कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी का अद्भुत संयोग, दोनों व्रत रखने वाली महिलाएं जरूर जानें संकल्प और पारण का सही तरीका
punjabkesari.in Sunday, Aug 30, 2026 - 09:01 AM (IST)
Kajari Teej and Sankashti Chaturthi Fasting : भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि का एक साथ आना धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस साल कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी का एक दिन पड़ना महिलाओं के लिए दोहरा सौभाग्य लेकर आया है। जहां कजरी तीज का व्रत अखंड सोभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है, वहीं संकष्टी चतुर्थी का व्रत संतान के सुख-समृद्धि और परिवार के संकटों को दूर करने के लिए होता है। यदि आप भ इस शुभ संयोग में दोनों व्रत रख रही हैं, तो सही संकल्प और पारण का तरीका जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।
संयुक्त व्रत का संकल्प लेने का सही तरीका
सुबह सूरज उगने से पहले स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा जल, अक्षत औप फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
उसके बाद मन में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी का ध्यान करें और अपने मन में "हे भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी! आज मैं कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी का निर्जला या फलाहारी व्रत रखने का संकल्प लेती या लेता हूं। मेरे इस व्रत से मेरे पति को दीर्घायु, संतान को उत्तम स्वास्थ्य और परिवार को सभी संकटों से मुक्ति प्राप्त हो कहें।
संकल्प के बाद हाथ का जल और अक्षत पूजा स्थल के पास छोड़ दें।
पूजा का शुभ क्रम
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें दूर्वा, मोदक, हल्दी और लाल पुष्प अर्पित कर संकष्टी चतुर्थी की कथा सुनें।
इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें। कजरी तीज के लिए सत्तू का भोग लगाएं, सुहाग की सामग्री अर्पित करें और कजरी तीज की कथा सुनें।
रात में चंद्रोदय होने पर दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य के बिना दोनों ही व्रत अधूरे माने जाते हैं।
पारण करने का सही तरीका और नियम
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पारण का समय | पारण की सामग्री/तरीका | |
| कजरी तीज | चंद्र दर्शन और अर्घ्य के तुरंत बाद | पति के हाथों से जल ग्रहण करें और पूजा में चढ़ाया गया सत्तू खाकर व्रत खोलें। | |
| संकष्टी चतुर्थी | चंद्र अर्घ्य के बाद | श्री गणेश जी को चढ़ाया गया मोदक या फलाहार का प्रसाद ग्रहण करें। |
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