Bahula Chaturthi 2026 : गाय के बिना भी पूरी होगी बहुला चतुर्थी की पूजा, जानें कौन-सा तरीका है सबसे उत्तम
punjabkesari.in Sunday, Aug 30, 2026 - 09:58 AM (IST)
Bahula Chaturthi 2026 : हिंदू धर्म में बहुला चतुर्थी का बहुत खास महत्व है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन देवों के देव महादेव के पुत्र विघ्नहर्ता गणेश जी को समर्पित है। इस दिन गणेश जी, भगवान श्री कृष्ण और गौ माता की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि सच्चे मन से और पूरे विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा करने से संतान की लंबी आयु होती है और उत्तम स्वास्थ्य बनी रहती है। साथ ही र-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। यदि आपके पास या आसपास गाय उपलब्ध न हो, तो भी आप घर पर पूरे विधि-विधान के साथ यह पूजा संपन्न कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं पूजा के लिए कौन सा तरीका सबसे उत्तम माना जाता है।

गाय की अनुपस्थिति में पूजा के सबसे उत्तम विकल्प
चिकनी मिट्टी से गाय और उसके बछड़े की प्रतिमा बनाएं और मूर्ति को मंदिर में स्थापित करके पूजा करें या घर के पूजा स्थल पर गौ माता और बछड़े की तस्वीर स्थापित करें और फल, फूल, अक्षत, रोली और धूप-दीप से पूजा करें। कुछ स्थानों पर गेहूं या जौं के आटे से गाय-बछड़े की आकृति बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है।
बहुला चतुर्थी व्रत की मुख्य पूजा विधि
बहुला चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
उसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणेश, श्री कृष्ण और गौ-माता की तस्वीर स्थापित करें।
रोली, चंदन, फूल और दुर्वा अर्पित करें। भगवान गणेश और गौ माता को दूर्वा, मोदक और विशेष रूप से गेहूं के पकवान या भुने हुए अनाज का भोग लगाएं।
बहुला गाय और श्री कृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथा सुनें या पढ़ें।
रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करें।
ध्यान रखने योग्य विशेष नियम
बहुला चतुर्थी के दिन गाय के दूध, दही, घी या दूध से बनी मिठाइयों का सेवन वर्जित माना जाता है। इस दिन का दूध केवल बछड़े के अधिकार का माना गया है।
पूजन के उपरांत गौ-सेवा के नाम पर किसी गौशाला में हरा चारा, गुड़ या अनाज दान करें।
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