श्रीकृष्ण को क्यों कहा जाता है ‘केशव’? जानें इस नाम के पीछे छिपी अद्भुत पौराणिक कथा
punjabkesari.in Sunday, Aug 30, 2026 - 12:07 PM (IST)
Krishna ji ko keshav kyu kaha jata hai : भगवान श्रीकृष्ण को जगत में कई नामों से जाना जाता है। मुरलीधर, गोविंद, गोपाल, माधव और कन्हैया आदि ये सभी नाम श्रीकृष्ण को ही समर्पित हैं। श्रीकृष्ण के हर नाम के पीछे कोई न कोई विशेष अर्थ, प्रसंग या पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। यही वजह है कि भगवान के अलग-अलग नाम उनके व्यक्तित्व और उनकी लीलाओं के अलग-अलग रूपों को दर्शाते हैं। कहीं वे नटखट बाल गोपाल के रूप में दिखाई देते हैं, तो कहीं अधर्म का नाश करने वाले भगवान के रूप में। कहीं वे अपने भक्तों के पालनहार हैं, तो कहीं अपने शत्रुओं का अंत करने वाले योद्धा के रूप में नजर आते हैं। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम ऐसा भी है, जिसे आपने कई बार सुना होगा, लेकिन शायद ही कभी सोचा हो कि आखिर उन्हें यह नाम मिला कैसे। हम बात कर रहे हैं भगवान श्रीकृष्ण के प्रसिद्ध नाम ‘केशव’ की। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों के लिए ‘केशव’ नाम का प्रयोग धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के केशव कहलाने से जुड़ी एक बेहद ही खास कथा का वर्णन मिलता है। तो आइए जानते हैं श्रीकृष्ण के केशव कहलाने से जुड़ी एक कथा के बारे में-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह प्रसंग उस समय से जुड़ा है जब श्रीकृष्ण को मारने के लिए उनके मामा कंस ने कई दैत्यों को भेजा। ये सभी राक्षस बेहद शक्तिशाली थे, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के सामने कोई नहीं टिक सका। इन्हीं दैत्यों में एक असुर था जिसका नाम केशी था। केशी एक बहुत ही शक्तिशाली, भयानक और विशालकाय घोड़ा था। केशी के ब्रज में आने से सब तरफ भय का माहौल छा गया। कथाओं में उसे इतना शक्तिशाली बताया गया है कि केवल उसके भागने मात्र से सारी धरती कांप उठती थी, जिसके कारण सारे ब्रजवासी भयभीत हो गए थे।
केशी का ब्रज में आने का मुख्य कारण कंस के काल श्रीकृष्ण का वध करना था। केशी ने जब भगवान श्रीकृष्ण को सामने देखा तो वह क्रोध से भर उठा और उनको मारने के लिए उनकी तरफ दौड़ा। केशी ने अपने पैरों से श्रीकृष्ण को कुचलने का प्रयास किया, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसके पैरों को पकड़ लिया और उसे दूर फेंक दिया और बड़ी ही सहजता से उसके वार को विफल कर दिया। कथा के अनुसार इसके बाद केशी और श्रीकृष्ण के मध्य काफी देर कर घमासान युद्ध चलता रहा।
युद्ध के दौरान केशी ने अपना विशालकायी मुख खोला और श्रीकृष्ण को निगलने के लिए उनकी ओर बड़ा। तभी भगवान श्रीकृष्ण ने उसके मुख में बाया हांथ डाल दिया। देखते ही देखते प्रभु श्रीकृष्ण का हाथ इतना भारी और विशाल होता चला गया कि केशी के सांस लेने में दिक्कत होने लगी। अंततः वह असुर श्रीकृष्ण की शक्ति के सामने टिक नहीं सका और उसके प्राण निकल गए। माना जाता है कि केशी नामक असुर का वध करने के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण को ‘केशव’ नाम से भी जाना जाने लगा।
