Maa Ugrtara Temple: देश में अनोखा है मां उग्रतारा का दरबार, 16 दिन चलती है नवरात्रि, जानें दाल-चावल और पान से जुड़ी परंपरा
punjabkesari.in Friday, Oct 09, 2026 - 12:17 PM (IST)
Maa Ugratara Temple 16 Days Navratri : लातेहार झारखंड के चंदवा प्रखंड स्थित मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर में नवरात्रि का पर्व अपने अलग ही अंदाज में मनाया जाता है। यहां सामान्य रूप से मनाई जाने वाली नौ दिवसीय नवरात्रि के बजाय विशेष परंपरा के अनुसार 16 दिनों तक देवी की आराधना की जाती है। इस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगती है और पूरा परिसर भक्ति के रंग में रंग जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार यहां देवी मां की पूजा एक खास विधि और परंपराओं के साथ की जाती है। नवरात्रि के दिनों में माता को अलग-अलग प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। इनमें दाल और चावल का भोग भी विशेष महत्व रखता है। भक्त श्रद्धा के साथ मां को प्रसाद चढ़ाते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।
16 दिनों तक चलती है विशेष पूजा
मां उग्रतारा मंदिर में नवरात्रि की अवधि अन्य देवी मंदिरों से अलग मानी जाती है। यहां 16 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विशेष सजावट भी की जाती है, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो जाता है।
पान के पत्ते से होती है विदाई
इस मंदिर की सबसे अलग परंपराओं में देवी को पान के पत्ते से विदाई देने की रस्म भी शामिल है। नवरात्रि के समापन पर पान के पत्ते का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। स्थानीय श्रद्धालु इसे माता के प्रति सम्मान और पारंपरिक आस्था से जोड़कर देखते हैं। कहा जाता है कि मां उग्रतारा की आराधना से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और उनकी मनोकामनाएं पूरी होने की धार्मिक मान्यता है। यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
तांत्रिक परंपरा से भी जुड़ा है मंदिर
मां उग्रतारा मंदिर को शक्तिपीठ परंपरा और तांत्रिक साधना से भी जोड़कर देखा जाता है। मंदिर में देवी की पूजा का स्वरूप अन्य शक्तिस्थलों से कुछ अलग है। यहां धार्मिक अनुष्ठानों और प्राचीन परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है। 16 दिनों तक चलने वाली इस अनूठी नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्ति, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है। दाल-चावल के भोग से लेकर पान के पत्ते से विदाई तक, यहां की हर रस्म अपने आप में खास है और श्रद्धालुओं के लिए गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
