प्रतीक सागर महाराज का विशेष संदेश- नशा अभिशाप, वैस्टर्न कल्चर से खतरे में भारतीय संस्कृति
punjabkesari.in Saturday, Jun 13, 2026 - 01:13 PM (IST)
Krantiveer Muni Prateek Sagar Maharaj: जीवन में महात्माओं का सान्निध्य होना बहुत जरूरी होता है। शून्य से जो प्रगति की ओर ले जाए उसमें संत और महात्माओं का एक अहम योगदान होता है। क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर महाराज ने एक विशेष बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला। पेश हैं उसी बातचीत के कुछ अंश :
युवा पीढ़ी पर सोशल मीडिया के किस तरह के प्रभाव पड़ रहे हैं?
-आज की पीढ़ी को वैचारिक क्रांति के सूत्रपात की जरूरत है, जिससे उनके विचारों में परिवर्तन लाया जा सके। युवाओं पर सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा प्रभाव है। आज के युवाओं को नैतिकता से जोड़ने की जरूरत है। जो व्यक्ति नैतिकता से जुड़ जाता है, वह परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदार हो जाता है।
आज के माहौल में चरित्रवान मनुष्य बनने के लिए क्या करना पड़ेगा?
-अच्छा चरित्रवान मनुष्य बनने के लिए अच्छी सोच की जरूरत है। जो अच्छा सुनता है वह अच्छा सोचता है और जो अच्छा सोचता है वह अच्छा बोलता है और जो अच्छा बोलता है वह अच्छा करता भी है। सबसे पहले युवाओं को अच्छा सुनने के लिए प्रेरित करना पड़ेगा।
वस्त्र मर्यादा हैं तो उनका त्याग क्यों?
-वस्त्रों की जरूरत उन्हें होती है जिनके मन में विकार होता है। आज जैन परम्परा में दिगंबर जैन मुनि वस्त्र नहीं पहनते क्योंकि उनके मन में किसी भी तरह की कोई भी वासना नहीं है। जब व्यक्ति सृष्टि में आता है तो वह नग्न होकर के आता है और जब जाता है, तब भी नग्न होता है। आज दिगंबर जैन मुनि बनने के लिए पांचों इंद्रियों को अपने वश में करना होता है। वही इस दिगंबर मुद्रा को धारण करता है।
युवाओं में वैस्टर्न कल्चर के प्रति ज्यादा झुकाव देखने को क्यों मिल रहा है?
-देखिए पाश्चात्य संस्कृति से घर के आदर्शों के द्वारा ही दूरी बनाई जा सकती है। आजकल खान-पान अशुद्ध है और जिसका खान-पान अशुद्ध होता है उसकी सब चीजें अशुद्ध हो जाती हैं। नशा अभिशाप है। इसीलिए आजकल आहार शुद्धिकरण की जरूरत है। जो अध्यात्म की तरफ जाना चाहता है, उसे सबसे पहले अपने जीवन को साधारण बनाना पड़ेगा।
