जीवन क्या है?

punjabkesari.in Thursday, Jun 18, 2015 - 06:24 AM (IST)

विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि ‘जिंदगी एक रंगमंच है और हम लोग इस रंगमंच के कलाकार’, सभी लोग जीवन को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। कोई कहता है जीवन एक खेल  है। कोई कहता है जीवन ईश्वर का दिया हुआ उपहार है, कोई कहता है जीवन एक यात्रा है, कोई कहता है जीवन एक दौड़ है और बहुत कुछ।

जीवन क्या है?
* मनुष्य का जीवन एक प्रकार का खेल है और मनुष्य इस खेल का मुख्य खिलाड़ी। 
 
* यह खेल मनुष्य को हर पल खेलना पड़ता है।
 
* इस खेल का नाम है ‘‘विचारों का खेल।’’
 
* इस खेल में मनुष्य को दुश्मनों से बच कर रहना पड़ता है। 
 
* मनुष्य अपने दुश्मनों से तब तक नहीं बच सकता, जब तक मनुष्य के मित्र उसके साथ नहीं हैं।
 
* मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र ‘विचार’ है और उसका सबसे बड़ा दुश्मन भी विचार ही है।
 
* मनुष्य के मित्रों को सकारात्मक विचार कहते हैं और मनुष्य के दुश्मनों को नकारात्मक विचार कहा जाता है।
 
* मनुष्य दिन में 60,000 से 90,000 विचारों के साथ रहता है।
 
* यानी हर पल मनुष्य एक नए दोस्त या दुश्मन का सामना करता है।
 
* मनुष्य का जीवन विचारों के चयन का एक खेल है।
 
* इस खेल में मनुष्य को यह पहचानना होता है कि कौन-सा विचार उसका दुश्मन है और कौन-सा उसका दोस्त और फिर मनुष्य को अपने दोस्त को चुनना होता है।
 
* इस खेल का मूल मंत्र यही है कि मनुष्य जब निरंतर दुश्मनों को चुनता है तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है।
 
* जब भी मनुष्य कोई गलती करता है और कुछ दुश्मनों को चुन लेता है तो वे दुश्मन, मनुष्य को भ्रमित कर देते हैं और फिर मनुष्य का स्वयं पर काबू नहीं रहता और वह निरंतर अपने दुश्मनों को चुनता रहता है।

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