Lunar Eclipse 2026 impact on Raksha Bandhan: रक्षाबंधन 2026 पर चंद्र ग्रहण का साया! क्या बहनों को राखी बांधने में होगी परेशानी? जानें सूतक काल

punjabkesari.in Tuesday, Jun 09, 2026 - 12:00 PM (IST)

Lunar Eclipse 2026 impact on Raksha Bandhan: वर्ष 2026 में 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व है। जो हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व शुभता नहीं बल्कि अपने साथ लेकर आ रहा है ग्रहण का काला साया। इस रोज वर्ष 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जब भी कोई कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में बढ़ौतरी होती है। भाई-बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के लिए राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। ग्रहण के कारण क्या राखी बांधने के शुभ मुहूर्त में आएगी कोई बाधा?  सूतक काल मान्य होगा या नहीं? जानें, ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान क्या कहता है इस बारे में-

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28 अगस्त को लगेगा 'ब्लड मून'
28 अगस्त साल 2026 खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से एक बड़ी घटना का गवाह बनने जा रहा है। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा। जिससे वह गहरा लाल दिखाई देगा। इसे वैज्ञानिक भाषा में 'ब्लड मून' कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है।

चंद्र ग्रहण की तारीख और समय
2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 27 और 28 अगस्त की रात को लगेगा। वैश्विक समय के अनुसार ग्रहण 01:23 पर शुरू होगा। इसका सबसे शानदार दृश्य 04:41 पर दिखेगा। ग्रहण की समाप्ति 07:02 पर होगी। भारत में समयानुसार ग्रहण सुबह 06:53 से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा।

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भारत में नहीं दिखाई देगा
हालांकि यह चंद्र ग्रहण आकाश में एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा, लेकिन भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। इसका कारण यह है कि ग्रहण के समय भारत में दिन होगा और सूरज की रोशनी चांद को ढक देगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल भी लागू नहीं होता।

ग्रहण का विशेष दृश्य
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण है, लेकिन दिखने में यह लगभग पूर्ण ग्रहण जैसा लगेगा। पृथ्वी की छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से को ढक देगी। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग में चमकते हुए दिखाई देगा, जो खगोल प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक होगा।

किन देशों में दिखाई देगा
इस चंद्र ग्रहण को उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका के पश्चिमी हिस्से और पूर्वी प्रशांत महासागर व अटलांटिक क्षेत्र में देखा जा सकेगा। वहां रहने वाले लोग इसे सीधे आकाश में देख सकेंगे। यह चंद्र ग्रहण खगोल विज्ञान और प्राकृतिक सुंदरता का संगम है, और दुनिया भर के खगोलविदों के लिए यह साल का सबसे रोमांचक खगोलीय दृश्य माना जा रहा है।

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सूतक काल और राखी का मुहूर्त
धार्मिक नियमों के अनुसार, सूतक काल केवल वहीं प्रभावी होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि यह ग्रहण प्रशांत महासागर, अटलांटिक, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में ही नजर आएगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
इसका अर्थ यह है कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। बहनें हमेशा की तरह शुभ मुहूर्त देखकर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।

इन राशियों पर पड़ेगा असर
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने जा रहा है। इस कारण कुंभ राशि के जातकों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, त्योहार की पवित्रता और पूजा-पाठ में इस ग्रहण से कोई रुकावट नहीं आएगी।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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