फोनपे पेमेंट्स बिज़नेस ने वित्तवर्ष 2025 में एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए में 19,318 मिलियन रुपये कमाए

punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 12:12 AM (IST)

(वेब डेस्क): फोनपे के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक कंपनी का मुख्य पेमेंट्स बिज़नेस लगातार लाभदायक स्थिति में है और प्रॉस्पेक्टस में शामिल किए गए संचालन के हर पहलू में काफी अच्छे लाभ के साथ तेज वृद्धि प्रदर्शित कर रहा है।

कंपनी की फाईनेंशियल परफॉर्मेंस के मामले में प्रदर्शित इस अंतर ने निवेश के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है।

आंकड़े जिन्होंने बदल दी पूरी कहानी

फोनपे के डी.आर.एच.पी में सामने आया कि एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए दो बिज़नेस ग्रुपिंग में बंटा हुआ है। पहला है, फोनपे का प्लेटफॉर्म, जो मुख्य पेमेंट्स बिज़नेस, कंज़्यूमर पेमेंट, मर्चैंट पेमेंट और लेंडिंग एवं इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर केंद्रित है। दूसरा है, नया प्लेटफॉर्म, जिसमें शेयर मार्केट और इंडस ऐपस्टोर शामिल हैं।

यह विभाजन कंपनी को नुकसान से लगातार मुनाफे की ओर ले जा रहा है।

फोनपे प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए

अवधि    फोनपे प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए

(₹ मिलियन)

वित्त वर्ष 2023    (2,607.04)

वित्त वर्ष 2024    8,389.62

वित्त वर्ष 2025    19,318.43

पहली छमाही वित्त वर्ष 2025           7,790.89

पहली छमाही वित्त वर्ष 2026           5,241.32

 

नए प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए

 

अवधि    नए प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए

(₹ मिलियन)

वित्त वर्ष 2023    (1,147.55)

वित्त वर्ष 2024    (1,870.81)

वित्त वर्ष 2025    (4,546.51)

पहली छमाही वित्त वर्ष 2025           (2,742.91)

पहली छमाही वित्त वर्ष 2026           (2,702.23)

 

फोनपे प्लेटफॉर्म का पेमेंट्स बिज़नेस, जो वित्तवर्ष 2023 में 2,607 मिलियन रुपये के नुकसान में था, वह वित्तवर्ष 2024 में 8,390 रुपये के लाभ और वित्तवर्ष 2025 में 19,318 मिलियन रुपये के लाभ में बदल गया। यानी इन दो वित्तवर्षों में मुख्य बिज़नेस में ऑपरेटिंग लाभ में 21,925 मिलियन रुपये की बढ़ोत्तरी हुई।

दूसरी तरफ, नए प्लेटफॉर्म द्वारा वित्तवर्ष 2025 में एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए में 4,547 मिलियन रुपये लगाए गए। यह उभरते हुए बिज़नेस के लिए एक बड़ा निवेश है, जो अभी भी विकास के चरण में है।

इसमें जो कुल नुकसान दिखाई दे रहा है, उसमें दो अलग-अलग चीजें शामिल हैं। पहला है फोनपे के मुख्य व्यवसाय से मिलने वाला 19 बिलियन रुपये का ऑपरेटिंग लाभ, माईनस अगली जनरेशन के बिज़नेस का निर्माण करने की लागत। पेमेंट्स बिज़नेस बिना समस्या के लगातार बढ़ रहा है।

पेमेंट्स बिज़नेस में पैसा कैसे बनता है

डी.आर.एच.पी में उन तरीकों को विस्तार से समझाया गया है, जिनके द्वारा फोनपे अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म से पैसा कमाता है। ये तरीके जीरो मर्चैंट डिस्काउंट रेट फ्रेमवर्क से अलग हैं, जो बिज़नेस का आधार बताया गया है।

