Mundan Sanskar : क्यों करवाया जाता है बच्चों का मुंडन संस्कार, जानिए इससे जुड़ी मान्यताओं का रोचक सच

punjabkesari.in Monday, Jun 15, 2026 - 01:40 PM (IST)

Mundan Sanskar : हिंदू धर्म में 16 संस्कारों को बहुत अहम माना गया है। मनुष्य जन्म लेकर मरने तक कई तरह के संस्कार व रीति रिवाज़ों से गुज़रता है। ये संस्कार कुल 16 तरह के होते है इसलिए इन्हें 16 संस्कार कहा जाता है। बता दें कि इन 16 संस्कारों का अपना एक अलग महत्व होता है। ये 16 संस्कार गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक किए जाते हैं। ऐसे में इन 16 संस्कारों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार की बात करें तो वे है चूड़ाकर्म संस्कार जिसे मुंडन भी कहा जाता है। इस संस्कार के दौरान बच्चे के बालों को उतरवाना अर्थाव मुंडवा देने की प्रथा होती है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर क्यों हिंदू धर्म में बच्चों का मुंडन किया जाता है। तो आइए जानते हैं 16 संस्कारों में से एक मुंडन संस्कार के महत्व के बारे में-

Mundan Sanskar

हिंदू धर्म में मुंडन की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है और मुंडन हमेशा किसी पवित्र व धार्मिक स्थान पर ही किए जाते हैं। मुंडन को लेकर कुछ मान्यताए प्रचलित है जिनके अनुसार मुंडन कराना अनिवार्य होता है। मान्यताओं के अनुसार, माता के गर्भ से जन्म के बाद बच्चे के सिर पर कुछ बाल होते है जिन्हें अपवित्र व अशुद्ध माना जाता है। ऐसे में जब किसी बच्चे के मुंडन करवाए जाए तो माना जाता है कि इससे बच्चा पवित्र होता है और उसके पूर्व जन्म के किए गए पापों और शापों का नाश होता है। इसके अलावा हिंदू धर्म पुराणों की मानें तो गर्भावस्था के समय की अशुद्धियों को दूर करने के लिए और बच्चें में तेज और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी मुंडन संस्कार किए जाते है साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इससे बच्चा दीर्घायु होता है।

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इसके अलावा बच्चे के बाल उतरवाने के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं। ऐसा मानना है कि जब बच्चा जन्म लेता है तब उसके बालों में कई तरह के बैक्टीरिया और कीटाणु होते है जिसकी वजह से उन्हें हटाना ज़रुरी होता है। इसके अलावा बच्चे के सिर की त्वचा में भी गंदगी होती है जिसे सही तरह से साफ करने के लिए भी बालों को हटाना ज़रुरी होता है। बाकी के शुभ कार्यों की तरह ही बच्चे के मुंडन करवाने के लिए भी शुभ मुहूर्त और तिथि देखना अनिवार्य मानी जाती है। इसके अलावा बच्चे के जन्म लेने के 1 वर्ष के अंत या 3 वर्ष, 5 या 7वे वर्ष में मुंडन करवाने की प्रथा है। इसके अलावा कुछ लोग बच्चे के सवा माह के पूरे होते ही धार्मिक स्थान पर जाकर मुंडन करवा देते है। हिंदू पंचांग के अनुसार बच्चे के मुंडन करवाने के लिए जो सही तिथि मानी जाती है वे है द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी। बता दे कि मुंडन के लिए ये सभी तिथियां शुभ मानी जाती है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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