Kajari Teej Vrat Katha: अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर के लिए जरूर पढ़ें कजरी तीज व्रत कथा
punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 01:09 PM (IST)
Kajari Teej Fasting Story: रक्षाबंधन के ठीक तीन दिन बाद देश के कई हिस्सों में कजरी तीज का पावन पर्व बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस तीज का विशेष स्थान है, जिसे सातुड़ी तीज और बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की मंगल कामना के लिए रखा जाता है। वहीं, अविवाहित युवतियां भी इस दिन एक सुयोग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए पूरी निष्ठा से इस व्रत का पालन करती हैं।
इन राज्यों में दिखती है विशेष धूम
यद्यपि कजरी तीज का त्यौहार भारत के लगभग हर हिस्से में मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में इस पर्व को लेकर महिलाओं में एक अलग ही उत्साह और अनूठी धूम देखने को मिलती है। इस पावन अवसर पर व्रत रखने वाली महिलाएं देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, कोई भी पूजा या व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक कि उसकी कथा न सुनी जाए। यदि आप भी अपने व्रत का पूरा फल प्राप्त करना चाहती हैं, तो पूजा के दौरान इस पौराणिक कथा को अवश्य पढ़ें।

Story of Kajri Teej कजरी तीज की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक गांव में एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे, जो बहुत गरीब थे। ब्राह्मण की पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा। व्रत की पूजा करने के लिए उसने अपनी पति से कहा कि वो उसके लिए चने का सत्तू लेकर आए। ये सुनकर पति बहुत हैरान-परेशान हो गया क्योंकि उसके पास सत्तू खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। बहुत देर सोचने के बाद उसने चोरी करने का विचार बनाया।

रात का समय था और ब्राह्मण चोरी करने निकल गया। वो एक साहूकार की दुकान में पहुंचा। चोरी करने के बाद वो जैसे ही बाहर निकलने लगा। साहूकार की नींद खुल गई और उसने ब्राह्मण को पकड़ लिया। उधर चांद निकल गया था ब्राह्मण की पत्नी बेसब्री से अपने पति के आने का इन्तजार कर रही थी। जब ब्राह्मण पकड़ा गया तो उसने साहूकार से बहुत मांफी मांगी और कहा कि वो कोई चोर नहीं है, मजबूरी की वजह से उसे चोरी करनी पड़ी। पहले उस साहूकार को ब्राह्मण की बात पर यकीन नहीं हुआ लेकिन जब उसने छान-बीन की तो सत्तू के अलावा ब्राह्मण के पास से कुछ नहीं मिला।
ब्राह्मण की सारी बातें सुनने के बाद साहूकार ने कहा कि वो उसे माफ कर देगा लेकिन एक शर्त पर। वो शर्त ये थी कि आज से वो उसकी पत्नी को अपनी धर्म बहन मानेगा। इन सारी बातों के बाद साहूकार ने बहुत सा सत्तू, गहने, मेहंदी और पैसे दे कर ब्राह्मण को प्रेम से विदा कर दिया।
जिस प्रकार उस ब्राह्मण के जीवन से दुःख चला गया। उसी तरह कजली तीज माता सब की मनोकामना को पूर्ण कर सुखी जीवन का आशीर्वाद आप सब पर बनाए रखें।

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