हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बना सफेद हाथी

2021-04-08T19:51:51.543

चंडीगढ़ (ब्यूरो): हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल प्रदेश सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है, क्योंकि इस ट्रिब्यूनल के गठन के बाद केसों की सुनवाई आज तक नहीं हुई। बता दें कि 24 जुलाई, 2019 को केंद्र सरकार द्वारा हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल अधिसूचित (गठित) किया गया। उसी दिन केंद्रीय कार्मिक विभाग द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस स्नेह पराशर को उक्त ट्रिब्यूनल की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया एवं उनका वेतन मासिक 2 लाख 25 हजार रुपए निर्धारित किया गया।

 

उनकी नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने के 5 वर्षों तक या उनकी आयु 68 वर्ष की होने तक या आगामी आदेशों तक ,जो भी पहले हो तक के लिए की गई। उनकी सेवा शर्तो पर प्रशासनिक अधिकरण कानून, 1985 के प्रावधान, जैसे वर्ष 2006 में संशोधित किए गए, लागू किए गए। हालांकि जून, 2017 में केंद्र सरकार द्वारा सभी ट्रिब्यूनलों के चेयरपर्सन और सदस्यों की सेवा शर्तों आदि के लिए बनाए गए नियमों को जस्टिस पराशर पर लागू पर निर्णय केंद्र सरकार पर छोड़ा गया जब सुप्रीम कोर्ट में उक्त नियमों की वैधता के मामले का फाइनल निपटारा होगा।


‘वकीलों के विरोध के कारण ट्रिब्यूनल क्रियाशील नहीं’ 
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि 25 जुलाई, 2019 को ही जस्टिस पराशर ने ट्रिब्यूनल की चेयरपर्सन के तौर पर कार्यभार संभाल लिया था। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल की चेयरपर्सन के तौर पर नियुक्ति के 20 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद ही उक्त ट्रिब्यूनल क्रियाशील ही नहीं हुआ है क्योंकि 25 जुलाई 2019 से ही हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने ट्रिब्यूनल के गठन के गठन के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य स्थगन कर दिया जो 3 सप्ताह चला, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस विषय पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाईं जिसे ट्रिब्यूनल बनाने की कानूनी वैधता, उसकी आवश्यकता और उसके कामकाज करने के मामले में अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी जो कि आज तक लंबित है जिस कारण न तो उक्त ट्रिब्यूनल में न्यायिक सदस्यों और प्रशासनिक सदस्यों का चयन और नियुक्ति सिरे चढ़ पाई है और न ही ट्रिब्यूनल के प्रक्रिया संबंधी नियम और विनियमन आदि नोटिफाई हो पाए हैं। इस प्रकार यह ट्रिब्यूनल हरियाणा सरकार के लिए एक सफेद हाथी बन गया है।


News Editor

Vikash thakur

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