सावधान ! पूजा में भूलकर भी न करें इन 'बासी' चीजों का प्रयोग, शुभ के बजाय हो सकता है अशुभ
punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 02:49 PM (IST)
Avoid Stale Offerings in Pooja : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ जुड़ने का एक पवित्र माध्यम है। शास्त्रों के अनुसार, पूजा की सफलता दो स्तंभों पर टिकी होती है- पहला सच्चा भाव और दूसरा सामग्री की शुद्धता। अक्सर हम बहुत श्रद्धा के साथ आराधना तो करते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी बासी या अशुद्ध वस्तुओं का चुनाव कर लेते हैं, जो शास्त्रों में पूरी तरह वर्जित मानी गई हैं। मान्यता है कि भगवान को अर्पित की जाने वाली हर वस्तु सात्विक, ताजी और दोषमुक्त होनी चाहिए। बासी सामग्री का उपयोग न केवल पूजा के सकारात्मक प्रभाव को कम करता है, बल्कि यह घर में नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष का कारण भी बन सकता है। जब हम भगवान के सम्मुख बैठते हैं, तो हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम उन्हें सर्वश्रेष्ठ और शुद्धतम भेंट अर्पित करें। तो आइए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें मंदिर की दहलीज से बाहर रखना ही श्रेष्ठ है ताकि आपके घर पर देवी-देवताओं का आशीर्वाद सदैव बना रहे।

मुरझाए और बासी फूल
देवी-देवताओं को हमेशा खिले हुए और ताजे फूल अर्पित करने चाहिए। जमीन पर गिरे हुए या एक दिन पहले के बासी फूल चढ़ाना वर्जित है। मुरझाए हुए फूल नकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं। तुलसी के पत्ते, बेलपत्र और अगस्त्य के फूल कई दिनों तक बासी नहीं माने जाते।
बासी जल का प्रयोग
पूजा और कलश स्थापना के लिए हमेशा ताजा जल उपयोग में लाना चाहिए। रात भर लोटे या किसी पात्र में रखा हुआ पानी बासी हो जाता है। भगवान को स्नान कराने या भोग बनाने के लिए ताजे जल का ही उपयोग करें। गंगाजल कभी बासी नहीं होता, इसे आप कभी भी उपयोग कर सकते हैं।

पहले से अर्पित की गई नैवेद्य
एक बार जो भोग भगवान को चढ़ा दिया गया हो, उसे दोबारा पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। भोग लगाने के बाद उसे तुरंत प्रसाद के रूप में वितरित कर देना चाहिए। झूठा या पुराना नैवेद्य चढ़ाना अपमान माना जाता है।
अगरबत्ती या धूप की राख
अक्सर लोग पूजा घर की सफाई करते समय पुरानी राख वहीं छोड़ देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पूजा स्थान पर जली हुई अगरबत्ती के अवशेष या राख का जमा होना दरिद्रता को आमंत्रण देता है। हर पूजा से पहले स्टैंड को साफ करना जरूरी है।
पुराने दीये और अधजली बत्ती
एक बार उपयोग किए गए मिट्टी के दीये को दोबारा नहीं जलाना चाहिए। इसी तरह, कल की अधजली रूई की बत्ती को हटाकर नई बत्ती लगानी चाहिए।

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