हेलीकाप्टर दुर्घटना, पहले भी आई थी तकनीकी दिक्कतें

punjabkesari.in Friday, May 13, 2022 - 07:36 PM (IST)

रायपुर, 13 मई (भाषा) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित विमानतल में दुर्घटना का शिकार हुए हेलीकाप्टर को पहले भी उड़ान के दौरान तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया।
वर्ष 2007 में खरीदा गया राज्य शासन का अगुस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर बृहस्पतिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस घटना में दो पायलटों की मौत हो गई है।
दो इंजन वाले इस ए डब्ल्यू 109 पावर एलीट ​हेलीकाप्टर की खरीद के दौरान विपक्ष ने तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को यहां बताया कि राज्य सरकार के एकमात्र इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल वीआईपी, मुख्यमंत्री, उनके कैबिनेट सहयोगियों और सरकारी अधिकारियों को लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा था। हालांकि पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के उत्तरी क्षेत्र का ​दौरा किया गया तब इस दौरान एक निजी हेलीकॉप्टर को किराए पर लिया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार रात में जब दिल्ली से रायपुर पहुंचे नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) के पायलट कैप्टन ए पी श्रीवास्तव के साथ राज्य शासन के हेलीकाप्टर के वरिष्ठ पायलट कैप्टन गोपाल कृष्ण पंडा स्वामी विवेकानंद विमानतल में अभ्यास उड़ान पर थे तब करीब नौ बजकर 10 मिनट पर हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी हेलीकाप्टर में तकनीकी दिक्कतें आई थी। लेकिन तब सुधार कर लिया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि हेलीकाप्टर के बाएं इंजन की दो बार मरम्मत की गयी थी। अंतिम बार वर्ष 2017 में इस इंजन की मरम्मत की गयी थी। दाएं इंजन की एक बार मरम्मत की गयी तथा पूरी तरह खराब होने के बाद नया इंजन खरीद कर लगाया गया था ।
अधिकारियों ने बताया कि फरवरी 2018 में इस हेलीकॉप्टर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को लेकर रायपुर स्थित पुलिस लाइन के हेलीपैड से उड़ान भरी थी। लेकिन कुछ ही मिनटों के भीतर तकनीकी खराबी के कारण एहतियातन इसे नीचे उतार लिया गया था।
उन्होंने बताया कि इससे पहले वर्ष 2016 में जब रमन सिंह हेलीकॉप्टर से रायपुर से सुकमा जिले के लिए रवाना हुए थे तब हेलीकाप्टर को अचानक झटका लगा और तकनीकी खराबी के कारण वह कुछ नीचे आ गया।
उन्होंने बताया कि इसी तरह मई वर्ष 2016 में राज्य के तत्कालीन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के दौरे के दौरान भी हेलीकाप्टर को नीचे उतारना पड़ा था।
बृहस्पतिवार रात को हेलीकाप्टर दुर्घटना के बाद एक सरकारी बयान में कहा गया कि प्रारंभिक जानकारी में हेलीकाप्टर में तकनीकी खराबी के कारण यह दुर्घटना हो सकती है। हालांकि सही कारणों का पता लगाने के लिए डीजीसीए और राज्य सरकार द्वारा विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी।
इस बीच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को यहां बताया कि डीजीसीए का एक दल हादसे की जांच के लिए यहां पहुंचा है। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से में खराबी आने के कारण यह हादसा हुआ है।
विमानतल के करीब मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हेलीकाप्टर कम ऊंचाई पर उड़ रहा था और अचानक नीचे गिर गया।
राज्य के ​वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस हेलीकाप्टर हादसे में मृत 56 वर्षीय पंडा, पूर्व में वायु सेना में विंग कमांडर के पद पर थे। उन्होंने वर्ष 2005 में कमर्शियल पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया था। उनके पास लगभग नौ हजार घंटे के उड़ान का अनुभव था। उन्होंने डीजीसीए में फ्लाइट ट्रेनर/इंस्ट्रक्टर तथा तमिलनाडु सरकार में मुख्य पायलट के रूप में काम किया था।
अधिकारियों ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर को तत्कालीन भाजपा सरकार ने वर्ष 2007 में खरीदा था। इसे अगुस्ता वेस्टलैण्ड कंपनी के प्राधिकृत विक्रेता हांगकांग स्थित कंपनी शार्प ओशियन इन्वेस्टमेंट प्रायवेट लिमिटेड से 65.70 लाख डॉलर (26.58 करोड़ रुपए) में खरीदा गया था।
अगुस्ता हेलीकाप्टर की खरीद को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने टिप्पणी की थी। जब मामला लोक लेखा समिति में गया तब समिति ने कहा कि सीधे क्रय प्रस्ताव न कर टेंडर के माध्यम से खरीदी में शासन द्वारा विलम्ब करने से 65.00 लाख रूपए अधिक भुगतान करना पड़ा। अतः संबंधितों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए।
सीएजी के निष्कर्षों का हवाला देते हुए वर्ष 2016 में तत्कालीन विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2007 में हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए अगुस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में सभी नियमों की अनदेखी की थी।
हालांकि भाजपा ने आरोपों को "राजनीति से प्रेरित और निराधार" बताते हुए खारिज कर दिया था।


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PTI News Agency

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