दुनिया में अच्छे लोगों की कोई कमी नहीं है, हम सब एक परिवार हैं- गुरुदेव श्री श्री रविशंकर
punjabkesari.in Saturday, Nov 07, 2026 - 12:00 PM (IST)
Happiness Festival Munich- म्यूनिख के ‘हैप्पीनेस फेस्टिवल’ में गुरुदेव ने हजारों लोगों को मानवता, प्रेम और एकता के सूत्र में बांधा, मानवीय जुड़ाव और सामूहिक आनंद का उत्सव अविस्मरणीय बन गया। 200 योग साधकों और 108 गिटारवादकों की सामूहिक प्रस्तुतियों ने बीएमडब्ल्यू पार्क को योग, संगीत, नृत्य, ध्यान और उल्लास के एक अद्भुत संगम में बदल दिया। यह आयोजन गुरुदेव के तनावमुक्त और आनंदमय विश्व के स्वप्न को साकार करता है ।
युद्धों, सामाजिक विभाजन, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी, बढ़ती हुई चुनौतियों और अनिश्चितता के गहराते वातावरण के बीच, वैश्विक आध्यात्मिक गुरु एवं मानवतावादी गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने म्यूनिख में आशा, सद्भाव और एकजुटता का एक प्रेरणादायी संदेश दिया। उनकी उपस्थिति में आयोजित यह संध्या सांस्कृतिक विविधता, सकारात्मक ऊर्जा, प्रार्थना और मानवीय एकात्मता का ऐसा उत्सव बन गई, जिसने एक अधिक सुखी और शांतिपूर्ण विश्व की सामूहिक आकांक्षा को स्वर दिया।
म्यूनिख के प्रतिष्ठित बीएमडब्ल्यू पार्क में आयोजित ‘हैप्पीनेस फेस्टिवल’ में हजारों लोगों को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा कि आज विश्व में दिखाई देने वाले संघर्षों की जड़ें वस्तुतः मनुष्य के मन में ही छिपी हैं। स्थायी शांति की स्थापना के लिए भय, तनाव और अलगाव की भावना को दूर करना आवश्यक है। शांति की यात्रा व्यक्ति के अंतर्मन से ही आरंभ होती है।
उन्होंने अत्यंत आश्वस्तिपूर्ण शब्दों में कहा, “हमें धैर्य बनाए रखना होगा। इस दुनिया में अच्छे लोगों की कोई कमी नहीं है। यहां शांति और प्रेम चाहने वाले असंख्य लोग हैं और हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं।”
यह संदेश वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आशा और विश्वास का संचार करने वाला था। आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने बीएमडब्ल्यू पार्क को सामूहिक आनंद और आत्मीयता के एक जीवंत केंद्र में परिवर्तित कर दिया। योग, ध्यान, संगीत, नृत्य और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आए। यह आयोजन इस बात का सशक्त स्मरण था कि भौगोलिक सीमाओं, सांस्कृतिक विविधताओं और वैचारिक मतभेदों से परे, समूची मानवता की मूल आकांक्षा एक ही है शांति, प्रसन्नता और अपनत्व का अनुभव।
हैप्पीनेस फेस्टिवल में उपस्थित एस.ई. बिशप मार्सेलो सांचेज़ सोरोंडो ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “प्रार्थना के माध्यम से हम युद्ध को जन्म देने वाली घृणा को भ्रातृत्वपूर्ण प्रेम में रूपांतरित कर सकते हैं। यह प्रेम संवाद, पारस्परिक समझ, संसाधनों के साझाकरण और शांति के रूप में अभिव्यक्त होता है।आइए, हम गुरुदेव श्री श्री रविशंकर और उनके संस्थान के कार्यों के माध्यम से वर्षों से प्राप्त अनेक आशीर्वादों के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।”
महोत्सव में एकता और सामूहिक सहभागिता का दर्शन अत्यंत मनोहारी ढंग से साकार हुआ। इस अवसर पर 200 कलाकारों ने मंच पर एक साथ समन्वित योग प्रस्तुति देकर अद्भुत दृश्य उपस्थित किया। हजारों लोगों ने इस सामूहिक ऊर्जा और एक लय में बंधे अनुभव का हिस्सा बनकर एकता की भावना को जीवंत किया।
मार्सेल वर्बे के नेतृत्व में 108 गिटारवादकों के ‘हैप्पीनेस गिटार एन्सेम्बल’ ने अपनी सामूहिक संगीत प्रस्तुति से वातावरण को संगीतमय बना दिया। संध्या का समापन विशाल मंत्र-संगीत समारोह और सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिसमें पूरा सभागार एक स्वर में गूंज उठा। हजारों कंठों से उठती एक साथ की स्वर-लहरियों ने मानो समूचे वातावरण को आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
संघर्षों के मूल कारणों पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा कि युद्ध और विभाजन अचानक उत्पन्न नहीं होते। उनका बीजारोपण पहले मनुष्य के मन में होता है, जहां तनाव, भय और दूसरों के प्रति विकृत धारणाएं धीरे-धीरे नकारात्मकता को जन्म देती हैं।
उन्होंने कहा, “दूसरों के प्रति नकारात्मकता अथवा भय सबसे पहले तनावग्रस्त मन में प्रवेश करता है और फिर संघर्ष, लालच, स्वार्थ तथा युद्ध के रूप में प्रकट होता है।”
गुरुदेव ने इस संदर्भ में मानवीय चेतना का विस्तार करने और जीवन को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि ध्यान मन को स्वस्थ, स्थिर, एकाग्र और प्रसन्न बनाए रखने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है। इससे व्यक्ति भय और असुरक्षा के वशीभूत होकर प्रतिक्रिया देने के स्थान पर आंतरिक शक्ति और विवेक के साथ परिस्थितियों का सामना कर पाता है।
गुरुदेव ने कहा, “थोड़ा-सा ज्ञान, कुछ श्वास संबंधी अभ्यास, ध्यान और योग, साथ ही अपनत्व की भावना तथा एक-दूसरे की सेवा करने की तत्परता। ये सभी गुण प्रत्येक मनुष्य के भीतर सहज रूप से विद्यमान हैं। इन गुणों को जागृत करके हम अपने जीवन में अपार सुख और संतोष ला सकते हैं तथा समाज को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं।”
म्यूनिख का यह हैप्पीनेस फेस्टिवल केवल एक सांस्कृतिक अथवा आध्यात्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाली उस सार्वभौमिक चेतना का उत्सव बनकर उभरा, जो हमें स्मरण कराती है कि हमारी विविधताएं भले ही अनेक हों, किंतु हमारा अस्तित्व एक ही मानवीय परिवार का हिस्सा है। प्रेम, प्रार्थना, ध्यान और सेवा के माध्यम से ही एक तनावमुक्त, हिंसामुक्त और आनंदमय विश्व की परिकल्पना साकार हो सकती है।