पाँच अलग-अलग राजस्व स्रोत कंज़्यूमर पेमेंट को सपोर्ट करते हैंः

पहला है पर्सन-टू-पर्सन मनी ट्रांसफर पर ट्रांज़ैक्शन प्रोसेसिंग फीस, जो सीधे पार्टनर बैंकों से मिलती है। फोनपे द्वारा प्रोसेस किए गए हर पी2पी ट्रांसफर के लिए अदाकर्ता बैंक फोनपे को एक फीस देता है। राजस्व का यह स्रोत एमडीआर पॉलिसी पर निर्भर नहीं होता और वॉल्यूम के मुताबिक लगातार बढ़ता रहता है।

दूसरा है सेवाओं पर लेन-देन का शुल्क। मोबाईल रिचार्ज, भारत कनेक्ट (पूर्व में बी.बी.पी.एस) द्वारा बिल भुगतान, डिजिटल गोल्ड और सिल्वर का लेन-देन, ट्रैवल टिकटिंग और ट्रांज़िट बुकिंग पर फोनपे को फीस मिलती है। यह फीस पार्टनर टेलीकॉम कंपनियाँ, ऑनलाईन ट्रैवल एजेंसी और बी.बी.पी.एस पार्टिसिपेंट देते हैं। यह फीस प्रति लेन-देन के कुछ प्रतिशत हिस्से में या फिर एक नियत राशि के रूप में दी जाती है। इन श्रेणियों पर जीरो एम.डी.आर लागू नहीं होता है।

तीसरा है प्लेटफॉर्म और सुविधा शुल्क। यह विशेष सेवाओं के लिए सीधे ग्राहक से लिया जाता है। यह शुल्क प्रति लेन-देन एक फिक्स्ड राशि के रूप में हो सकता है या फिर भुगतान की जाने वाली राशि के कुछ प्रतिशत हिस्से के रूप में। डी.आर.एच.पी के मुताबिक फोनपे ग्राहकों से ‘‘विशेष सेवाओं के लिए प्लेटफॉर्म या सुविधा शुल्क’’ लेता है। यह लेन-देन के नेटवर्क पर पैसा कमाने का सीधा तरीका है।

चौथा है भारत सरकार से डिजिटल इंसेंटिव, जो पार्टनर बैंकों द्वारा दिया जाता है। डिजिटल इंसेंटिव स्कीम के अंतर्गत, छोटे मर्चैंट्स को 2,000 रुपये से कम के पी2एम यूपीआई भुगतान की प्रोसेसिंग पर अदाकर्ता पीएसपी बैंक या अदाकर्ता ऐप को मिलने वाले इंसेंटिव का एक हिस्सा फोनपे को मिलता है। इस इंसेंटिव की गणना भुगतान के कुल मूल्य के कुछ प्रतिशत हिस्से के रूप में की जाती है। यह पेमेंट के प्रकार, पार्टनर या लेन-देन के मूल्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। यह स्कीम यूपीआई के परिवेश में शामिल पार्टिसिपेंट्स के लिए कमर्शियल इंसेंटिव की प्रणाली के रूप में ए.डी.आर की जगह लेने के लिए बनाई गई है।

चौथी है टियर 3 से टियर 6 शहरों तथा उत्तर-पूर्व के राज्यों जैसे वंचित इलाकों में पेमेंट डिवाईस स्मार्टस्पीकर और ईडीसी मशीन लगाने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया से मिलने वाली पी.आई.डी.एफ ग्रांट। वित्तवर्ष 2025 में इन ग्रांट्स द्वारा अन्य ऑपरेटिंग राजस्व में 1982.28 मिलियन रुपये प्राप्त हुए तथा 30 सितंबर, 2025 को समाप्त हुई छमाही में इन ग्रांट्स ने 1,674.86 मिलियन रुपये प्रदान किए।

स्केल, जो है राजस्व का आधार

इन तरीकों से मिलने वाला राजस्व लेन-देन के एक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है, जो काफी बड़ा है और तेजी से बढ़ रहा है।

फोनपे द्वारा 30 सितंबर, 2025 को समाप्त हुए छः महीनों में सालाना दर से 53.40 बिलियन कंज़्यूमर लेन-देन किए गए। इस दौरान फोनपे प्लेटफॉर्म ने प्रतिदिन 303.42 मिलियन से ज्यादा कंज़्यूमर लेन-देन और 140.40 मिलियन से ज्यादा मर्चैंट लेन-देन किए। प्रतिसेकंड पीक थ्रूपुट 22,369 लेन-देन था।

