गुरु अर्जन देव जी के नाना की भविष्यवाणी ने रचा मानवता के कल्याण का इतिहास, जो हर युग को देगी प्रेरणा
punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 09:41 AM (IST)
Compilation of Sri Guru Granth Sahib: पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी के सिख पंथ और समस्त मानवता पर किए गए उपकारों का वर्णन शब्दों में संभव नहीं है। उन्होंने ऐसे कार्य किए जो असाधारण, अद्वितीय और युगों तक प्रेरणा देने वाले हैं। उनकी राह चुनौतियों और विरोधों से भरी हुई थी, लेकिन उन्होंने हर कठिनाई का सामना करते हुए सिख पंथ को नई दिशा और मजबूत आधार प्रदान किया।

गुरु जी परमात्मा के सृजनात्मक गुण के साक्षात प्रतीक थे। उन्होंने ऐसे कार्य किए जिनकी तुलना संसार में किसी अन्य से नहीं की जा सकती। उन्होंने श्री हरिमंदिर साहिब का निर्माण करवाया, श्री गुरु ग्रंथ साहिब को स्वरूप प्रदान किया और धर्म की रक्षा के लिए शहादत का ऐसा इतिहास रचा, जिसका दूसरा उदाहरण विश्व में नहीं मिलता।

वह श्री गुरु रामदास जी के तीन पुत्रों में सबसे छोटे थे। बचपन से ही उनकी आध्यात्मिक प्रतिभा स्पष्ट होने लगी थी। उनके नाना, श्री गुरु अमरदास जी ने उनकी विलक्षणता को पहचानते हुए उन्हें ‘बाणी का बोहिता’ अर्थात् ‘ज्ञान का जहाज’ कहा था, जो लोगों को अज्ञान के सागर से पार लगाएगा।

11 वर्ष की आयु तक उनका पालन-पोषण गुरु अमरदास जी की देखरेख में हुआ। इसके बाद 7 वर्षों तक वह अपने पिता गुरु रामदास जी के संरक्षण में रहे। केवल 18 वर्ष की आयु में वह गुरुगद्दी पर विराजमान हुए। उनका व्यक्तित्व करुणा, प्रेम, विनम्रता और आध्यात्मिक तेज से परिपूर्ण था। जो भी उनकी शरण में आता, वह दया और प्रेम की वर्षा से अभिभूत हो जाता।
श्री गुरु अर्जन देव जी अत्यंत सहज और शांत स्वभाव के थे। बाहरी परिस्थितियां कभी उनकी आंतरिक स्थिरता को प्रभावित नहीं कर सकीं। उन्होंने अपने बड़े भाई पृथीचंद के विरोध को भी धैर्यपूर्वक सहन किया। उन्होंने अत्यंत कठिन कार्यों को सरलता और उत्कृष्टता के साथ संपन्न किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन, अमृतसर का विस्तार और श्री हरिमंदिर साहिब का निर्माण उनकी दूरदर्शिता और संगठन क्षमता के श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

उन्होंने उपदेशों में परमात्मा और मनुष्य के संबंध को स्वामी और सेवक का संबंध बताया। उनका कहना था कि जब मनुष्य सच्चे मन से परमात्मा की सेवा और स्मरण करता है, तब परमात्मा उसे अपने गुणों से विभूषित कर देता है। ऐसा व्यक्ति दुख, भय और शोक से मुक्त होकर आनंदमय जीवन जीता है और दूसरों में भी आनंद का संचार करता है।
लगभग 25 वर्षों के गुरुत्वकाल में गुरु साहिब ने मानवता के कल्याण के लिए अनेक कार्य किए। उन्होंने अमृत सरोवर को पक्का करवाया, संतोखसर, रामसर और तरनतारन सरोवरों का निर्माण करवाया तथा करतारपुर, तरनतारन साहिब और छेहरटा साहिब जैसे नगर बसाए। उनके समय में सिख धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ और दूर-दूर से संगत उनके दर्शन और मार्गदर्शन के लिए आने लगी। गुरु साहिब की बढ़ती लोकप्रियता से मुगल सत्ता चिंतित हो उठी।

अकबर के बाद जहांगीर सत्ता में आया, जो अधिक कट्टर विचारों वाला था। उसके दरबार में मौजूद कुछ विरोधियों ने गुरु साहिब के विरुद्ध षड्यंत्र रचा और उन पर राजकुमार खुसरो की सहायता करने तथा मुसलमानों को सिख बनाने के आरोप लगाए। बिना किसी प्रमाण के जहांगीर ने गुरु साहिब के प्रति शत्रुता का भाव अपना लिया।
जहांगीर ने उन्हें गिरफ्तार करने और कठोर दंड देने का आदेश दिया। उनसे इस्लाम स्वीकार करने और श्री गुरु ग्रंथ साहिब में इस्लाम की प्रशंसा जोड़ने का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने किसी भी प्रकार का समझौता करने से इनकार कर दिया। उन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

गुरु साहिब को अमानवीय यातनाएं दी गईं, किंतु वह अडोल और शांत बने रहे। सूफी संत सांई मियां मीर ने उनकी सहायता करने की इच्छा प्रकट की, लेकिन गुरु साहिब ने उन्हें रोक दिया। वह चाहते थे कि संसार अन्याय की पराकाष्ठा और धैर्य, समर्पण तथा सत्य की सर्वोच्च शक्ति को देखे। उन्होंने प्रत्येक यातना को शांतिपूर्वक सहन करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि सत्य और धर्म को बलपूर्वक पराजित नहीं किया जा सकता।
उनकी शहादत केवल सिख इतिहास की घटना नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए अन्याय के विरुद्ध साहस और आध्यात्मिक दृढ़ता का अमर संदेश है। श्री गुरु अर्जन देव जी का जीवन विश्वास, धैर्य, सेवा, समर्पण और सत्य का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने मानवता को यह शिक्षा दी कि परमात्मा के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होता। उनका जीवन और उनकी शहादत आज भी करोड़ों लोगों को धर्म, न्याय और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

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