Margashirsha Month 2025: आज से शुरू हुआ मार्गशीर्ष का महीना, ये उपाय आपके जीवन में खोलेंगे नए द्वार
punjabkesari.in Thursday, Nov 06, 2025 - 06:00 AM (IST)
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Margashirsha Month 2025: हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष मास का महत्व बहुत अधिक है। यह महीना भगवान विष्णु और उनके प्रिय स्वरूप भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे माह किए गए धार्मिक कार्य, स्नान और दान व्यक्ति को अक्षय पुण्य देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। माना जाता है कि मार्गशीर्ष मास में कुछ विशेष कार्यों को नियमपूर्वक करने से व्यक्ति की किस्मत चमक उठती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मार्गशीर्ष मास में आपको अवश्य करने चाहिए ये 5 काम:
पवित्र नदियों में स्नान-
मार्गशीर्ष मास में पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष विधान है। इसे मार्गशीर्ष स्नान कहा जाता है। मान्यता है कि इस मास में नदी स्नान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान से पूर्व तुलसी की जड़ की मिट्टी का लेप लगाने का भी महत्व बताया गया है।
शंख की पूजा और अभिषेक
मार्गशीर्ष मास में शंख पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि शंख भगवान विष्णु को अति प्रिय है और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इस माह नियमित रूप से शंख की पूजा करें। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। मार्गशीर्ष मास में भगवान श्री कृष्ण का शंख में दूध, शहद और गंगाजल भरकर अभिषेक अवश्य करना चाहिए। स्कंदपुराण के अनुसार, ऐसा करने से बड़े से बड़ा पाप भी कट जाता है।

तुलसी की आराधना और भोग
भगवान श्री कृष्ण को तुलसी सबसे अधिक प्रिय है। तुलसी के बिना उनका कोई भी भोग पूर्ण नहीं माना जाता है। इस महीने में तुलसी की मंजरी सहित भगवान की आराधना करने वाले साधक सौ जन्मों तक मोक्ष के भागी होते हैं। शाम के समय तुलसी माता के पास घी का दीपक जलाना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से भाग्य चमकता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
भागवत गीता और विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ
मार्गशीर्ष मास को ज्ञान और भक्ति का महीना माना जाता है। इस महीने में श्रीमद्भागवत गीता का नित्य पाठ करना अत्यंत शुभ होता है। गीता का ज्ञान श्री कृष्ण का सार है और इसे पढ़ने से व्यक्ति को जीवन की सही दिशा मिलती है। नियमित रूप से विष्णुसहस्त्रनाम और गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करने से श्री हरि विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

