Masik Shivratri 2024: आज इस मुहूर्त में करें महादेव की पूजा, मिट जाएंगे जीवन के सारे दुःख

Sunday, Apr 07, 2024 - 09:58 AM (IST)

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Masik Shivratri 2024: पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान की पूजा करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। चैत्र माह में 7 अप्रैल यानी आज ये व्रत रखा जा रहा है। मासिक शिवरात्रि का यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है।  इस दिन महादेव के साथ मां आदिशक्ति की पूजा की जाती है। व्यक्ति के जीवन के सारे दिन इस दिन की पूजा के बाद खत्म हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का प्रवेश होता है। इसी के साथ आपको बता दें कि आज के दिन एक ऐसे शुभ का निर्माण होने जा रहा ही। जिसमें पूजा करने से पूजा का दोगुना फल प्राप्त होगा। तो चलिए सबसे पहले जानते हैं मासिक शिवरात्रि की पूजा का मुहूर्त और विधि।


Monthly Shivaratri Auspicious Yoga मासिक शिवरात्रि शुभ योग:
पंचांग के अनुसार आज के दिन बहुत से शुभ योगों का निर्माण होने जा रहा है। आज सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से व्यक्ति का जीवन खुशहाली से भरपूर रहता है। चैत्र शिवरात्रि पर भद्रा और पंचक भी है।

7 अप्रैल को दोपहर के 12 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 8 अप्रैल की सुबह 6 बजकर 3 मिनट तक  का समय सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा।  ब्रह्म योग सुबह से शुरू होकर रात के 10 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।  इसके बाद इंद्र योग की शुरुआत होगी।

Monthly Shivratri 2024 मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 7 अप्रैल 2024 को सुबह 6 बजकर 53 मिनट से चतुर्दशी तिथि की शुरुआत हो रही है और अगले दिन यानी 8 अप्रैल को देर रात 3 बजकर 21 मिनट पर इसका समापन होगा। शिवरात्रि की पूजा रात में की जाती है इस वजह से 7 अप्रैल यानी आज ये व्रत रखा जाएगा।



Monthly shivratri Pooja Vidhi मासिक शिवरात्रि पूजन विधि
मान्यताओं के अनुसार आज के दिन ही भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। इस वजह से आज के दिन को बेहद ही खास माना जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से सारे दुःख कट जाते हैं। मासिक शिवरात्रि का पूजन रात के समय किया जाता है। चारों पहर शिवलिंग का दूध, दही के साथ उनका अभिषेक करें।  इस दिन की पूजा में बेलपत्र, फल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, इत्र इत्यादि अवश्य शामिल करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और उसके बाद आरती के साथ पूजा का समापन कर दें।

श‍िव नामावली मंत्र

।। श्री शिवाय नम:।।
।। श्री शंकराय नम:।।
।। श्री महेश्वराय नम:।।
।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
।। श्री रुद्राय नम:।।
।। ओम पार्वतीपतये नम:।।
।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।

Prachi Sharma

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