फोनपे प्लेटफॉर्म पर ग्राहक टीपीवी वित्तवर्ष 2024 में 100.22 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर वित्तवर्ष 2025 में 132.70 ट्रिलियन हो गया। यानी 32.4 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 30 सितंबर 2025 को समाप्त हुए छः महीनों में 73.70 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच गया, जो इसके पिछले साल की इसी अवधि में 61.98 ट्रिलियन रुपये था।

डीआरएचपी की रेडसीर रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 में मासिक एक्टिव कस्टमर्स की संख्या 230.08 मिलियन तक पहुंच गई, जो भारत की कुल स्मार्टफोन आबादी का 32% से 34% के बीच है।

कंज्यूमर पेमेंट्स रेवेन्यू, जिसमें ऊपर बताए गए कमाई के सभी तरीके शामिल हैं, वित्तवर्ष 2023 में ₹24,163.52 मिलियन से बढ़कर वित्तवर्ष 2024 में ₹36,240.43 मिलियन और वित्तवर्ष 2025 में ₹45,069.03 मिलियन तक पहुँच गया, यानी सालाना कई बिलियन की कमाई करने वाले बिजनेस ने 36.6% का सी.ए.जी.आर प्रदर्शित किया।

लागत संरचना: प्रोसेसिंग शुल्क नियंत्रित रूप से बढ़ रहा है

डी.आर.एच.पी के अनुसार फोनपे द्वारा पार्टनर बैंकों, पी.एस.पी और एक्वायरिंग प्रोसेसर्स को दिया जाने वाला पेमेंट प्रोसेसिंग शुल्क पूरा दिया गया।

अवधि    पेमेंट प्रोसेसिंग शुल्क (₹ मिलियन)                कुल खर्च का %

वित्तवर्ष 2023     6,669.66               11.29%

वित्तवर्ष 2024     11,664.38             15.04%

वित्तवर्ष 2025     16,881.78             17.97%

पहली छमाही वित्तवर्ष 2026            10,900.01             17.96%

 

कुल पेमेंट सर्विस रेवेन्यू, जिसमें पी.आई.डी.एफ इंसेंटिव शामिल हैं, वित्तवर्ष 2025 में ₹64,979.39 मिलियन था, जबकि पेमेंट प्रोसेसिंग शुल्क ₹16,881.78 मिलियन था। बाकी सभी खर्चों से पहले, नेट स्प्रेड लगभग ₹48,097 मिलियन था, जो कंपनी के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर, एम्प्लॉई बेस और नए प्लेटफॉर्म में जारी निवेश के लिए एक सकल योगदान है।

डी.आर.एच.पी में यह भी सामने आया कि प्रोसेसिंग शुल्क पेमेंट के इंस्ट्रूमेंट टाइप, मर्चेंट कैटेगरी और ट्रांज़ैक्शन रूटिंग नेटवर्क के आधार पर बदलते हैं। कार्ड से किए जाने वाले लेन-दें, जैसे यू.पी.आई पर रूपे क्रेडिट कार्ड पर यू.पी.आई पी2पी लेनदेन के मुकाबले ज़्यादा इंटरचेंज-लिंक्ड शुल्क लगता है, लेकिन ये लेनदेन की प्रोसेसिंग पर ज़्यादा कमाई भी प्रदान करते हैं। कंपनी का कहना है कि वह “आमतौर से अन्य पेमेंट इंस्ट्रूमेंट के मुकाबले फोनपे वॉलेट से होने वाले और क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन प्रोसेसिंग शुल्क कमाती है।”

फिर नुकसान क्यों दिखाई दिया

फोनपे प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए 19,318 मिलियन रुपए तथा कुल नुकसान 17,274 मिलियन रुपए रहा। इन दोनों के बीच के इस अंतर का ब्यौरा दो बातों से मिलता है, जिनका इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि पेमेंट बिज़नेस के कमर्शियली फायदेमंद है या नहीं।

