Bhavishya Purana Rakhi Story: क्या आप जानते हैं रक्षाबंधन का यह रहस्य? जब बहन नहीं, बल्कि पत्नी ने बांधा था पहला रक्षासूत्र!
punjabkesari.in Friday, Aug 28, 2026 - 02:57 PM (IST)
Raksha bandhan 2026: देश के कई क्षत्रों में रक्षाबंधन को अलग-अलग नामों तथा रूप में मनाया जाता है। जैसे उत्तरांचल में इसे श्रावणी नाम से मनाया जाता है। राजस्थान में इस दिन रामराखी और चूड़ा राखी बांधने की परम्परा है। राम राखी केवल भगवान को ही बांधी जाती है व चूड़ा राखी केवल भाभियों की चूड़ियों में बांधी जाती है। यह रेशमी डोरी से बनाई जाती है। तमिलनाडु, केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में इसे ‘अवनि अवितम’ के रूप में मनाया जाता है।

रक्षाबंधन पर्व पर जहां बहनों को भाइयों की कलाई में रक्षा का धागा बांधने का बेसब्री से इंतजार रहता है, वहीं दूर-दराज बसे भाइयों को भी इस बात का इंतजार रहता है कि उनकी बहना उन्हें राखी भेजे। रक्षाबंधन का अर्थ है रक्षा के लिए प्रतिबद्धता जिसमें एक दूसरे की कलाई पर सूत्र बांधते हैं, जिसे राखी कहते हैं। कच्चे सूत का ये बंधन हमारी अटूट परम्पराओं का प्रतीक है। यह सूत्र गुरु-शिष्य, ब्राह्मण अपने यजमान को व बहनें अपने भाई को बांधती हैं। सनातन संस्कृति के अनुसार भाई पर बहन की रक्षा का विशेष दायित्व होता है। अतः यह पर्व भाई-बहन के विशेष त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन जल-देव वरुण के प्रसननार्थ पूजन भी किया जाता है, जिसमें शिव के त्रिनेत्र का प्रतीक नारियल भी जलप्रवाह करते हैं। राखी बांधते समय भी नारियल का पूजा में होना आवश्यक है। इस दिन ब्राह्मण भी नए यज्ञोपवीत धारण करते हैं। रक्षाबंधन के विशेष पूजन व उपाय से रिश्तों में मिठास आती है, मनोविकार दूर होते हैं, धनागमन होता है व सेहत की सुरक्षा होती है।

Raksha bandhan Shubh Muhurat: रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त: साल 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

Indra sachi story: भविष्य पुराण में वर्णित रक्षासूत्र बांधने की अमर कथा के अनमुसार, सबसे पहले राखी या रक्षा सूत्र देवी शचि ने अपने पति देवराज इंद्र को बांधा था। एक समय देवताओं के राजा इंद्र अपने शत्रु वृत्रासुर से पराजित हो गए थे। तब वह देवों के गुरु बृहस्पति के पास गए। तब देवगुरु बृहस्पति की सलाह से विजय प्राप्ति के लिए इंद्र की पत्नी देवी शची ने इंद्र को राखी बांधी और तब इंद्र वज्र के निर्माण के लिए ऋषि दधीचि की अस्थियां लेने के लिए गए। इंद्र ने उनसे उनकी अस्थियां प्राप्त करके वज्र नामक शस्त्र बनाया। फिर वृत्रासुर पर आक्रमण करके उसे हराया और अपना स्वर्ग का राज्य पुन: प्राप्त किया।
