Muni Tarun Sagar: मुनि तरुण सागर के कड़वे प्रवचन, जीवन की कड़वी सच्चाइयां और सफलता के मंत्र
punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 11:18 AM (IST)
Muni Tarun Sagar: मुनि तरुण सागर के 'कड़वे प्रवचन' के माध्यम से जानें कि क्यों हमें अपने माता-पिता की जरूरत नहीं बल्कि उनकी जरूरत बनना चाहिए। साथ ही समझें 'पास' और 'साथ' का वह अंतर जो मृत्यु के बाद भी साथ रहता है।
मां-बाप की जरूरत
पति-पत्नी शहर में रहते थे। दोनों नौकरी करते थे। उनके संतान पैदा हुई। अब समस्या यह थी कि उसे संभाले कौन?
पत्नी बोली : एक आया रख लेते हैं। पति बोला : भरोसेमंद नौकर ठीक रहेगा।
अंतत: तय हुआ कि गांव से मां-बाप को शहर बुला लिया जाए।
हमें मां-बाप की जरूरत नहीं है, बल्कि अपनी जरूरतों की वजह से मां-बाप की जरूरत है।
श्मशान के आगे
उन्हें अपनी जरूरत न बनाएं, मां-बाप की जरूरत बनिए। रात जब आप सबसे ‘गुड नाइट’ कर लो और सिर तकिए पर आ जाए तो मुनि तरुण सागर के ‘कड़वे प्रचवन’ का एक वक्तव्य दोहरा लेना कि तुम्हारे ‘पास’ क्या है, यह महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि तुम्हारे ‘साथ’ क्या है, यह महत्वपूर्ण है। पास के मायने वह जो श्मशान तक जाए और साथ के मायने वह जो श्मशान के आगे भी साथ जाए।
असम्भव कुछ नहीं
अंग्रेजी का एक शब्द है IMPOSSIBLE जिसका अर्थ है कि मैं नहीं कर सकता। मतलब हारने से पहले ही हार मान लेना। आम लोगों की भी कुछ ऐसी ही धारणा है। मेरा मानना है कि IMPOSSIBLE शब्द में से IM शब्द हटाने पर बचता है POSSIBLE जिसका अर्थ है मैं कर सकता हूं। नामुमकिन कुछ भी नहीं है। दूरी तभी तक है जब तक कि आपने चलना शुरू नहीं किया और रात तभी तक है जब तक कि आप सोए हुए हैं।