Niti Gyan In Hindi:-  ‘प्रेम’ करो, ‘प्यार’ नहीं

2021-06-13T13:51:04.527

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
शास्त्रों में मनुष्य जीवन से जुड़ी कई बातों का वर्णन मिलता है, जो जीवन में अपनाने से साधारण व्यक्ति को कई तरह का लाभ हो सकता है। इस संदर्भ में न केवल प्राचीन काल के विद्वानों के नाम शामिल हैं बल्कि अन्य कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने मनुष्य के हित की बातों कही हैं। तो आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य के दो नीति श्लोक के साथ-साथ अन्य महान विद्वान द्वारा बताए गए कुछ अनमोल वचन-  

चाणक्य नीति श्लोक-
अतिसंगो दोषमुत्पादयति।
दोष उत्पन्न करती है आसक्ति
अर्थ : अति आसक्ति दोष उत्पन्न करती है
भाव : किसी वस्तु या व्यक्ति में सीमा से अधिक आसक्ति नुक्सान ही पहुंचाती है। इस श्लोक में कई स्थान पर ‘अति प्रसंगों’ भी लिखा मिलता है, तब इसका आशय होगा ‘अनैतिकता’ अर्थात अनैतिक कार्यों में अधिक लिप्त होने से दोष ही उत्पन्न होता है।

‘चाणक्य नीति सूत्र’
चाणक्य नीति श्लोक-
कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपु:। 
अर्थतस्तु निबध्यन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा ॥
अर्थ : मतलब को बनने हैं लोग मित्र 
भाव : आचार्य चाणक्य के अनुसार य न कोई किसी का मित्र है और न ही शत्रु, कार्यवश ही लोग मित्र और शत्रु बनते हैं ।

 

अनमोल वचन- 
तराशने वाले पत्थरों को भी तराश देते हैं, नासमझ हीरे को भी पत्थर करार देते हैं।
ईमानदारी एक महंगा शौक है जो हर किसी के वश की बात नहीं।
अपनी खुशियों की चाबी किसी को न देना, लोग अक्सर दूसरों का सामान गुम कर देते हैं।
उतना ही बोलो जबान से, जितना फिर सुन सको कान से। -जगजीत सिंह भाटिया, नूरपुर बेदी
प्यार हाथ की कलाई में बंधी घड़ी की कीमत और डिजाइन देखता है जबकि सच्चा प्रेम समय देखता है।
प्यार में केवल सूरत दिखती है जबकि प्रेम में तो सूरत के साथ सीरत भी दिखती है।
प्रेम जहां सबसे किया जा सकता है, वहीं प्यार की बात करें तो वह एक से ही हो पाता है।
प्यार उसी से करो जिसे तुम चाहते हो और प्रेम उससे करो जिसे तुम नहीं भी चाहते हो। -मुनि प्रणय सागर
 


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Content Writer

Jyoti

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