Death Anniversary of Atal Bihari Vajpayee: अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में अटल, विचारों में विराट
punjabkesari.in Saturday, Aug 15, 2026 - 10:39 AM (IST)
Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary 2026: भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हुए हैं, जिन्होंने केवल एक युग का प्रतिनिधित्व नहीं किया, बल्कि राष्ट्रीय चेतना पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे। वह ओजस्वी वक्ता, कुशल राजनीतिज्ञ, संवेदनशील कवि और सच्चे राष्ट्रभक्त थे। 25 दिसम्बर, 1924 को जन्मे अटल जी की जयंती ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।

अटल जी का जन्म ग्वालियर में कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर हुआ। साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण में पले-बढ़े अटल जी छात्र जीवन से ही राष्ट्रसेवा की ओर आकर्षित हुए। वर्ष 1939 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और आगे चलकर पूर्णकालिक प्रचारक बने।
उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से भी राष्ट्र और समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए तथा ‘राष्ट्रधर्म’, ‘पांचजन्य’, ‘स्वदेश’ और ‘वीर अर्जुन’ जैसे पत्र-पत्रिकाओं के लिए कार्य किया।
अटल जी का राजनीतिक जीवन संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा। वह 1957 से 2009 तक दस बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया।
1977 में जनता पार्टी सरकार में उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया और संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में ऐतिहासिक भाषण दिया। वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई और वह उसके संस्थापक अध्यक्ष बने।

वह तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में उन्होंने 13 दिनों तक प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद 1998-99 में और फिर 1999 से 2004 तक उन्होंने देश का नेतृत्व किया। उनका नेतृत्व साहस, संयम और संवेदनशीलता का अनूठा मेल था। 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के माध्यम से भारत ने अपनी सामरिक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। अंतर्राष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद उनकी सरकार ने दृढ़ता से परिस्थितियों का सामना किया।
अटल जी शांति और संवाद के भी समर्थक थे। पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की पहल करते हुए उन्होंने लाहौर की बस यात्रा की। कारगिल युद्ध के बाद भी उन्होंने संवाद का मार्ग खुला रखा। उनका मानना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ शांति के प्रयास भी आवश्यक हैं।
उनके कार्यकाल में देश के बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिली। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को राजमार्गों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।

राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार और दूरसंचार क्षेत्र में नीतिगत सुधारों ने देश के आर्थिक विकास को नई गति दी। राजनीति के साथ-साथ अटल जी साहित्य और कविता के प्रति भी गहरे अनुराग रखते थे। ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ उनका प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है। उनकी कविताओं में संघर्ष, आशा, संवेदना और राष्ट्रप्रेम की भावना दिखाई देती है। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
उनको 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 16 अगस्त, 2018 को उन्होंने अंतिम सांस ली। दिल्ली में राजघाट के निकट उनका स्मारक ‘सदैव अटल’ उनकी स्मृति को जीवंत रखता है।

अटल जी का व्यक्तित्व इसलिए भी विशिष्ट था कि वह राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत कटुता में बदलने के पक्षधर नहीं थे। वह विरोधियों का भी सम्मान करते थे और संसद की गरिमा को सर्वोच्च मानते थे। उनका प्रसिद्ध कथन आज भी लोकतंत्र की मूल भावना को व्यक्त करता है :
‘सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, लेकिन यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।’
यही विचार अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे बड़ी राजनीतिक विरासत और उनके जीवन का सार है।

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