति के भव्य दृश्यों को देखता है तो उसका ध्यान अपनी समस्याओं से हटकर आसपास के वातावरण पर केंद्रित हो जाता है। इससे लगातार चलने वाली चिंता और मानसिक दबाव कम हो सकता है। नियमित रूप से ऐसे अनुभव मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक माने जा रहे हैं।

याददाश्त और एकाग्रता पर भी पड़ता है सकारात्मक असर
शोधकर्त्ताओं के अनुसार विस्मय से जुड़े अनुभव मस्तिष्क की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाते हैं। इसी कारण सूर्यास्त जैसे प्राकृतिक दृश्यों को देखने के बाद लोग नई जानकारियों को बेहतर तरीके से याद रख पाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रकृति के बीच समय बिताने से मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है।
अच्छी नींद का प्राकृतिक उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यास्त शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिद्म को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शाम के समय प्राकृतिक रोशनी धीरे-धीरे कम होने से शरीर को संकेत मिलता है कि अब आराम का समय है। इससे मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है, जो बेहतर और गहरी नींद में मदद करता है।

सूर्योदय भी देता है कई स्वास्थ्य लाभ
केवल सूर्यास्त ही नहीं, बल्कि सूर्योदय देखना भी शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। सुबह की प्राकृतिक धूप शरीर को जागने का संकेत देती है, जिससे ऊर्जा बढ़ती है, मूड बेहतर होता है और शरीर की जैविक घड़ी सही तरीके से काम करती है। इससे पूरे दिन सक्रियता बनी रहती है।
कृत्रिम रोशनी बिगाड़ रही है प्राकृतिक संतुलन
विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग शरीर के प्राकृतिक प्रकाश चक्र को प्रभावित करता है। इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और तनाव, अवसाद तथा अन्य मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सुबह और शाम प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में रहना फायदेमंद माना जाता है।
दयालु और सकारात्मक बनाता है प्रकृति का साथ
अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि प्रकृति के मनमोहक दृश्यों का नियमित अनुभव लोगों में सहयोग, संवेदनशीलता और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देता है। सूर्यास्त देखने वाले लोग दूसरों की मदद करने और सामाजिक रूप से अधिक जुड़ाव महसूस करने की प्रवृत्ति दिखाते हैं।
एल.ई.डी. तकनीक भी बन सकती है विकल्प
वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन लोगों को नियमित रूप से सूर्योदय या सूर्यास्त देखने का अवसर नहीं मिलता, उनके लिए ऐसी एल.ई.डी. लाइट्स विकसित की जा रही हैं जो प्राकृतिक रोशनी के रंगों की नकल करती हैं। शुरुआती शोध में इनके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं, हालांकि प्राकृतिक रोशनी का विकल्प अभी भी सबसे प्रभावी माना जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संभव हो तो रोजाना कुछ मिनट सूर्योदय या सूर्यास्त के समय खुले वातावरण में बिताएं। पार्क, समुद्र तट, पहाड़ी क्षेत्र या किसी खुले स्थान पर प्रकृति के इन दृश्यों का आनंद लेने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों
को दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं।
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