पहला है शेयर पर आधारित भुगतान खर्च। डी.आर.एच.पी के अनुसार वित्तवर्ष 2025 में शेयर पर आधारित कुल भुगतान खर्च 23,578.62 मिलियन रुपए था। यह एक नॉन-कैश अकाउंटिंग शुल्क है, जो आय के स्टेटमेंट में दिखता है, पर बिज़नेस से बाहर जाने वाला कैश प्रदर्शित नहीं करता। अकेला यह आइटम दर्ज किए गए कुल नुकसान से बड़ा है। फोनपे द्वारा प्रदर्शित किए गए एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए और एडजस्टेड लाभ के विवरण में इस शुल्क को शामिल नहीं किया गया है। इसी कारण बिज़नेस के एडजस्टेड व्यू और जी.ए.ए.पी व्यू में इतना अंतर दिखाई दे रहा है।

दूसरा है नए प्लेटफॉर्म्स, शेयर.मार्केट और इंडस ऐपस्टोर में किया गया निवेश, जिसमें वित्तवर्ष 2025 के एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए में से 4,546.51 मिलियन रुपए खर्च हुए। ये कोई स्ट्रक्चरल स्ट्रेस में पेमेंट मॉडल नहीं प्रदर्शित करते, बल्कि ग्रोथ इन्वेस्टमेंट हैं, जिनके लिए मुख्य बिज़नेस से मिलने वाले पैसे से फंड दिया गया।

वित्तवर्ष 2025 में पूरे समूह के लिए कुल एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए 14,771.92 मिलियन रुपए था, जो ऑपरेशन से मिलने वाले राजस्व का 20.76% था। दूसरी तरफ, बिज़नेस ने वित्तवर्ष 2025 में लगातार दूसरे साल एडजस्टेड लाभ दर्ज करते हुए 6,304.52 मिलियन रुपए का लाभ अर्जित किया।

आंकड़ों से साफ है विकास का रास्ता

वित्तवर्ष 2023 और वित्तवर्ष 2025 के बीच कंज़्यूमर पेमेंट्स से मिलने वाला राजस्व 36.6% की सी.ए.जी.आर से बढ़ते हुए 24,163 मिलियन रुपए से बढ़कर 45,069 मिलियन रुपए हो गया। इसी दौरान, मुख्य पेमेंट प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए 2,607 मिलियन रुपए के नुकसान से सुधरकर 19,318 मिलियन रुपए के लाभ तक पहुंच गया, यानी इसने स्केल अर्थव्यवस्था की मदद से ऑपरेटिंग लाभ में 21,925 मिलियन रुपए की वृद्धि की।

ऑपरेशन के लिहाज से पेमेंट बिज़नेस पहले ही लाभ की स्थिति में आ चुका है। खाताबुक में दिख रहा नुकसान नॉन-कैश ई.एस.ओ.पी अकाउंटिंग और अगले तीन बिज़नेस बनाने की लागत के कारण है। अगर परिभाषाओं को देखा जाए, तो यह कमजोर पेमेंट मॉडल वाली कंपनी नहीं है। बल्कि यह एक ऐसी कंपनी है, जो अपने फंक्शनल पेमेंट्स बिज़नेस से मिलने वाले लाभ से अन्य फाइनेंशियल सर्विसेज़ बिज़नेस तैयार कर रही है। यह वही मॉडल है, जिसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण फिनटेक प्लेटफॉर्म्स का निर्माण किया है।

प्लेटफॉर्म का एडजस्टेड ई.बी.आई.टी.डी.ए मार्जिन वित्तवर्ष 2025 में 20.76% तक पहुंच गया। एडजस्टेड प्रॉफिट मार्जिन 8.26% था। प्लेटफॉर्म से 1,904.76 मिलियन रुपए के फ्री कैश का निर्माण हुआ। यह कंपनी हर साल 132 ट्रिलियन रुपए से अधिक मूल्य के पेमेंट की प्रोसेसिंग करती है, जिससे बड़ी कमाई के अवसर मिलते हैं।


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News Editor

Dishant Kumar

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